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Fatehabad News: मिसाल... बहन ने दिया अनमोल तोहफा, भाई की जान के लिए किडनी कुर्बान
Fri, 08 May 2026 10:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 08 May 2026 10:31 PM IST
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राजू
ओढ़ां। भाई की जिंदगी पर संकट आया तो बहन उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। बहन ने अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए छोटे भाई को किडनी दान कर उसे नया जीवन दे दिया। भाई-बहन के अटूट रिश्ते और त्याग की यह मिसाल बड़ागुढ़ा खंड के गांव नागोकी में देखने को मिली है।
रतिया निवासी कुलदीप सिंह (43) पिछले कुछ महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी जूझ रहे थे। चिकित्सकों ने जीवन बचाने के लिए किडनी प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बताया। कुलदीप और उसके परिजनों के लिए बड़ी चिंता थी कि किडनी कहां से लाएंगे। घर में किसी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था। डायलिसिस करवा रहे कुलदीप और उसके परिजनों का एक-एक दिन मुश्किल से कट रहा था। सबके चेहरे मायूसी में डूबे थे। संकट की इस घड़ी में बड़ी बहन बलविंद्र कौर (44) ने अपना रक्त समूह जांच करवाया जो कुलदीप के ब्लड ग्रुप से मैच हो गया। इसके बाद ठान लिया कि चाहे कैसी भी परिस्थिति बने भाई की जिंदगी के लिए अपनी किडनी दान करेगी। संवाद
लोगों ने डराया पर अपने फर्ज नहीं डिगी
बड़ागुढ़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत बलविंद्र कौर ने बताया कि ट्रांसप्लांट से पहले कई लोगों ने उसे डराया कि तुम्हारे दो बच्चे हैं। पति सुलखन सिंह की मौत हो चुकी है। इन परिस्थितियों में वह अपने स्वास्थ्य को संकट में न डालें। बलविंद्र कौर ने बताया कि उसने इसकी परवाह न करते हुए खून और मानवता के रिश्ते को सर्वोपरि रखा। वह जीते-जी किडनी व मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प पहले ही ले चुकी थी। इस संकल्प को पूरा करने का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था।
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15 वर्ष पहले भी करवाया था किडनी प्रत्यारोपण
कुलदीप सिंह का यह दूसरा किडनी प्रत्यारोपण है। करीब 15 वर्ष पहले किडनी में समस्या हुई तो रतिया निवासी अशोक कुमार ने अपनी किडनी देकर जान बचाई थी। उस समय भी बलविंद्र कौर ने किडनी देने की पेशकश की थी लेकिन स्वास्थ्य कारणों से संभव नहीं हो सका था। किडनी प्रत्यारोपण के बाद कुलदीप का जीवन सामान्य चला रहा था लेकिन अचानक संक्रमण से प्रत्यारोपित किडनी खराब हो गई। कुलदीप सिंह ने नम आंखों से बहन बलविंद्र कौर का आभार जताते हुए कहा कि वह उसके लिए फरिश्ते से कम नहीं है। बहन की बदौलत ही वह अपने परिवार के बीच सकुशल हैं।
किडनी दान के प्रति भ्रांतियां और हकीकत
भ्रांति: किडनी दान करने के बाद व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता।
हकीकत: स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी के सहारे भी सामान्य और लंबा जीवन जी सकता है। डॉक्टरों की निगरानी और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी होती है।
भ्रांति: किडनी दान करने से शरीर बहुत कमजोर हो जाता है।
हकीकत: ऑपरेशन के बाद कुछ समय आराम की जरूरत होती है। ज्यादातर लोग फिर से सामान्य दिनचर्या शुरू कर देते हैं।
भ्रांति: केवल परिवार के लोग ही किडनी दान कर सकते हैं।
हकीकत: परिवार के अलावा भी कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल जांच के बाद अन्य लोग किडनी दान कर सकते हैं।
भ्रांति: किडनी दान करना बहुत खतरनाक होता है
हकीकत: आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण यह प्रक्रिया काफी सुरक्षित हो चुकी है।
भ्रांति: उम्र बढ़ने पर दान नहीं किया जा सकता
हकीकत: दान के लिए केवल उम्र नहीं बल्कि व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
भ्रांति: किडनी दान के बाद कामकाज नहीं किया जा सकता।
हकीकत: सही रिकवरी के बाद अधिकतर लोग नौकरी, यात्रा और सामान्य काम आसानी से कर सकते हैं।
भ्रांति: अंगदान करने से जीवनकाल कम हो जाता है
हकीकत: वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति के जीवनकाल पर इसका सामान्यतः कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
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बलविन्द्र कौर पर हम सभी को गर्व है। अपनी सेहत की परवाह किए बगैर भाई को किडनी देकर इंसानियत का बड़ा उदाहरण पेश किया है। आजकल ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं। - पवन कुमार, ब्लॉक प्रेमी सेवक।
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ओढ़ां। भाई की जिंदगी पर संकट आया तो बहन उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। बहन ने अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए छोटे भाई को किडनी दान कर उसे नया जीवन दे दिया। भाई-बहन के अटूट रिश्ते और त्याग की यह मिसाल बड़ागुढ़ा खंड के गांव नागोकी में देखने को मिली है।
रतिया निवासी कुलदीप सिंह (43) पिछले कुछ महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी जूझ रहे थे। चिकित्सकों ने जीवन बचाने के लिए किडनी प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बताया। कुलदीप और उसके परिजनों के लिए बड़ी चिंता थी कि किडनी कहां से लाएंगे। घर में किसी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था। डायलिसिस करवा रहे कुलदीप और उसके परिजनों का एक-एक दिन मुश्किल से कट रहा था। सबके चेहरे मायूसी में डूबे थे। संकट की इस घड़ी में बड़ी बहन बलविंद्र कौर (44) ने अपना रक्त समूह जांच करवाया जो कुलदीप के ब्लड ग्रुप से मैच हो गया। इसके बाद ठान लिया कि चाहे कैसी भी परिस्थिति बने भाई की जिंदगी के लिए अपनी किडनी दान करेगी। संवाद
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लोगों ने डराया पर अपने फर्ज नहीं डिगी
बड़ागुढ़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत बलविंद्र कौर ने बताया कि ट्रांसप्लांट से पहले कई लोगों ने उसे डराया कि तुम्हारे दो बच्चे हैं। पति सुलखन सिंह की मौत हो चुकी है। इन परिस्थितियों में वह अपने स्वास्थ्य को संकट में न डालें। बलविंद्र कौर ने बताया कि उसने इसकी परवाह न करते हुए खून और मानवता के रिश्ते को सर्वोपरि रखा। वह जीते-जी किडनी व मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प पहले ही ले चुकी थी। इस संकल्प को पूरा करने का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था।
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15 वर्ष पहले भी करवाया था किडनी प्रत्यारोपण
कुलदीप सिंह का यह दूसरा किडनी प्रत्यारोपण है। करीब 15 वर्ष पहले किडनी में समस्या हुई तो रतिया निवासी अशोक कुमार ने अपनी किडनी देकर जान बचाई थी। उस समय भी बलविंद्र कौर ने किडनी देने की पेशकश की थी लेकिन स्वास्थ्य कारणों से संभव नहीं हो सका था। किडनी प्रत्यारोपण के बाद कुलदीप का जीवन सामान्य चला रहा था लेकिन अचानक संक्रमण से प्रत्यारोपित किडनी खराब हो गई। कुलदीप सिंह ने नम आंखों से बहन बलविंद्र कौर का आभार जताते हुए कहा कि वह उसके लिए फरिश्ते से कम नहीं है। बहन की बदौलत ही वह अपने परिवार के बीच सकुशल हैं।
किडनी दान के प्रति भ्रांतियां और हकीकत
भ्रांति: किडनी दान करने के बाद व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता।
हकीकत: स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी के सहारे भी सामान्य और लंबा जीवन जी सकता है। डॉक्टरों की निगरानी और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी होती है।
भ्रांति: किडनी दान करने से शरीर बहुत कमजोर हो जाता है।
हकीकत: ऑपरेशन के बाद कुछ समय आराम की जरूरत होती है। ज्यादातर लोग फिर से सामान्य दिनचर्या शुरू कर देते हैं।
भ्रांति: केवल परिवार के लोग ही किडनी दान कर सकते हैं।
हकीकत: परिवार के अलावा भी कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल जांच के बाद अन्य लोग किडनी दान कर सकते हैं।
भ्रांति: किडनी दान करना बहुत खतरनाक होता है
हकीकत: आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण यह प्रक्रिया काफी सुरक्षित हो चुकी है।
भ्रांति: उम्र बढ़ने पर दान नहीं किया जा सकता
हकीकत: दान के लिए केवल उम्र नहीं बल्कि व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
भ्रांति: किडनी दान के बाद कामकाज नहीं किया जा सकता।
हकीकत: सही रिकवरी के बाद अधिकतर लोग नौकरी, यात्रा और सामान्य काम आसानी से कर सकते हैं।
भ्रांति: अंगदान करने से जीवनकाल कम हो जाता है
हकीकत: वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति के जीवनकाल पर इसका सामान्यतः कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
बलविन्द्र कौर पर हम सभी को गर्व है। अपनी सेहत की परवाह किए बगैर भाई को किडनी देकर इंसानियत का बड़ा उदाहरण पेश किया है। आजकल ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं। - पवन कुमार, ब्लॉक प्रेमी सेवक।