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Fatehabad News: उपायुक्त कार्यालय के बाहर किसान संगठनों ने प्रदर्शन कर नई खेती नीति के ड्राफ्ट की प्रतियां फूंकीं
Mon, 23 Dec 2024 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 23 Dec 2024 11:27 PM IST
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फतेहाबाद के लघु सचिवालय के भीतरी गेट के बाहर प्रदर्शन करते किसान संगठन। संवाद
फतेहाबाद। जिले के किसान संगठनों ने सोमवार को लघु सचिवालय में पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने केंद्र व हरियाणा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की ओर से केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को भेजी गई नई खेती नीति के ड्राफ्ट की प्रतियां जलाई।
प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान विष्णुदत्त ने बताया कि किसानों की मांगों को लेकर खनौरी बॉर्डर पर पिछले 28 दिनों से अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की मांगों को मानना चाहिए। सरकार को किसान संगठनों के साथ बातचीत करके डल्लेवाल की जान बचानी चाहिए।
इसके अलावा नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी किसान लुक्सर जेल से रिहा किया जाए। राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस ली जाए व सभी किसान संगठनों के साथ तत्काल चर्चा कर 9 दिसंबर, 2021 के पत्र में सहमति के अनुसार सभी लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए। किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान संगठनों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार किसान संगठनों से बातचीत करने के बजाय पंजाब के शंभू, खनौरी बॉर्डर और उत्तर प्रदेश के नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आंदोलन कर रहे किसानों पर आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां, पानी की बौछारों की जा रही है। सरकार शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को जेल में डालकर क्रूरता से आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।
इस दौरान किसान सभा के जिला प्रधान विष्णुदत्त, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला प्रधान निर्भय सिंह रतिया, भारतीय किसान यूनियन घासीराम नैन से लाभ सिंह, किसान महासभा के प्रधान सुखविंद्र सिंह व किसान नेता तजिंद्र सिंह, और राजेंद्र आदि मौजूद रहे।
ये हैं किसानों की मांगें
- जेलों में बंद किसानों को तुरंत रिहा करने व उनके पर दर्ज केस वापस लिए जाए।
- राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति, डिजिटल कृषि मिशन और राष्ट्रीय सहयोग नीति को वापस लेने और संघर्ष कर रहे सभी किसान संगठनों के साथ तुरंत चर्चा की जाए।
- एमएसपी, ऋण माफी, बिजली के निजीकरण और एलएआरआर अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन पर किसानों की लंबे समय से लंबित वास्तविक मांगों को स्वीकार किया जाए।
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प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान विष्णुदत्त ने बताया कि किसानों की मांगों को लेकर खनौरी बॉर्डर पर पिछले 28 दिनों से अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की मांगों को मानना चाहिए। सरकार को किसान संगठनों के साथ बातचीत करके डल्लेवाल की जान बचानी चाहिए।
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इसके अलावा नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी किसान लुक्सर जेल से रिहा किया जाए। राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस ली जाए व सभी किसान संगठनों के साथ तत्काल चर्चा कर 9 दिसंबर, 2021 के पत्र में सहमति के अनुसार सभी लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए। किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान संगठनों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार किसान संगठनों से बातचीत करने के बजाय पंजाब के शंभू, खनौरी बॉर्डर और उत्तर प्रदेश के नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आंदोलन कर रहे किसानों पर आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां, पानी की बौछारों की जा रही है। सरकार शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को जेल में डालकर क्रूरता से आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।
इस दौरान किसान सभा के जिला प्रधान विष्णुदत्त, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला प्रधान निर्भय सिंह रतिया, भारतीय किसान यूनियन घासीराम नैन से लाभ सिंह, किसान महासभा के प्रधान सुखविंद्र सिंह व किसान नेता तजिंद्र सिंह, और राजेंद्र आदि मौजूद रहे।
ये हैं किसानों की मांगें
- जेलों में बंद किसानों को तुरंत रिहा करने व उनके पर दर्ज केस वापस लिए जाए।
- राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति, डिजिटल कृषि मिशन और राष्ट्रीय सहयोग नीति को वापस लेने और संघर्ष कर रहे सभी किसान संगठनों के साथ तुरंत चर्चा की जाए।
- एमएसपी, ऋण माफी, बिजली के निजीकरण और एलएआरआर अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन पर किसानों की लंबे समय से लंबित वास्तविक मांगों को स्वीकार किया जाए।