{"_id":"669ffbbf8b62824b120ae4e4","slug":"farmers-keeping-soft-wood-in-their-fields-need-to-pay-more-attention-fatehabad-news-c-127-1-shsr1016-119851-2024-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: खेत में नरमे की लकड़ी रखने वाले किसानों को अधिक ध्यान देने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: खेत में नरमे की लकड़ी रखने वाले किसानों को अधिक ध्यान देने की जरूरत
विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहाबाद। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय की ओर से क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद से आई टीम सहायक निदेशक सुनील चंद्रा, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी गौरव चौहान व सूरज बरनवाल, तकनीकी सहायक आस्था हुड्डा की टीम द्वारा गांव ढिंगसरा में गुलाबी सुंडी का सर्वेक्षण किया गया।
टीम ने पाया कि गुलाबी सुंडी का प्रकोप अभी कपास के खेतों में नहीं है। टीम ने देखा कि कई जगह किसानों ने खेतों में पुरानी नरमे की लकड़ियों का भंडारण किया हुआ है। इस पर कपास की खेती करने वाले किसानों को यह सलाह भी दी गई कि जिन किसानों ने अपने खेत में नरमे की लकड़ियों का भंडारण कर रखा है, उन किसानों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इन किसानों के खेतों में गुलाबी सुंडी का प्रभाव अधिक होता है। इसके अलावा उन्हें सुझाव दिया कि नरमे की लकड़ियों को खेत में इकट्ठा न करें और अगर करते हैं तो उन्हें प्लास्टिक की शीट से ढंक कर रखें।
विज्ञापन
सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप मॉडरेट स्तर पर देखा गया और किसानों को इसके नियंत्रण के लिए सलाह भी दी गई। किसानों को यह भी सलाह दी कि लगातार अपनी फसल की निगरानी करें तथा फसल के 60 दिन के हो जाने पर एनएसकेई 5 प्रतिशत का छिड़काव करें। फसल की बिजाई के 40-50 दिनों के बाद 6-8 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ फूल बनने की अवस्था से ही लगाए तथा रोजाना खेत में जाकर ट्रैप को देखें और ऐसी स्थिति आने पर अपने नजदीकी कृषि विभाग के अधिकारियों से तुरंत संपर्क करे। इसके अलावा टीम के सदस्यों द्वारा मित्र कीटों जैसे कि ट्राईकोग्रामा, लेडी बर्ड बीटल एवं क्राइसोपर्ला आदि के संरक्षण के बारे में भी बताया गया।
विज्ञापन