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Fatehabad News: नए साल में औद्योगिक क्षेत्र के विकास की उम्मीदें
Sun, 28 Dec 2025 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:34 PM IST
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गांव बरसीन के पास पदमा योजना के तहत बन रहा औद्यौगिक क्षेत्र। फाइल फोटो
- फोटो : कटरा जैन मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। स्रोत: मंदिर कमेटी
फतेहाबाद। गुलाबी शहर के रूप में जाने जाना वाला जिला आज भी औद्योगिक क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। साल 2025 विदा होने में अब 3 दिन ही बचे हैं लेकिन जिला मुख्यालय के हिसार-सिरसा रोड पर बसे औद्योगिक क्षेत्र की सूरत नहीं बदल पाई। यहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
ठप हाे चुकी कॉटन मिल और पलायन करते उद्योगों के बीच अब शहरवासियों और उद्यमियों की नजरें साल 2026 पर टिकी हैं। सरकार ने हाल ही में जिले में औद्योगिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सुधारने का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा है। इस कदम से बंद पड़े या बंद होने की कगार में शामिल औद्योगिक विकास में एक नई जान फूंकने की उम्मीद जगी है।
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सिर्फ नाम का बना औद्योगिक क्षेत्र, सड़कें कॉलोनी के हिसाब से भी छोटी
जिला मुख्यालय के हिसार-सिरसा रोड पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र सिर्फ नाम का है। यहां जो सड़के हैं वो एक कॉलोनी के हिसाब की हैं। औद्योगिक क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़क पहले 20 फिट की है, बाद में वह सिर्फ 10 फिट की ही रह जाती हैं। इसी 10 फिट की जगह में बिजली निगम ने बिजली की सप्लाई के लिए खंभे व ट्रांसफार्मर लगा रखे है। स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनी हुई हैं और जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
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सफेद सोने की कमी के कारण कॉटन मिलों का हो रहा अंत
किसी समय फतेहाबाद और आसपास का क्षेत्र कपास (सफेद सोना) की पैदावार के लिए प्रसिद्ध था। यहां दर्जनों कॉटन मिलें और स्पिनिंग यूनिट्स चलती थीं, जो हजारों लोगों को रोजगार देती थीं। पिछले कुछ वर्षों में गुलाबी सुंडी और कपास की गिरती पैदावार ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी। फतेहाबाद की पहचान बनी कई बड़ी कॉटन मिलें आज जर्जर हो चुकी हैं। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण उद्यमियों ने मिलों पर ताले लटका दिए हैं।
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जूतों का कारोबार : दिल्ली की ओर पलायन
जिला मुख्यालय के औद्योगिक क्षेत्र में कभी जूते व चप्पल के निर्माण का काम बड़े स्तर पर होता था। यहां के जूतों की मांग पड़ोसी राज्यों तक थी। प्रशासन की बेरुखी और औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट व सुविधाओं की कमी के कारण यह फलत-फूलता उद्योग धीरे-धीरे दिल्ली और बहादुरगढ़ की ओर शिफ्ट हो गया। उद्यमियों का कहना है कि अगर समय रहते यहां विकास होता तो आज फतेहाबाद फुटवियर हब बन सकता था।
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पाइप फैक्ट्रियों का गढ़
औद्योगिक क्षेत्र में तमाम सुविधाएं नहीं होने के बाद भी जिला मुख्यालय व उसके आसपास के क्षेत्रों में पाइप निर्माण के उद्योग में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वर्तमान समय में शहर के सिरसा राेड पर पाइप के निर्माण के काफी उद्योग है। स्थानीय उद्यमियों ने अपने स्तर पर इस उद्योग को खड़ा किया है। यदि सरकार इस सेक्टर को विशेष रियायतें और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं दे, तो पाइप के निर्माण का काम पूरे जिले में चल सकता है।
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निजी कंपनी को कमान
सरकार ने फतेहाबाद जिले में औद्योगिक विकास और रोजगार को गति देने के लिए प्रोग्राम टू एक्सलरेट डेवलपमेंट फॉर एमएसएमई एडवांसमेंट (पदमा) योजना के तहत प्रभावी कदम उठाए हैं। एक खंड एक उत्पाद की रणनीति पर आधारित इस पहल का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है। जिले का पहला निजी औद्योगिक क्षेत्र गांव बरसीन की 25 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसे प्रोविजनल अप्रूवल मिल चुका है और कार्य प्रगति पर है। क्लस्टर स्थापित करने के लिए सरकार कुल लागत का 75 फीसदी अनुदान दे रही है, जिससे उद्यमियों पर वित्तीय बोझ कम होगा। यहां सड़क, सीवरेज, बिजली और पेयजल जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद भूखंडों को उद्योगों के लिए बेचा जाएगा। पदमा योजना के तहत फतेहाबाद खंड को ग्रुप सी में रखा गया है, जबकि भट्टू, भूना, टोहाना, रतिया और जाखल को ग्रुप डी में शामिल किया गया है।
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इंडस्ट्री पर फिक्स चार्जेस को 200 रुपये किलोवाट से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति किलोवाट कर दिया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। सरकार को टोहाना में स्वच्छता और जल निकासी को बेहतर करने के लिए कार्य करना चाहिए। बारिश के दिनों में जल निकासी न होने से रतिया रोड और जमालपुर रोड के दुकानदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
विनोद सिंगला, निदेशक, अर्चित न्यूवुड, टोहाना।
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सरकार को वर्ष 2026 में टोहाना को सबसे बड़ी सौगात के रूप में जिला बनाने की घोषणा करनी चाहिए। अगर टोहाना जिला बनता है तो उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। रेललाइन से टोहाना जुड़ा हुआ है जिसका क्षेत्र को फायदा मिलेगा।
दीप सिंह पुन्नी, निदेशक, विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्क्स, टोहाना।
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ठप हाे चुकी कॉटन मिल और पलायन करते उद्योगों के बीच अब शहरवासियों और उद्यमियों की नजरें साल 2026 पर टिकी हैं। सरकार ने हाल ही में जिले में औद्योगिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सुधारने का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा है। इस कदम से बंद पड़े या बंद होने की कगार में शामिल औद्योगिक विकास में एक नई जान फूंकने की उम्मीद जगी है।
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सिर्फ नाम का बना औद्योगिक क्षेत्र, सड़कें कॉलोनी के हिसाब से भी छोटी
जिला मुख्यालय के हिसार-सिरसा रोड पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र सिर्फ नाम का है। यहां जो सड़के हैं वो एक कॉलोनी के हिसाब की हैं। औद्योगिक क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़क पहले 20 फिट की है, बाद में वह सिर्फ 10 फिट की ही रह जाती हैं। इसी 10 फिट की जगह में बिजली निगम ने बिजली की सप्लाई के लिए खंभे व ट्रांसफार्मर लगा रखे है। स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनी हुई हैं और जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
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सफेद सोने की कमी के कारण कॉटन मिलों का हो रहा अंत
किसी समय फतेहाबाद और आसपास का क्षेत्र कपास (सफेद सोना) की पैदावार के लिए प्रसिद्ध था। यहां दर्जनों कॉटन मिलें और स्पिनिंग यूनिट्स चलती थीं, जो हजारों लोगों को रोजगार देती थीं। पिछले कुछ वर्षों में गुलाबी सुंडी और कपास की गिरती पैदावार ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी। फतेहाबाद की पहचान बनी कई बड़ी कॉटन मिलें आज जर्जर हो चुकी हैं। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण उद्यमियों ने मिलों पर ताले लटका दिए हैं।
जूतों का कारोबार : दिल्ली की ओर पलायन
जिला मुख्यालय के औद्योगिक क्षेत्र में कभी जूते व चप्पल के निर्माण का काम बड़े स्तर पर होता था। यहां के जूतों की मांग पड़ोसी राज्यों तक थी। प्रशासन की बेरुखी और औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट व सुविधाओं की कमी के कारण यह फलत-फूलता उद्योग धीरे-धीरे दिल्ली और बहादुरगढ़ की ओर शिफ्ट हो गया। उद्यमियों का कहना है कि अगर समय रहते यहां विकास होता तो आज फतेहाबाद फुटवियर हब बन सकता था।
पाइप फैक्ट्रियों का गढ़
औद्योगिक क्षेत्र में तमाम सुविधाएं नहीं होने के बाद भी जिला मुख्यालय व उसके आसपास के क्षेत्रों में पाइप निर्माण के उद्योग में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वर्तमान समय में शहर के सिरसा राेड पर पाइप के निर्माण के काफी उद्योग है। स्थानीय उद्यमियों ने अपने स्तर पर इस उद्योग को खड़ा किया है। यदि सरकार इस सेक्टर को विशेष रियायतें और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं दे, तो पाइप के निर्माण का काम पूरे जिले में चल सकता है।
निजी कंपनी को कमान
सरकार ने फतेहाबाद जिले में औद्योगिक विकास और रोजगार को गति देने के लिए प्रोग्राम टू एक्सलरेट डेवलपमेंट फॉर एमएसएमई एडवांसमेंट (पदमा) योजना के तहत प्रभावी कदम उठाए हैं। एक खंड एक उत्पाद की रणनीति पर आधारित इस पहल का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है। जिले का पहला निजी औद्योगिक क्षेत्र गांव बरसीन की 25 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसे प्रोविजनल अप्रूवल मिल चुका है और कार्य प्रगति पर है। क्लस्टर स्थापित करने के लिए सरकार कुल लागत का 75 फीसदी अनुदान दे रही है, जिससे उद्यमियों पर वित्तीय बोझ कम होगा। यहां सड़क, सीवरेज, बिजली और पेयजल जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद भूखंडों को उद्योगों के लिए बेचा जाएगा। पदमा योजना के तहत फतेहाबाद खंड को ग्रुप सी में रखा गया है, जबकि भट्टू, भूना, टोहाना, रतिया और जाखल को ग्रुप डी में शामिल किया गया है।
इंडस्ट्री पर फिक्स चार्जेस को 200 रुपये किलोवाट से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति किलोवाट कर दिया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। सरकार को टोहाना में स्वच्छता और जल निकासी को बेहतर करने के लिए कार्य करना चाहिए। बारिश के दिनों में जल निकासी न होने से रतिया रोड और जमालपुर रोड के दुकानदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
विनोद सिंगला, निदेशक, अर्चित न्यूवुड, टोहाना।
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सरकार को वर्ष 2026 में टोहाना को सबसे बड़ी सौगात के रूप में जिला बनाने की घोषणा करनी चाहिए। अगर टोहाना जिला बनता है तो उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। रेललाइन से टोहाना जुड़ा हुआ है जिसका क्षेत्र को फायदा मिलेगा।
दीप सिंह पुन्नी, निदेशक, विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्क्स, टोहाना।