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Fatehabad News: सरकार के फैसले से किसान असंतुष्ट, तिथि बढ़ाने की मांग
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फतेहाबाद की पुरानी अनाज मंडी में धान की प्राइवेट करते व्यापारी।
फतेहाबाद। सरकार ने 15 नवंबर से जिले में परमल धान की सरकारी खरीद बंद कर दी थी, लेकिन किसान संगठनों की मांग के बाद अब 25 नवंबर तक धान की सरकारी खरीद के आदेश सरकार ने जारी कर दिए हंै। हालांकि किसान संगठन सरकार के इस फैसले से असंतुष्ट हैं, उनका कहना है कि सरकार को 30 नवंबर तक खरीद की अवधि करनी चाहिए थी।फतेहाबाद में आई बाढ़ के कारण जिले में करीब एक लाख एकड़ धान की फसल खराब हो गई थी। इस रकबे में दोबारा से धान की रोपाई की गई थी और अभी इसकी कटाई चल रही है। सरकार के आदेश के पर फतेहाबाद में मंगलवार को दोपहर बाद 462 एमटी धान की सरकारी खरीद हुई। फतेहाबाद में इस साल 337275 एकड़ पर धान की रोपाई हुई थी। जुलाई माह में आई बाढ़ के कारण खंड टोहाना, जाखल, रतिया, भूना व फतेहाबाद का करीब एक लाख एकड़ धान का रकबा बाढ़ की चपेट में आ गया था। इसके बाद यहां पर दोबारा से धान की रोपाई की गई थी। किसानों ने हाईब्रीड बीज से धान की रोपाई की थी और इसे पकने में दो माह का समय लगना था। सरकार ने धान की खरीद के लिए 15 नवंबर का समय रखा था, लेकिन बाढ़ ग्रस्त इलाकों में धान की फसल अभी भी खड़ी है और उसकी कटाई हो रही है।
ऐसे में किसान संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि धान की खरीद का समय बढ़ाया जाए। किसान संगठनों की मांग के बाद धान की खरीद का समय 21 नवंबर से 25 नवंबर तक कर दिया है। मंगलवार को हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन ने 462 एमटी धान की खरीद की। फतेहाबाद में सात खरीद केंद्रों पर होने वाली धान की खरीद के लिए वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन केंद्रों पर केवल फतेहाबाद जिले के किसानों की धान की खरीदी जाएगी, बाहरी जिलों के किसानों की धान को नहीं खरीदा जाएगा।
फिलहाल औने-पौने दामों में बिक रही है किसानों की धान
फतेहाबाद में बाढ़ ग्रस्त इलाके से जो धान अनाज मंडी में आ रहा है, उसका किसानों को सही दाम नहीं मिल रहा। सरकारी रेट पर परमल धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2203 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन किसानों की धान निजी हाथों में 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी है। बाढ़ से प्रभावित किसानों को मजबूरन यह धान बेचना पड़ रहा था। किसानों का कहना था कि उनको धान कम दामों में बेचनी पड़ रही है, क्योंकि अब गेहूं बिजाई की भी तैयारी करनी है। अब एक बार फिर सरकार ने सरकारी खरीद आरंभ की है तो किसानों को फायदा होगा।
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कोट
पहले किसानों को लूटा, अब शुरू की दोबारा सरकारी खरीद
बाढ़ ग्रस्त इलाकों में धान की दोबारा रोपाई के कारण पहले ही किसानों को भारी चपत लगी थी। सरकार ने 15 नवंबर को धान की खरीद बंद कर दी और इसके बाद किसानों को लूटने के औने-पौने दामों पर उनकी धान खरीदी गई। अब जब अधिकांश धान बिक चुकी है तो सरकार ने सरकारी खरीद का नया शेड्यूल जारी कर दिया, जोकि नाकाफी है। सरकार को 30 नवंबर तक धान की खरीद करनी चाहिए थी।
-मनदीप नथवान, संयोजक पगड़ी संभाल, जट्टा किसान संघर्ष समिति।
कोट
सरकार की ओर से आदेश आ गए हैं। जिला में सात खरीद केंद्र फतेहाबाद, रतिया, लांबा, अयाल्की, जाखल, टोहाना व धारसूल केंद्रों पर धान ए ग्रेड की खरीद आगामी 25 नवंबर तक की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन के अनुरोध पर सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण धान की खरीद अनुमति प्रदान की गई है।
-विनीत जैन, डीएफएससी, फतेहाबाद।
कोट
जिला में खरीद केंद्रों पर मंगलवार से ही तुरंत प्रभाव से किसानों की धान ए ग्रेड की फसल खरीदना सुनिश्चित की गई है। सभी खरीद केंद्रों में वीडियोग्राफी करवाते हुए धान की खरीद की जाएगी। किसी भी केंद्र पर दूसरे जिलों से आने वाली धान की खरीद नहीं की जाएगी।
-अजय तोमर, उपायुक्त, फतेहाबाद।
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ऐसे में किसान संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि धान की खरीद का समय बढ़ाया जाए। किसान संगठनों की मांग के बाद धान की खरीद का समय 21 नवंबर से 25 नवंबर तक कर दिया है। मंगलवार को हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन ने 462 एमटी धान की खरीद की। फतेहाबाद में सात खरीद केंद्रों पर होने वाली धान की खरीद के लिए वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन केंद्रों पर केवल फतेहाबाद जिले के किसानों की धान की खरीदी जाएगी, बाहरी जिलों के किसानों की धान को नहीं खरीदा जाएगा।
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फिलहाल औने-पौने दामों में बिक रही है किसानों की धान
फतेहाबाद में बाढ़ ग्रस्त इलाके से जो धान अनाज मंडी में आ रहा है, उसका किसानों को सही दाम नहीं मिल रहा। सरकारी रेट पर परमल धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2203 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन किसानों की धान निजी हाथों में 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी है। बाढ़ से प्रभावित किसानों को मजबूरन यह धान बेचना पड़ रहा था। किसानों का कहना था कि उनको धान कम दामों में बेचनी पड़ रही है, क्योंकि अब गेहूं बिजाई की भी तैयारी करनी है। अब एक बार फिर सरकार ने सरकारी खरीद आरंभ की है तो किसानों को फायदा होगा।
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पहले किसानों को लूटा, अब शुरू की दोबारा सरकारी खरीद
बाढ़ ग्रस्त इलाकों में धान की दोबारा रोपाई के कारण पहले ही किसानों को भारी चपत लगी थी। सरकार ने 15 नवंबर को धान की खरीद बंद कर दी और इसके बाद किसानों को लूटने के औने-पौने दामों पर उनकी धान खरीदी गई। अब जब अधिकांश धान बिक चुकी है तो सरकार ने सरकारी खरीद का नया शेड्यूल जारी कर दिया, जोकि नाकाफी है। सरकार को 30 नवंबर तक धान की खरीद करनी चाहिए थी।
-मनदीप नथवान, संयोजक पगड़ी संभाल, जट्टा किसान संघर्ष समिति।
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सरकार की ओर से आदेश आ गए हैं। जिला में सात खरीद केंद्र फतेहाबाद, रतिया, लांबा, अयाल्की, जाखल, टोहाना व धारसूल केंद्रों पर धान ए ग्रेड की खरीद आगामी 25 नवंबर तक की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन के अनुरोध पर सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण धान की खरीद अनुमति प्रदान की गई है।
-विनीत जैन, डीएफएससी, फतेहाबाद।
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जिला में खरीद केंद्रों पर मंगलवार से ही तुरंत प्रभाव से किसानों की धान ए ग्रेड की फसल खरीदना सुनिश्चित की गई है। सभी खरीद केंद्रों में वीडियोग्राफी करवाते हुए धान की खरीद की जाएगी। किसी भी केंद्र पर दूसरे जिलों से आने वाली धान की खरीद नहीं की जाएगी।
-अजय तोमर, उपायुक्त, फतेहाबाद।