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Fatehabad News: कार्यक्रम में सरपंच नहीं पहुंचे तो भड़के पंचायत मंत्री, दी राइट टू रिकॉल की चेतावनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2023 11:03 PM IST
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गांव नाढोड़ी में मंच से सरपंच को चेतावनी देते पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। 23 जनवरी को गांव में बिढ़ाईखेड़ा में आयोजित किए जाने वाले मधुर मिलन समारोह को लेकर गांव नाढोड़ी में ग्रामीणों को न्योता देने पहुंचे पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली सरपंच की गैर हाजिरी पर भड़क गए। भड़के पंचायत मंत्री ने राइट टू रिकॉल के जरिये सरपंच का चुनाव दोबारा करवाने की चेतावनी भी दे डाली। मामला रविवार का है, लेकिन इसका वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। उधर, कई गांवों के सरपंचों ने डीसी जगदीश शर्मा को ज्ञापन सौंपकर पंचायत मंत्री से माफी मंगवाने की मांग की है। सरपंचों ने चेतावनी दी कि अगर पंचायत मंत्री ने माफी नहीं मांगी तो 23 जनवरी को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा।
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वायरल वीडियो में मंत्री कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि पंचायत मंत्री गांव में आ रहा है, इसके बावजूद सरपंच कार्यक्रम में नहीं पहुंचा है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि उसे मंत्री के समक्ष गांव की मांगों को रखना चाहिए। बिना पंचायत मंत्री के वो कैसे विकास करवा लेगा। इससे प्रतीत होता है कि सरपंच को गांव के विकास की चिंता नहीं है। गुस्से में आए पंचायत मंत्री ने कहा कि अगर 50 प्रतिशत ग्रामीण लिखकर दे देंगे तो राइट टू रिकॉल के जरिए सरपंच पद का दोबारा चुनाव करवाने की अनुमति मैं दूंगा।
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एक वोट से जीतकर सरपंच बने थे नरेंद्र कुमार
गौरतलब है कि गांव नाढोड़ी में सरपंच पद के लिए दो उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी। कड़े मुकाबले में नरेंद्र कुमार ने अपने प्रतिद्वंद्वी सुंदर कुमार को एक वोट से हराकर सरपंच पद हासिल किया था। सुंदर को 2200 वोट जबकि नरेंद्र कुमार को 2201 वोट मिले थे।
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सरपंच बोले, गांव को न्योता देने एक आदमी के घर क्यों आए
वहीं, इस संबंध में गांव नाढोडी के सरपंच नरेंद्र कुमार का कहना है कि वह राजस्थान गए हुए थे। शनिवार को उनके पास पंचायत मंत्री के भाई विनोद का फोन आया था। गांव के रामदेव मंदिर के आगे आने की बात हुई थी। अगर मंत्री मंदिर के बाहर आते तो मैं अपने प्रतिनिधि के तौर पर अपने चाचा को भेजता। मगर मंत्री एक ऐसे व्यक्ति के घर पर कार्यक्रम करके चले गए, जो हमारा राजनीतिक विरोधी है। मंत्री पूरे गांव को न्योता देने आए तो एक व्यक्ति के घर क्यों आए। उनको सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करना चाहिए था।
हमने चेतावनी दी है कि अगर पंचायत मंत्री ने सार्वजनिक रूप से सरपंच को लेकर इस तरह धमकी देने पर माफी नहीं मांगी तो 23 जनवरी के कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए विरोध करेंगे। डीसी को ज्ञापन भी सौंपा है। सरपंच दबाव बर्दाश्त नहीं करेंगे। एक साल तक राइट टू रिकॉल ला ही नहीं सकते।

-चंद्रमोहन पोटलिया, सरपंच एसोसिएशन, भट्टू खंड
कोई भी कानून बनता है, तो गजट पास होता है। राइट टू रिकॉल से संबंधित गजट पास होने की हमारे पास जानकारी नहीं आई है।
-समीर सिहाग, सचिव, बार एसोसिएशन
यह है राइट टू रिकॉल
हरियाणा विधानसभा ने 6 नवंबर 2020 को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2020 पारित किया है। यह विधेयक पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों को वापस बुलाने का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिनियम के अनुसार किसी भी गांव के कुल मतदाताओं में से 60 फीसदी मतदाता सरपंच को वापस बुलाने की मांग करते हैं, तो पंचायती राज विभाग के सीईओ इस पर कार्रवाई कर सकते हैं।
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