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दुनिया में आने से पहले ही बंद हो गईं बच्ची की आंखें
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Thu, 14 Jan 2016 11:27 PM IST
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सिविल अस्पताल में सोमवार को दाखिल की गई प्रसूता के गर्भाश्य में पानी की कमी के कारण वीरवार सुबह गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार रात्रि को बच्चे के दिल की धड़कनें चल रही थीं, लेकिन वीरवार सुबह उसकी धड़कनें थम गईं। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला की प्री-मेच्योर डिलीवरी होने के कारण इलाज में दिक्कतें आईं। मामले की जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, बोसवाल की 23 वर्षीय पम्मी पत्नी सतीश कुमार को नागरिक अस्पताल में डिलीवरी के चलते अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने बताया कि उन्होंने पम्मी का अल्ट्रासाउंड करवाया था तो उसके गर्भाश्य में पानी की कमी मिली। उन्होंने उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती करवा दिया। बुधवार रात को डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की धड़कनें चल रही हैं। सुबह बताया गया कि धड़कनें रुक गईं हैं और बच्चे की मौत हो गई है। परिजनों ने अस्पताल में कार्यरत डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रसूता के जेठ विक्रम ने आरोप लगाया कि पम्मी की अस्पताल में सही तरह से देखभाल नहीं की गई, जिस कारण से बच्चे की मौत हुई है। डॉक्टर पम्मी की ऑपरेशन से डिलीवरी कर बच्चे को बचा भी सकते थे। फिलहाल महिला का सिविल अस्पताल में ही उपचार चल रहा है।
महिला का चार-पांच दिन से उपचार चल रहा था। गर्भाश्य में पानी की कमी थी और उसे बुखार भी था, जिसका की दवाई चल रही थी। महिला की प्री-मेच्योर डिलीवरी थी, जिस कारण से दिक्कत आई। मामले की जांच चल रही है।
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डॉ. ओपी दहमीवाल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल
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जानकारी के मुताबिक, बोसवाल की 23 वर्षीय पम्मी पत्नी सतीश कुमार को नागरिक अस्पताल में डिलीवरी के चलते अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने बताया कि उन्होंने पम्मी का अल्ट्रासाउंड करवाया था तो उसके गर्भाश्य में पानी की कमी मिली। उन्होंने उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती करवा दिया। बुधवार रात को डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की धड़कनें चल रही हैं। सुबह बताया गया कि धड़कनें रुक गईं हैं और बच्चे की मौत हो गई है। परिजनों ने अस्पताल में कार्यरत डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रसूता के जेठ विक्रम ने आरोप लगाया कि पम्मी की अस्पताल में सही तरह से देखभाल नहीं की गई, जिस कारण से बच्चे की मौत हुई है। डॉक्टर पम्मी की ऑपरेशन से डिलीवरी कर बच्चे को बचा भी सकते थे। फिलहाल महिला का सिविल अस्पताल में ही उपचार चल रहा है।
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महिला का चार-पांच दिन से उपचार चल रहा था। गर्भाश्य में पानी की कमी थी और उसे बुखार भी था, जिसका की दवाई चल रही थी। महिला की प्री-मेच्योर डिलीवरी थी, जिस कारण से दिक्कत आई। मामले की जांच चल रही है।
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डॉ. ओपी दहमीवाल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल