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Fatehabad News: तीन किलोमीटर दूर चलकर बस पकड़ रहे गांव मेहूवाला के ग्रामीण
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फतेहाबाद। भट्टू खंड के छह हजार से अधिक आबादी वाले गांव मेहूवाला के ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर चलकर बस पकड़ने के लिए मजबूर हैं। भीषण ठंड में ग्रामीण यात्रियों की और परेशानी बढ़ी हुई है। सबसे अधिक दिक्कत जिला मुख्यालय के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हो रही है।
रोडवेज प्रशासन ने 50 विद्यार्थियों के बस पास तो बना दिए हैं, लेकिन गांव में पर्याप्त बस भेज ही नहीं रहा है। गांव में सुबह-सुबह मात्र एक ही बस चलती है। अधिकांश बार बस में अधिक भीड़ होने के कारण विद्यार्थी बस में चढ़ नहीं पाते और उनको शिक्षण संस्थानों में पहुंचने में देरी हो जाती है। इस बस के निकलने के बाद तीन किलोमीटर दूर जाकर मुख्य मार्ग के मोड़ पर ही बस पकड़ने का विकल्प बचता है।
दरअसल, गांव मेहूवाला से 50 विद्यार्थी महाविद्यालयों, कोचिंग सेंटर व आईटीआई में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 100 से अधिक ग्रामीण अपने निजी कामों के लिए फतेहाबाद शहर आते हैं। विद्यार्थियों के बस पास बनाकर उनसे फीस तो वसूल ली गई है, लेकिन गांव में बसों का पर्याप्त संचालन नहीं हो पाया है। सुबह-शाम छात्र-छात्राओं को मुश्किलों से जूझना पड़ता है। गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन को बसों की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है, लेकिन फिर भी गांव में बस सेवा बहाल नहीं हुई है।
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सिर्फ सुबह 8.40 पर आती है एक बस
भट्टू से फतेहाबाद के लिए वाया मेहूवाला सुबह आठ बजकर 40 मिनट पर एक बस आती है, लेकिन यह वापस जाते समय गांव से होकर नहीं जाती। अधिकतर शिक्षण संस्थानों में सुबह नौ बजे कक्षाएं लगनी शुरू हो जाती हैं, लेकिन इस बस में इतनी भीड़ होती है कि विद्यार्थी बस में नहीं चढ़ पाते। जिस कारण विद्यार्थी कई बार तो 10 बजे या 11 बजे तक अपने शिक्षण संस्थानों तक पहुंच पाते हैं। शाम के समय तो उनको पैदल ही गांव में तीन किलोमीटर का रास्ता तय करके आना पड़ता है।
मैं गांव भोडियाखेड़ा के महिला महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। गांव से कॉलेज की दूरी तकरीबन 15 किलोमीटर है, लेकिन गांव से समय पर बस नहीं मिलती। ऐसे में तीन किलोमीटर दूर जाकर बस पकड़नी पड़ती है।
-ज्योति, छात्रा, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
मैं एमएम बीएड कॉलेज में बीएड द्वितीय वर्ष का कोर्स कर रही हूं। गांव में बसों का काफी टोटा है। एकमात्र बस में काफी भीड़ होती है। तीन किलोमीटर दूर तक पैदल जाकर ही बस पकड़नी पड़ती है। कई बार तो कॉलेज आने में देरी हो जाती है।
सुनीता, छात्रा बीएड द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
फतेहाबाद से एमएम कॉलेज में पढ़ने के लिए आता हूं। कॉलेज का समय नौ बजे का होता है और गांव में मात्र एक बस आठ बजकर 40 मिनट पर आती है, जिसमें काफी भीड़ होती है। यह बस वापस गांव में भी नहीं जाती। मजबूरी में कॉलेज से गांव वापस जाते समय तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
-मोनू, छात्र, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
सरकार एक तरफ परिवहन सेवाओं की बढ़ोतरी के दावे करती है, लेकिन गांव मेहूवाला में बसों का टोटा बना हुआ है। गांव में बसें नहीं आने से काफी परेशानी हो रही है। कई बार प्रशासन को शिकायत भी दी जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
-लक्की, छात्र, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
कई गांवों में बस समस्या की सूचना आई है। इसके लिए प्लानिंग की जा रही है कि गांवों में बसों के रूट बनाए जाएं। जल्द ही जिन गांवों में बसें नहीं जाती, वहां बस सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
-शेर सिंह, महाप्रबंधक, फतेहाबाद रोडवेज डिपो
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रोडवेज प्रशासन ने 50 विद्यार्थियों के बस पास तो बना दिए हैं, लेकिन गांव में पर्याप्त बस भेज ही नहीं रहा है। गांव में सुबह-सुबह मात्र एक ही बस चलती है। अधिकांश बार बस में अधिक भीड़ होने के कारण विद्यार्थी बस में चढ़ नहीं पाते और उनको शिक्षण संस्थानों में पहुंचने में देरी हो जाती है। इस बस के निकलने के बाद तीन किलोमीटर दूर जाकर मुख्य मार्ग के मोड़ पर ही बस पकड़ने का विकल्प बचता है।
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दरअसल, गांव मेहूवाला से 50 विद्यार्थी महाविद्यालयों, कोचिंग सेंटर व आईटीआई में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 100 से अधिक ग्रामीण अपने निजी कामों के लिए फतेहाबाद शहर आते हैं। विद्यार्थियों के बस पास बनाकर उनसे फीस तो वसूल ली गई है, लेकिन गांव में बसों का पर्याप्त संचालन नहीं हो पाया है। सुबह-शाम छात्र-छात्राओं को मुश्किलों से जूझना पड़ता है। गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन को बसों की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है, लेकिन फिर भी गांव में बस सेवा बहाल नहीं हुई है।
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सिर्फ सुबह 8.40 पर आती है एक बस
भट्टू से फतेहाबाद के लिए वाया मेहूवाला सुबह आठ बजकर 40 मिनट पर एक बस आती है, लेकिन यह वापस जाते समय गांव से होकर नहीं जाती। अधिकतर शिक्षण संस्थानों में सुबह नौ बजे कक्षाएं लगनी शुरू हो जाती हैं, लेकिन इस बस में इतनी भीड़ होती है कि विद्यार्थी बस में नहीं चढ़ पाते। जिस कारण विद्यार्थी कई बार तो 10 बजे या 11 बजे तक अपने शिक्षण संस्थानों तक पहुंच पाते हैं। शाम के समय तो उनको पैदल ही गांव में तीन किलोमीटर का रास्ता तय करके आना पड़ता है।
मैं गांव भोडियाखेड़ा के महिला महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। गांव से कॉलेज की दूरी तकरीबन 15 किलोमीटर है, लेकिन गांव से समय पर बस नहीं मिलती। ऐसे में तीन किलोमीटर दूर जाकर बस पकड़नी पड़ती है।
-ज्योति, छात्रा, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
मैं एमएम बीएड कॉलेज में बीएड द्वितीय वर्ष का कोर्स कर रही हूं। गांव में बसों का काफी टोटा है। एकमात्र बस में काफी भीड़ होती है। तीन किलोमीटर दूर तक पैदल जाकर ही बस पकड़नी पड़ती है। कई बार तो कॉलेज आने में देरी हो जाती है।
सुनीता, छात्रा बीएड द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
फतेहाबाद से एमएम कॉलेज में पढ़ने के लिए आता हूं। कॉलेज का समय नौ बजे का होता है और गांव में मात्र एक बस आठ बजकर 40 मिनट पर आती है, जिसमें काफी भीड़ होती है। यह बस वापस गांव में भी नहीं जाती। मजबूरी में कॉलेज से गांव वापस जाते समय तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
-मोनू, छात्र, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
सरकार एक तरफ परिवहन सेवाओं की बढ़ोतरी के दावे करती है, लेकिन गांव मेहूवाला में बसों का टोटा बना हुआ है। गांव में बसें नहीं आने से काफी परेशानी हो रही है। कई बार प्रशासन को शिकायत भी दी जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
-लक्की, छात्र, बीए द्वितीय वर्ष, मेहूवाला
कई गांवों में बस समस्या की सूचना आई है। इसके लिए प्लानिंग की जा रही है कि गांवों में बसों के रूट बनाए जाएं। जल्द ही जिन गांवों में बसें नहीं जाती, वहां बस सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
-शेर सिंह, महाप्रबंधक, फतेहाबाद रोडवेज डिपो