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Fatehabad News: धुंध व शीतलहर से कंपकंपाए लोग, धुंध के कारण पीली मंदौरी के पास ट्रैक्टर से टकराया ट्राला
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फतेहाबाद के गांव भोडियाखेड़ा में गेहूं की फसल पर जमी ओस।
- फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। जिले में ठंड व शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे लोग कंपकंपाते नजर आए। रविवार रात को धुंध गहरा गई और दृश्यता शून्य के बराबर हो गई। सोमवार दोपहर तक जिले में धुंध की चादर बिछी रही और सड़क पर वाहन दिन में ही लाइट जलाकर रेंग-रेंग कर चले। धुंध की वजह से गांव पीलीमंदौरी के पास एक ट्राला सड़क पर साइड में पलटे ट्रैक्टर से टकरा गया। हादसे में जान-माल की हानि तो नहीं हुई, लेकिन ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गया। धुंध की वजह से बसें भी अपने गंतव्य पर एक से सवा घंटे तक लेट पहुंची।
सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विभाग के अनुसार पाला जमना गेहूं और चने कि फसल के लिए फायदेमंद है और सरसों कि फसल के लिए नुकसान दायक है। सरसों की फसल के लिए दिन में धूप निकलना जरूरी होता है। सरसों की फसल से ओस का पानी सूखना अति आवश्यक है, अगर पानी नहीं सूखता है तो सरसों में चेपा जैसी बीमारी हो जाती है, जिसके कारण पैदावार होता है। सरसों की फसल को ठंड से बचाने के लिये सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई करने से पाला नहीं जमता और पैदावार क्षमता बढ़ती है।
ठंड के प्रभाव से दुग्ध उत्पादन की क्षमता कम हुई है। ठंड की वजह से पशु भरपूर मात्रा में पानी चारा खा नहीं पाते, जिसके कारण दूध उत्पादन सामान्य से कम हो रहा है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, पशुओं को धूप न लगने कि वजह से उनकी मांसपेशियों में जकड़न भी आ जाती है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शाम को जल्दी मकान के अंदर ही बांधे और घर के अंदर ही उनको चारा दें। धूप निकलने से पहले पशुओं को कंबल आदि ओढ़ाकर रखें। उनके अनुसार, ठंड की वजह से बेसहारा पशुओं पर भी संकट आ सकता है। बेसहारा पशुओं को ठंड लगने से निमोनिया की बीमारी हो सकती है, जिसका उपचार ना होने कि वजह से मौत उनकी मौत भी हो सकती है।
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हरियाणा राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 10 जनवरी को मौसम आमतौर पर खुश्क रहने तथा उत्तरी व उत्तर पश्चिमी शीत हवाएं चलने से रात्रि तापमान में फिर से गिरावट आने की संभावना है। इसके बाद 11 जनवरी को एक ओर पश्चिमी विक्षोभ आने से राज्य के मौसम में फिर से बदलाव संभावित है।
-डॉ. मदन खीचड़, विभागाध्यक्ष मौसम विभाग, एचएयू।
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सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विभाग के अनुसार पाला जमना गेहूं और चने कि फसल के लिए फायदेमंद है और सरसों कि फसल के लिए नुकसान दायक है। सरसों की फसल के लिए दिन में धूप निकलना जरूरी होता है। सरसों की फसल से ओस का पानी सूखना अति आवश्यक है, अगर पानी नहीं सूखता है तो सरसों में चेपा जैसी बीमारी हो जाती है, जिसके कारण पैदावार होता है। सरसों की फसल को ठंड से बचाने के लिये सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई करने से पाला नहीं जमता और पैदावार क्षमता बढ़ती है।
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ठंड के प्रभाव से दुग्ध उत्पादन की क्षमता कम हुई है। ठंड की वजह से पशु भरपूर मात्रा में पानी चारा खा नहीं पाते, जिसके कारण दूध उत्पादन सामान्य से कम हो रहा है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, पशुओं को धूप न लगने कि वजह से उनकी मांसपेशियों में जकड़न भी आ जाती है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शाम को जल्दी मकान के अंदर ही बांधे और घर के अंदर ही उनको चारा दें। धूप निकलने से पहले पशुओं को कंबल आदि ओढ़ाकर रखें। उनके अनुसार, ठंड की वजह से बेसहारा पशुओं पर भी संकट आ सकता है। बेसहारा पशुओं को ठंड लगने से निमोनिया की बीमारी हो सकती है, जिसका उपचार ना होने कि वजह से मौत उनकी मौत भी हो सकती है।
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हरियाणा राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 10 जनवरी को मौसम आमतौर पर खुश्क रहने तथा उत्तरी व उत्तर पश्चिमी शीत हवाएं चलने से रात्रि तापमान में फिर से गिरावट आने की संभावना है। इसके बाद 11 जनवरी को एक ओर पश्चिमी विक्षोभ आने से राज्य के मौसम में फिर से बदलाव संभावित है।
-डॉ. मदन खीचड़, विभागाध्यक्ष मौसम विभाग, एचएयू।