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Fatehabad News: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में किसान नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, चार साल में मात्र 100 किसानों ने करवाया पंजीकरण
Tue, 12 Mar 2024 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:41 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। हरियाणा सरकार द्वारा 2020 में लागू की गई मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में किसानों की दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रही है। 4 सालों में जिले से मात्र 100 किसानों ने ही अपना पंजीकरण करवाया है।हालांकि इस बीमा योजना में सरकार ने 23 फसलों को बढ़ाकर 46 फसलों को शामिल किया हुआ है।
प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सब्जियों व मसालों के लिए सालाना प्रति एकड़ 750 रुपये व बागों के लिए 1 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना प्रीमियम देकर योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना के तहत सब्जियों व मसालों के लिए न्यूनतम 15 हजार व अधिकतम 30 हजार तथा बागों में हुए नुकसान को लेकर न्यूनतम 20 हजार व अधिकतम 40 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। यह योजना सीजनल सब्जियों व फलों पर लागू होती है।
सरकार द्वारा ओलावृष्टि, पाला, बाढ़, बादल फटने, नहर या ड्रेन के टूटने, जलभराव, आंधी व तूफान या आग से खराब हुई सब्जियों व बागों पर बीमा दिया जाता है। इस योजना में पहले 23 सब्जियों व फलों के बागों को रखा गया था, पिछले साल सरकार ने सब्जियों व फलों की संख्या बढ़ाकर 46 कर दी। सरकार की ओर से सब्जियों में अरबी, भिंडी, करेला, लौकी, बैंगन, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, गोभी, मिर्च, खीरा, ककड़ी, खरबूजा, प्याज, मटर, आलू, कद्दू, मूली, तोरड़, टिंडा, तुननी, टमाटर व तरबूज तथा फलों में आंवला, बेर, चीकू, खजूर, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, अंगूर, अमरूद, जामून, किन्नू, मालटा, नींबू, लिची, संतरा, आम, आड़ू, नाशपति, आलू बुखारा, स्ट्रो बेरी व मसालों में हल्दी व लहसून पर बीमा योजना लागू की हुई है।
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योजना में देय बीमा राशि व प्रीमियम
प्रतिशत सब्जियां व मसाले (रुपये प्रति एकड़)
फल (रुपये प्रति एकड़)
0 से 25 प्रतिशत शून्य शून्य
26 से 51 प्रतिशत
15,000
20,000
51 से 75 प्रतिशत 22,500
30,000
75 प्रतिशत से अधिक 30,000
40,000
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना बागवानी करने वाले किसानों के लिए अच्छी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को अपनी फसलों की बीमा करवाना चाहिए। इसके लिए पहले मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर अपनी फसल की जानकारी देनी होगी। इस योजना का लाभ सभी किसानों को लेना चाहिए। - श्रवण कुमार, जिला बागवानी अधिकारी।
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फतेहाबाद। हरियाणा सरकार द्वारा 2020 में लागू की गई मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में किसानों की दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रही है। 4 सालों में जिले से मात्र 100 किसानों ने ही अपना पंजीकरण करवाया है।हालांकि इस बीमा योजना में सरकार ने 23 फसलों को बढ़ाकर 46 फसलों को शामिल किया हुआ है।
प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सब्जियों व मसालों के लिए सालाना प्रति एकड़ 750 रुपये व बागों के लिए 1 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना प्रीमियम देकर योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना के तहत सब्जियों व मसालों के लिए न्यूनतम 15 हजार व अधिकतम 30 हजार तथा बागों में हुए नुकसान को लेकर न्यूनतम 20 हजार व अधिकतम 40 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। यह योजना सीजनल सब्जियों व फलों पर लागू होती है।
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सरकार द्वारा ओलावृष्टि, पाला, बाढ़, बादल फटने, नहर या ड्रेन के टूटने, जलभराव, आंधी व तूफान या आग से खराब हुई सब्जियों व बागों पर बीमा दिया जाता है। इस योजना में पहले 23 सब्जियों व फलों के बागों को रखा गया था, पिछले साल सरकार ने सब्जियों व फलों की संख्या बढ़ाकर 46 कर दी। सरकार की ओर से सब्जियों में अरबी, भिंडी, करेला, लौकी, बैंगन, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, गोभी, मिर्च, खीरा, ककड़ी, खरबूजा, प्याज, मटर, आलू, कद्दू, मूली, तोरड़, टिंडा, तुननी, टमाटर व तरबूज तथा फलों में आंवला, बेर, चीकू, खजूर, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, अंगूर, अमरूद, जामून, किन्नू, मालटा, नींबू, लिची, संतरा, आम, आड़ू, नाशपति, आलू बुखारा, स्ट्रो बेरी व मसालों में हल्दी व लहसून पर बीमा योजना लागू की हुई है।
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योजना में देय बीमा राशि व प्रीमियम
प्रतिशत सब्जियां व मसाले (रुपये प्रति एकड़)
फल (रुपये प्रति एकड़)
0 से 25 प्रतिशत शून्य शून्य
26 से 51 प्रतिशत
15,000
20,000
51 से 75 प्रतिशत 22,500
30,000
75 प्रतिशत से अधिक 30,000
40,000
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना बागवानी करने वाले किसानों के लिए अच्छी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को अपनी फसलों की बीमा करवाना चाहिए। इसके लिए पहले मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर अपनी फसल की जानकारी देनी होगी। इस योजना का लाभ सभी किसानों को लेना चाहिए। - श्रवण कुमार, जिला बागवानी अधिकारी।