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Fatehabad News: डेढ़ माह बाद भी डीएमसी कार्यालय ने पुलिस को नहीं उपलब्ध कराया रिकॉर्ड

Sun, 05 Apr 2026 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 05 Apr 2026 11:35 PM IST
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Even after one and a half months, the DMC office did not provide the records to the police
फतेहाबाद के नगर परिषद कार्यालय में खड़ी कचरा उठान गाड़ी संवाद
फतेहाबाद। डोर टू डोर कचरा उठान के फर्जी बिल भुगतान मामले में डेढ़ माह बीतने के बाद भी नगर परिषद प्रशासन ने पुलिस को जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है। जांच आगे नहीं बढ़ने से मामले को दबाने के आरोप लगने लगे हैं।
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नगर निकाय निदेशालय की टीम ने फरवरी में नगर परिषद कार्यालय में छापे के दौरान अनियमितताओं का खुलासा किया था। जांच में नियमों को नजरअंदाज कर बिल भुगतान का मामला सामने आया। इसके बाद 19 फरवरी को संबंधित एजेंसी और नगर परिषद के सीएसआई सतपाल सैनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
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मामले की जांच के तहत पुलिस ने 24 फरवरी को जिला नगर आयुक्त कार्यालय के माध्यम से नगर परिषद से नौ बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा था। बावजूद इसके अब तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। पुलिस विभाग इस संबंध में एक बार रिमाइंडर भेज चुका है और सोमवार को दोबारा रिमाइंडर भेजने की तैयारी है।
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इस देरी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित एजेंसी और अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं जिन खामियों के आधार पर कार्रवाई हुई थी, उनमें भी अब तक सुधार नहीं किया गया है।

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बस स्टैंड चौकी ने इन प्वाइंटों पर मांगा था रिकॉर्ड

- 19 फरवरी को मुख्यालय से अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट मांगी गई

- डोर टू डोर कचरा उठान एजेंसी बिल की कॉपी और पेमेंट नोटिंग का रिकॉर्ड

- एजेंसी को लगाए गए जुर्माना का रिकॉर्ड

- एजेंसी के अनुबंध के एग्रीमेंट की कॉपी

- एजेंसी द्वारा आरएफ आईडी लगाने का रिकॉर्ड

- आरएफआईडी के अनुसार बिलों के भुगतान का रिकॉर्ड

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नियमों को अनदेखा कर बिल भुगतान का आरोप

नगर निकाय के कार्यकारी अभियंता अंकित लोहान की ओर से इस बारे में कार्रवाई की गई थी और शहर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। आरोप था कि नगर परिषद में वेंडर को टेंडर में निर्धारित लिखित मापदंडों की अवहेलना करते हुए भुगतान किया गया। नियमानुसार काम सही ढंग से न करने पर फर्म पर जुर्माना लगाना बनता था लेकिन मुख्य सफाई निरीक्षक ने काफी कम जुर्माना लगाया। इससे सरकारी खजाने से गड़बड़ी की गई और सफाई फर्म को गैर वाजिब फायदा दिया गया। शहर में करीब 25 हजार प्रॉपर्टी है और यहां पर स्कैनर लगाए गए हैं लेकिन स्थिति यह है कि स्कैनर यानि आरएफ आईडी टूट चुके हैं। इसके अलावा एजेंसी ने गाड़ियां भी पूरी नहीं लगाई। एजेंसी पर जहां डेढ़ से दो लाख का जुर्माना लगाकर बिल में कटौती की जानी थी वहीं सिर्फ 17.44 लाख के बिल में से सिर्फ 24 हजार रुपये की कटौती कर 17.20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था।


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रिकॉर्ड मांगा गया था लेकिन डीएमसी कार्यालय ने अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया है। मामले में रिमांइडर भी भेजा जा चुका है। सोमवार को दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।

-सुमित कुमार, जांच अधिकारी एवं इंचार्ज बस स्टैंड चौकी

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मामले में रिकॉर्ड की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट तैयार करने में समय लगता है। छुट्टियों होने के कारण समय लगा है। जल्द रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

-सुरेश कुमार, ईओ नगर परिषद
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