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डेंगू संदिग्ध की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, भूना
Updated Sun, 23 Oct 2016 12:15 AM IST
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अस्पताल संचालक से गहमागहमी करते बच्चे के पिता और परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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डेंगू संदिग्ध एक छह साल के बच्चे की शुक्रवार को मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि हालत ज्यादा बिगड़ने पर भी डॉक्टरों ने उसे बड़े अस्पताल रेफर नहीं किया।
भूना के चरणजीत चुघ के बेटे मयंक (6) को छह दिन पहले मामूली बुखार आया था। बच्चे का पिता उसे निजी अस्पताल ले गया। वहां मयंक का इलाज शुरू हुआ। लेकिन दिन ब दिन मयंक की हालत बिगड़ती गई। प्रदर्शन कर रहे मयंक के पिता चरणजीत और अन्य परिजनों हरबंस खन्ना, गुरदयाल चुघ, रिंकू सावरिया, धन्नूराम, सुरेश कुमार आदि लोगों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने बच्चे के इलाज में लापरवाही बरती है। चरणजीत ने बताया कि वह बच्चे को हिसार के एक बड़े अस्पताल में दिखाना चाहता था।
लेकिन भूना स्थित निजी अस्पताल के चिकित्सक ने हालत बिगड़ने पर भी बच्चे को रेफर नहीं किया। जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तो तीन दिन पहले अस्पताल के डॉक्टर ने उसे हिसार ले जाने को कह दिया गया। जब हिसार स्थित निजी अस्पताल में जांच हुई तो उन्होंने डेंगू बताया। उसके बाद से लगातार बच्चे की हालत बिगड़ती गई। बाद में चरणजीत अपने बेटे को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल ले गया। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए भूना के निजी अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए शनिवार को हंगामा किया। कार्यवाहक एसएचओ राजपाल सिंह ने बताया हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। मौके पर पहुंचकर परिजनों की शिकायत सुनी और मामले की जांच शुरू की।
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भूना स्थित सीएमसी अस्पताल के संचालक डा. पीडी शर्मा ने बताया कि इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई है। मयंक की हालत में सुधार के लिए भरसक प्रयास किए। हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। मयंक परिवार के साथ उनकी पूर्ण सहानुभूति है। वहीं सीएमओ डा. अशोक चौधरी ने बताया कि डेंगू की पुष्टि हिसार में हुई है। अभी वहां से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
भूना के चरणजीत चुघ के बेटे मयंक (6) को छह दिन पहले मामूली बुखार आया था। बच्चे का पिता उसे निजी अस्पताल ले गया। वहां मयंक का इलाज शुरू हुआ। लेकिन दिन ब दिन मयंक की हालत बिगड़ती गई। प्रदर्शन कर रहे मयंक के पिता चरणजीत और अन्य परिजनों हरबंस खन्ना, गुरदयाल चुघ, रिंकू सावरिया, धन्नूराम, सुरेश कुमार आदि लोगों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने बच्चे के इलाज में लापरवाही बरती है। चरणजीत ने बताया कि वह बच्चे को हिसार के एक बड़े अस्पताल में दिखाना चाहता था।
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लेकिन भूना स्थित निजी अस्पताल के चिकित्सक ने हालत बिगड़ने पर भी बच्चे को रेफर नहीं किया। जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तो तीन दिन पहले अस्पताल के डॉक्टर ने उसे हिसार ले जाने को कह दिया गया। जब हिसार स्थित निजी अस्पताल में जांच हुई तो उन्होंने डेंगू बताया। उसके बाद से लगातार बच्चे की हालत बिगड़ती गई। बाद में चरणजीत अपने बेटे को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल ले गया। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए भूना के निजी अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए शनिवार को हंगामा किया। कार्यवाहक एसएचओ राजपाल सिंह ने बताया हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। मौके पर पहुंचकर परिजनों की शिकायत सुनी और मामले की जांच शुरू की।
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भूना स्थित सीएमसी अस्पताल के संचालक डा. पीडी शर्मा ने बताया कि इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई है। मयंक की हालत में सुधार के लिए भरसक प्रयास किए। हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। मयंक परिवार के साथ उनकी पूर्ण सहानुभूति है। वहीं सीएमओ डा. अशोक चौधरी ने बताया कि डेंगू की पुष्टि हिसार में हुई है। अभी वहां से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।