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जिद पूरी न होने से बच्चे तो बुजुर्ग अकेलापन के कारण हो रहे तनावग्रस्त
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गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक तनावग्रस्त हो रहे है। काम में व्यस्त होने के कारण लोग अपनों को समय नहीं दे पा रहे है, ये ही सबसे बड़ा कारण है कि खुद तनावग्रस्त होने के साथ-साथ बच्चे और बुजुर्ग भी डिप्रेशन का शिकार हो रहे है। तनाव के कारण लोगों के चेहरे से खुशी खत्म हो रही है।
तनाव को लेकर अस्पताल में मनोचिकित्सक के पास रोजाना 15 से 20 मरीजों की ओपीडी आ रही है। जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल है। तनाव बढ़ने के कारण असर नींद पर भी पढ़ रहा है, इसके कारण अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। मोबाइल के कारण बच्चे रोजाना नई चीजों की डिमांड करते है और जब डिमांड पूरी नहीं होती है तो चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। बुजुर्गों में तनाव का सबसे बड़ा कारण ये है कि बच्चे समय नहीं दे रहे है। अकेलापन के कारण बुजुर्गों में तनाव बढ़ रहा है। बुजुर्गों की बच्चों के प्रति जो अपेक्षाएं होती है वह पूरी नहीं हो रही है। इस कारण तनाव ग्रस्त हो रहे हैं।
विचार न मिलने के कारण पति और पत्नी में बढ़ रहा तनाव
परिवार में पति और पत्नी के बीच विचार न मिलने के कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैु। महिलाएं सबसे ज्यादा तनाव में हो जाती है। मनोचिकित्सक की ओपीडी में सबसे ज्यादा महिलाएं आ रही हैं जो कि नींद न आना, चिड़चिड़ापन रहना और घबराहट रहना आदि लक्षणों के बारे में आकर बताती है।
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कोट
बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक तनाव ग्रस्त है, भागदौड़ की जिंदगी में लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं रही है। इसका प्रभाव खुद के साथ-साथ बच्चों पर पड़ रहा है। तना को कम करने के लिए खानपान अच्छा रखें, योगा और प्राणायाम करें। काम के अलावा खुद के शौक पूरे करें। जिसमें म्यूजिक सुनना, गेम खेलना, पेंटिंग करना, खाना बनाना आदि शामिल हो सकता है। परिवार को समय जरूर दें।
-गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक
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तनाव को लेकर अस्पताल में मनोचिकित्सक के पास रोजाना 15 से 20 मरीजों की ओपीडी आ रही है। जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल है। तनाव बढ़ने के कारण असर नींद पर भी पढ़ रहा है, इसके कारण अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। मोबाइल के कारण बच्चे रोजाना नई चीजों की डिमांड करते है और जब डिमांड पूरी नहीं होती है तो चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। बुजुर्गों में तनाव का सबसे बड़ा कारण ये है कि बच्चे समय नहीं दे रहे है। अकेलापन के कारण बुजुर्गों में तनाव बढ़ रहा है। बुजुर्गों की बच्चों के प्रति जो अपेक्षाएं होती है वह पूरी नहीं हो रही है। इस कारण तनाव ग्रस्त हो रहे हैं।
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विचार न मिलने के कारण पति और पत्नी में बढ़ रहा तनाव
परिवार में पति और पत्नी के बीच विचार न मिलने के कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैु। महिलाएं सबसे ज्यादा तनाव में हो जाती है। मनोचिकित्सक की ओपीडी में सबसे ज्यादा महिलाएं आ रही हैं जो कि नींद न आना, चिड़चिड़ापन रहना और घबराहट रहना आदि लक्षणों के बारे में आकर बताती है।
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बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक तनाव ग्रस्त है, भागदौड़ की जिंदगी में लोगों के चेहरे पर खुशी नहीं रही है। इसका प्रभाव खुद के साथ-साथ बच्चों पर पड़ रहा है। तना को कम करने के लिए खानपान अच्छा रखें, योगा और प्राणायाम करें। काम के अलावा खुद के शौक पूरे करें। जिसमें म्यूजिक सुनना, गेम खेलना, पेंटिंग करना, खाना बनाना आदि शामिल हो सकता है। परिवार को समय जरूर दें।
-गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक