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Fatehabad News: संकट की घड़ी में पंजाब से आए किसानों ने निभाई बेमिसाल दोस्ती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Aug 2023 11:42 PM IST
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Farmers from Punjab played unmatched friendship in times of crisis
जाखल के गांव चांदपुरा में जमीन को समतल करते ट्रैक्टर व जेसीबी मशीन संचालक।
जाखल (फतेहाबाद)। जाखल के गांव चांदपुरा में घग्गर नदी का तटबंध टूटने से आई बाढ़ के बाद अब यहां पर खेतों में मिट्टी के बड़े-बड़े टीले बन गए हैं। इसी को देखते हुए गांव के लोगों ने पंजाब क्षेत्र के संगरूर के किसानों से मदद की गुहार लगाई। इस पर पंजाब के किसान दरियादिली दिखाते हुए ट्रैक्टर-ट्राॅलियों व जेसीबी के साथ जाखल पहुंच गए। संकट की घड़ी में पंजाब के किसानों ने खेत की जमीन को समतल करने में जुट गए हैं। पंजाब के किसानों ने बेमिसाल दोस्ती का फर्ज निभाया।
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चांदपुरा साइफन के पास बांध टूटने से पानी के कारण निकली हजारों टन रेत से आसपास के कई किसानों के खेतों में बड़े-बड़े टीले बन गए थे। जमीन को समतल करना आसान नहीं था। किसानी खतरे में पड़ी दिखी तो यहां के किसानों ने सीमावर्ती पंजाब क्षेत्र के मूनक, संगरूर, सदूलगढ़, बठिंडा और राजस्थान के हनुमानगढ़ के किसानों से मदद की गुहार लगाई। चांदपुरा के किसानों की एक आवाज पर पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्रालियों व जेसीबी के साथ चांदपुरा में पहुंच गए। साथ ही 500 लीटर डीजल भी साथ लाए। इन टीलों को समतल करने में यहां के किसानों की मदद की। पिछले तीन-चार दिनों से जमीन को समतल करने का कार्य जारी है।
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तन मन धन से कर रहे हैं किसानों की मदद

पंजाब क्षेत्र से न केवल ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर लोग आ रहे हैं, बल्कि यहां यहां पर मेहनत मजदूरी करने के लिए या ज्यादा से ज्यादा धन का सहयोग करने के लिए भी लोग आ रहे हैं। पंजाब व हरियाणा के किसानों का यह भाईचारा पूरे क्षेत्र में मिसाल बना हुआ है।
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वर्ष 1993 में आया था नौ जगह पर कटाव

चांदपुरा क्षेत्र के किसानों ने बताया कि जब 1993 में जब घग्गर नदी में जलप्रहाव अधिक हो गया था तो नौ जगह पर नदी के तटबंध टूट गए थे। उस समय खेतों में इतनी मिट्टी एकत्र नहीं हुई थी जो इस बार हुई है। उस समय भी खेतों को संवारने में किसानों को चार से पांच साल लग गए थे। इस बार लगता है कि खेतों को संवारने में छह से सात साल लग जाएंगे। उन्होंने बताया अब एक ही जगह पर कटाव आया और पानी का प्रेशर बहुत ज्यादा था। पानी कम हुआ तो देखा कि खेतों में घग्गर की निचली सतह की रेत ही रेत नजर आ रही थी और बांध के आसपास 60 फुट से ज्यादा और 200 फुट से ज्यादा चौड़ा एक बड़े तालाब रूपी गड्ढ़ा भी बन चुका था।


11 जेसीबी कर रही हैं काम
चांदपुरा के किसानों के एक आह्वान पर संगरूर तक से पंजाब के किसान सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर लेकर यहां पहुंच गए। 11 जेसीबी यहां चल रही हैं और लोग डीजल के टैंकर लेकर भी पहुंच रहे हैं। दो-तीन दिनों में ही काफी हद तक खेतों को सुधार दिया है और जहां गड्ढे बन गए हैं वहां पर मिट्टी डाली जा रही है।
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