फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Fatehabad News, Hindi News, agriculture, BT cotton, seeds, Fatehabad

बीटी कॉटन के बीज को अभी तक नहीं दी अप्रूवल

Sun, 10 Apr 2016 12:20 AM IST
मुकेश खुराना/अमर उजाला, फतेहाबाद
मुकेश खुराना/अमर उजाला, फतेहाबाद Updated Sun, 10 Apr 2016 12:20 AM IST
विज्ञापन
Fatehabad News, Hindi News, agriculture, BT cotton, seeds, Fatehabad
किसान - फोटो : fatehabad
सफेद मक्खी की मार से भयभीत सरकार ने इस बार बीटी कॉटन के बीज को अप्रूवल नहीं दी है। नरमे की बिजाई का सीजन चल रहा है, लेकिन बाजार में अभी तक बीज ही उपलब्ध नहीं हुआ है। कुछेक किसान पंजाब से बीज लाकर बीटी कॉटन की बिजाई कर रहे हैं जबकि अन्य किसान यहां के बीज विक्रेताओं के यहां चक्कर काटने को मजबूर हैं। एचएसडीसी के अधिकारी इस बात की पुष्टि भी करते हैं कि उनके यहां 200 से ज्यादा किसान प्रतिदिन बीटी कॉटन का बीज लेने के लिए आते हैं।
विज्ञापन


पिछली बार 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर बीटी कॉटन की बिजाई की गई थी। सफेद मक्खी की बिमारी के चलते पूरी की पूरी फसल नष्ट हो गई और किसान माथे पर हाथ रखकर बैठ गया। अब गेहूं निकल रहा है और नरमे की बिजाई चल रही है, लेकिन किसानों को बीटी कॉटन का बीज नहीं मिल रहा। कारण है पिछली बार से डरी सरकार और कृषि विभाग बीज की वैरायटी को स्वीकृत नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन


कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने बीटी कॉटन की 32 वैरायटी के बीज पास करके निदेशक कृषि विभाग को भेज रखे हैं, लेकिन अभी तक बीज की किस्मों को अनुमति नहीं मिल पाई। इस कारण बीज कंपनियां डिस्ट्रीब्यूटरों के पास बीज भेजने को असमर्थ हैं। हालांकि, सीएनएफएफ के पास बीज स्टॉक है। अनुमति के बाद ही बीज सभी डिस्ट्रीब्यूटरों पर सप्लाई होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


फतेहाबाद में बीज की सरकारी एजेंसी हरियाणा सीड्स डेवलेपमेंट कार्पोरेशन (एचएसडीसी), (एचएलआरडीसी) हरियाणा भूमि विकास प्राधिकरण तथा 20 प्राइवेट कंपनियों के बीज विक्रेता हैं, लेकिन इनमें कहीं भी बीज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कुछ किसान पंजाब से बीज लाकर बिजाई कर रहे हैं जो उन्हें मंहगा पड़ रहा है।

मानावाली के किसान मनदीप सिंह ने कहा कि सरसों के बाद बीटी कॉटन की बिजाई करनी थी, लेकिन बीज न मिलने से जमीन सूख रही है। अब तो एक-एक दिन भारी पड़ रहा है।

डीडीए डॉ. बलवंत सहारण ने बताया कि बीटी कॉटन बीज के एक पैकेट में 400 ग्राम बीज के साथ 120 ग्राम एक अलग पैकेट होता है। किसान 400 ग्राम के पैकेट की बिजाई कर लेते हैं, जबकि 120 ग्राम वाले छोटे पैकेट को फेंक देते हैं। किसानों का मानना है कि 120 ग्राम थैली के बीज से उत्पादन कम होगा, जबकि असलियत यह है कि 120 ग्राम की थैली में जो पौधे लगते हैं, सुंडी उन पौधों को पसंद करती है। अगर इसकी बिजाई साथ हो तो सुंडी बीटी कॉटन पर न लगकर इस पौधों पर लगेगी। इससे किसानों की फसल बच जाएगी। पौधों को बीमारी से बचाने के लिए यह एक अलग तरह की तकनीक है।


बीज नहीं पहुंचा तो होगी मारामारी
नरमा बिजाई का समय बीतता जा रहा है। सरसों की कटाई के बाद काफी समय से जमीन खाली पड़ी है। किसान बीज के लिए धक्के खा रहे हैं। यहां तक कि पंजाब से भी बीज खरीदकर लाने को मजबूर हो रहे हैं। बीज आने में देरी घातक साबित हो सकती है क्योंकि जैसे ही बीज विक्रेताओं के पास पहुंचेगा लेने वालों की मारामारी हो जाएगी।

अभी एचएसडीसी के पास बीज नहीं आया। प्रतिदिन 200 किसान बीज खरीद के लिए आते हैं।
भजन सिंह, सेल्स मैनेजर, एचएसडीसी

अप्रूवल नहीं मिलने के कारण अभी बीज नहीं मंगवाया जा सकता। अप्रूवल आते ही बीटी कॉटन का बीज मार्केट में आ जाएगा।
सुरेंद्र मित्तल, एसके ट्रेडर्स एवं डिस्ट्रीब्यूटर बीज विक्रेता

निदेशक की तरफ से अभी अप्रूवल आ गई है। सोमवार तक उम्मीद है कि सभी बीज विक्रेताओं के यहां बीज मिलना शुरू हो जाएगा।
डॉ. बलवंत सिंह सहारण, उपनिदेशक, कृषि विभाग फतेहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed