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सरकारी आदेश के बावजूद खुले रहे निजी स्कूल, डीईओ पहुंचे छुट्टी करवाने
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स्कूल का निरीक्षण करते डीईओ व मौजूद छोटे बच्चे।
- फोटो : Fatehabad
कोरोना महामारी के चलते पहली से आठवीं तक के निजी स्कूलों को बंद रखने के सरकारी आदेशों की स्कूल संचालकों ने परवाह नहीं की। निजी स्कूल संचालक सरकार के इस आदेश को मानने को राजी नहीं हैं। सोमवार को सभी स्कूलों में कक्षाएं नियमित रूप से लगीं। इसकी सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद सिहाग खुद स्कूलों का निरीक्षण करने पहुंच गए। पहले वे अपेक्स स्कूल में पहुंचे जहां पर बच्चे रूटीन की तरह आए हुए थे। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि उनके पास लिखित आदेश नहीं आया हुआ था इसलिए अभिभावकों को भी सूचित नहीं किया। प्रबंधन ने कहा कि लिखित आदेश के बाद हम पहली से आठवीं तक कक्षाएं नहीं लगाएंगे। इसके बाद बच्चों को घर भेज दिया गया। यहां से डीईओ सीनियर मॉडल स्कूल में गए। वहां पर पहली से आठवीं तक के बच्चे ही नहीं आए हुए थे।
स्कूल संचालकों ने एक दिन पहले लिया था आदेश नहीं मानने का निर्णय : दरअसल, स्कूल बंद रखने के आदेश शुक्रवार को ही आ गए थे, इसके बावजूद शनिवार को स्कूल खोले गए और सभी बच्चे स्कूलों में आए। शनिवार को स्कूल संचालकों की तरफ से कहा गया कि उन्हें सरकार के आदेशों के बारे में पता नहीं था। इसलिए बच्चों को सूचित नहीं कर पाए। स्कूल संचालकों ने यह भी कहा कि वे सोमवार से छोटे बच्चों को नहीं बुलाएंगे। इसके बाद निजी स्कूल संचालकों के बीच फिर बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि वे सरकार के आदेश नहीं मानेंगे। हालांकि, उन्होंने खुले तौर पर यह ऐलान नहीं किया, लेकिन आपसी सहमति बना ली गई। आपस में एकमत से निर्णय लिया कि पहली से आठवीं तक की सभी कक्षाएं लगेंगी और सरकार की तरफ से होने वाली कार्रवाई का सामना करेंगे। हालांकि निजी स्कूल संचालकों ने अभी तक खुले तौर पर कुछ नहीं कहा। जानकारी मिली है कि स्कूल संचालक सरकार के आदेश से खुश नहीं है। उनका कहना है कि जब धार्मिक स्थल खुले हैं, धरने प्रदर्शन चल रहे हैं, लोग बसों में सफर कर रहे हैं और बाजारों में घूम रहे हैं तो बच्चों को सिर्फ स्कूलों में ही कोरोना से खतरा क्यों है। उनका कहना है कि पिछले साल हुए आर्थिक नुकसान की अभी तक भरपाई नहीं पा रही। अब फिर स्कूलों में लॉकडाउन किया जा रहा है।
हमने लिखित आदेश भेज दिए : हमें स्कूल संचालकों ने कहा कि उनके पास लिखित आदेश नहीं आए हैं। हमने उन्हें लिखित आदेश की प्रति भेज दी है। स्कूल संचालकों ने कहा है कि वे शाम को दोबारा मीटिंग करेंगे। इसके बाद अपना निर्णय बताएंगे। हालांकि, वे पहली से आठवीं तक स्कूल बंद करने को फिलहाल मान गए हैं। -दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी।
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स्कूल संचालकों ने एक दिन पहले लिया था आदेश नहीं मानने का निर्णय : दरअसल, स्कूल बंद रखने के आदेश शुक्रवार को ही आ गए थे, इसके बावजूद शनिवार को स्कूल खोले गए और सभी बच्चे स्कूलों में आए। शनिवार को स्कूल संचालकों की तरफ से कहा गया कि उन्हें सरकार के आदेशों के बारे में पता नहीं था। इसलिए बच्चों को सूचित नहीं कर पाए। स्कूल संचालकों ने यह भी कहा कि वे सोमवार से छोटे बच्चों को नहीं बुलाएंगे। इसके बाद निजी स्कूल संचालकों के बीच फिर बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि वे सरकार के आदेश नहीं मानेंगे। हालांकि, उन्होंने खुले तौर पर यह ऐलान नहीं किया, लेकिन आपसी सहमति बना ली गई। आपस में एकमत से निर्णय लिया कि पहली से आठवीं तक की सभी कक्षाएं लगेंगी और सरकार की तरफ से होने वाली कार्रवाई का सामना करेंगे। हालांकि निजी स्कूल संचालकों ने अभी तक खुले तौर पर कुछ नहीं कहा। जानकारी मिली है कि स्कूल संचालक सरकार के आदेश से खुश नहीं है। उनका कहना है कि जब धार्मिक स्थल खुले हैं, धरने प्रदर्शन चल रहे हैं, लोग बसों में सफर कर रहे हैं और बाजारों में घूम रहे हैं तो बच्चों को सिर्फ स्कूलों में ही कोरोना से खतरा क्यों है। उनका कहना है कि पिछले साल हुए आर्थिक नुकसान की अभी तक भरपाई नहीं पा रही। अब फिर स्कूलों में लॉकडाउन किया जा रहा है।
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हमने लिखित आदेश भेज दिए : हमें स्कूल संचालकों ने कहा कि उनके पास लिखित आदेश नहीं आए हैं। हमने उन्हें लिखित आदेश की प्रति भेज दी है। स्कूल संचालकों ने कहा है कि वे शाम को दोबारा मीटिंग करेंगे। इसके बाद अपना निर्णय बताएंगे। हालांकि, वे पहली से आठवीं तक स्कूल बंद करने को फिलहाल मान गए हैं। -दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी।
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