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Fatehabad News: दुड़ाराम, परमवीर, जरनैल सिंह और रामा छठी बार तो बबली, सुनैना व बलवान दूसरी बार आजमा रहे किस्मत

Fri, 04 Oct 2024 03:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 04 Oct 2024 03:43 AM IST
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Dudaram, Paramveer, Jarnail Singh and Rama are trying their luck for the sixth time while Babli, Sunaina and Balwan are trying their luck for the second time.
दुड़ाराम।
फतेहाबाद। जिले में सजे चुनावी अखाड़े में इस बार कई दिग्गजों की भी किस्मत दांव पर लगी हुई है। प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से पहली बार से लेकर छठी बार तक के प्रत्याशी मैदान में उतारे गए हैं। पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह, फतेहाबाद के विधायक दुड़ाराम, रतिया के पूर्व विधायक जरनैल सिंह और पूर्व मंत्री रामसरूप रामा छठी बार चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल तीसरी बार जबकि पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली, पूर्व विधायक बलवान सिंह और सुनैना चौटाला दूसरी बार भाग्य आजमा रहे हैं। सुनीता दुग्गल व सुनैना चौटाला एक-एक बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
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गौरतलब है कि जिले में प्रमुख राजनीतिक दलों में भाजपा, कांग्रेस, इनेलो-बसपा गठबंधन, जजपा-आसपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे हुए हैं। तीनों सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस में बना हुआ है जबकि तीनों जगह इनेलो भी अच्छी उपस्थिति दर्ज करवा रही है। संवाद
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दुड़ाराम ने उपचुनाव से की थी शुरुआत
पूर्व मुख्यमंत्री स्व.भजनलाल के भतीजे दुड़ाराम ने विधानसभा स्तर की राजनीति की शुरुआत साल 2003 में हुए उपचुनाव से की थी। पूर्व मंत्री लीलाकृष्ण के निधन के बाद हुए उपचुनाव में वह कांग्रेस की टिकट पर उतरे। मगर उस चुनाव में उनको हार मिली। इसके बाद साल 2005 में कांग्रेस से ही लड़कर विधायक बने। साल 2009 में कांग्रेस की टिकट पर तीसरी बार चुनाव लड़ा। मगर हार गए। साल 2014 में चौथी बार हजकां से लड़े तो फिर हार मिली। साल 2019 में पांचवीं बार भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और विधायक बने। इस बार भाजपा प्रत्याशी के तौर पर वह छठी बार चुनावी अखाड़े में उतरे हुए हैं।
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साल 1987 में पिता की जगह उतरे थे परमवीर सिंह
टोहाना विधानसभा क्षेत्र से परमवीर सिंह ने पहला चुनाव साल 1987 में कांग्रेस की टिकट पर लड़ा था। इससे पहले यहां से उनके पिता सरदार हरपाल सिंह लड़ते रहे थे। मगर उनके लोकसभा का चुनाव लड़ने के चलते उनके बेटे परमवीर सिंह को कांग्रेस ने टिकट दी। मगर पहले चुनाव में परमवीर सिंह कामरेड हरपाल सिंह से हार गए थे। दूसरी बार चुनाव लड़ने में उन्हें 18 साल लग गए। वह साल 2005 में कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे और पहली जीत हासिल की। तीसरी बार 2009 में कांग्रेस ने फिर टिकट थमाई और जीते। साल 2014 में चौथी और साल 2019 में पांचवीं बार भी कांग्रेस की टिकट मिली, लेकिन इन दोनों चुनाव में उन्हें हार मिली। अब छठी बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

रामसरूप रामा ने मात्र 27 साल की उम्र में लड़ा पहला चुनाव
रतिया सीट से इनेलो-बसपा प्रत्याशी 69 वर्षीय रामसरूप रामा ने पहला चुनाव साल मात्र 27 साल की उम्र में साल 1982 में जनता पार्टी की टिकट पर लड़ा। मगर वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद दूसरा चुनाव साल 1991 में भाजपा की टिकट पर लड़ा। तीसरा चुनाव साल 1996 में हविपा की टिकट पर लड़े और जीते। बाद में उन्हें बंसीलाल सरकार में खेल मंत्री बनाया गया। चौथा चुनाव साल 2000 में निर्दलीय लड़ा। मगर पांचवें नंबर पर रहे। पांचवां चुनाव हजकां की टिकट पर साल 2014 में लड़ा, जिसमें चौथे स्थान पर रहे। इस बार छठी बार रामसरूप रामा इनेलो-बसपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे हुए हैं।


जरनैल सिंह साल 2000 में इनेलो से बने थे विधायक
रतिया विधानसभा क्षेत्र से ही कांग्रेस प्रत्याशी जरनैल सिंह भी छठी बार मैदान में हैं। उन्होंने पहला चुनाव साल 2000 में इनेलो से लड़कर जीता था। इसके बाद 2009 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट दी। मगर वह दूसरे नंबर पर रहे। तीसरी बार 2011 में हुए उपचुनाव में भी कांग्रेस ने उन्हें ही उम्मीदवार बनाया और वह जीतकर विधायक बने। साल 2014 में चौथा चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जरनैल सिंह तीसरे स्थान पर रहे। साल 2019 में पांचवें चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण नापा से कांटे के मुकाबले में मात्र 1216 वोटों से हार गए थे। इस बार जरनैल सिंह छठी बार चुनावी रण में उतरे हुए हैं।
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