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Fatehabad News: ई-दिशा केंद्र में अनुशासन और समय की छुट्टी
Sat, 06 Jun 2026 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 06 Jun 2026 10:48 PM IST
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9 बजकर 13 मिनट पर काउंटर पर मौजूद कर्मचारी
समय : सुबह 9.13 बजे
दिन : शुक्रवार
स्थान : लघु सचिवालय का ई-दिशा केंद्र
उपस्थिति : फर्द शाखा में तीन कर्मचारियों में से एक ही।
फतेहाबाद। ये नजारा है लघु सचिवालय में स्थित ई-दिशा केंद्र का। यहां पर कार्य दिवस में अमुमन ऐसा ही नजारा होता है। कर्मचारियों के कार्यालय आने के समय सुबह 9 बजे निर्धारित हैं लेकिन वे 10-15 मिनट की देरी से लेकर 10 बजे तक कुर्सियों पर पहुंचते हैं। इसका सीधा असर अपने काम के लिए आने वाले लोगों पर पड़ता है।
संवाद न्यूज एजेंसी के सहयोगी ने शुक्रवार को जब पड़ताल की तो नजर आया कि कर्मचारी समय पर न आकर अपनी मर्जी से पहुंच रहे हैं। फर्द शाखा में सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर तीन कर्मचारियों में से एक ही पहुंचा था। डाइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण शाखा में एक ही कर्मचारी सीट पर मौजूद था जबकि बाकी कोई नजर नहीं आया। सूत्रों के अनुसार यहां पर आठ कर्मचारियों की नियुक्ति है।
उल्लेखनीय है कि ई-दिशा केंद्र में रोजाना करीब एक हजार से ज्यादा लोग विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। यहां फर्द, रजिस्ट्री, वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, सामान के गुम की एफआईआर सहित अनेक सेवाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग सुबह नौ बजे से पहले ही केंद्र पहुंच जाते हैं ताकि समय रहते उनका कार्य पूरा हो सके लेकिन आमजन को जल्द कार्यालय पहुंचने का कोई लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि कर्मचारी अपने निर्धारित समय से लेट पहुंच रहे हैं। इस बारे में जब सीटीएम गौरव गुप्ता से पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क ही नहीं हो सका।
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अधिकारी भी नहीं कर पा रहे कुछ
शुक्रवार सुबह 9 बजे के करीब केंद्र में 10 के लगभग लोग मौजूद थे जो अपने अलग-अलग कार्य के लिए वहां पर आए हुए थे। कर्मचारियों की कार्यप्रणाली ऐसी है कि लोगों ने भी उस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ही ऐसी है कि इसमें अधिकारी कुछ भी कर ले कुछ दिनों के बाद फिर से वहीं स्थिति हो जाती है। अगर वे कर्मचारियों से कुछ पूछते हैं तो वे सही से जवाब भी नहीं देते। लोगों के अनुसार कर्मचारी काम को करने के बजाय टालने की स्थिति में ज्यादा रहते हैं।
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रजिस्ट्री करने वाले स्थान से भी कर्मचारी गायब
ई-दिशा केंद्र में रजिस्ट्री शाखा में पेपरलेस रजिस्ट्री वाले स्थान पर भी दो कर्मचारी की ड्यूटी निर्धारित है। 9 बजकर 30 मिनट के बाद उस सीट पर कर्मचारी आएं। वहीं ई-दिशा केंद्र में सीएम विंडो पर शिकायत देने वाली सीट पर भी कोई कर्मचारी नहीं था। जिस कारण आमजन को अपने काम को करवाने में देरी हुई।
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ई-दिशा केंद्र में नहीं लगा सिटीजन चार्ट
ई-दिशा केंद्र के परिसर में न तो सिटीजन चार्ट लगा और न ही कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने व जाने का समय लिखा हुआ है। इस कारण आमजन को भी नहीं पता चलता कि किस सीट पर कौन से कार्य होगा और उसका होने का कितना समय है। कर्मचारियों के आने-जाने का क्या समय है और उनके न होने पर कौन उस सीट का कार्य देखेगा।
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कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं
लोग अपना काम जल्द करवाने के लिए निर्धारित समय पर आ जाते हैं ताकि उनका समय बच सके। यहां आकर पता चलता है कि काम होने में समय लगेगा क्योंकि कर्मचारी अपनी सीट पर ही नहीं हैं। कर्मचारियों के देरी से आने के कारण कार्य होने में अनावश्यक देरी होती है।
- पवन कुमार, निवासी भूथन कलां।
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कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी के निर्धारित समय से पहले आने चाहिए लेकिन यहां पर इसका विपरीत है। कर्मचारी 5-10 मिनट नहीं आधा-आधा घंटा तक लेट आते हैं। अगर कर्मचारी समय से आ जाएं तो लोगों का समय बच सकता है। ऐसा लगता है यहां कोई देखने वाला नहीं है।
- विकास कुमार, निवासी फतेहाबाद।
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केंद्र में नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। देरी से आने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। जब कार्यालयों में अनुशासन और समयबद्ध कार्य प्रणाली होगी तो लोगों को मिलने वाली सेवाएं बेहतर होंगी।
- तरसेम, निवासी हिजरावां कलां
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दिन : शुक्रवार
स्थान : लघु सचिवालय का ई-दिशा केंद्र
उपस्थिति : फर्द शाखा में तीन कर्मचारियों में से एक ही।
फतेहाबाद। ये नजारा है लघु सचिवालय में स्थित ई-दिशा केंद्र का। यहां पर कार्य दिवस में अमुमन ऐसा ही नजारा होता है। कर्मचारियों के कार्यालय आने के समय सुबह 9 बजे निर्धारित हैं लेकिन वे 10-15 मिनट की देरी से लेकर 10 बजे तक कुर्सियों पर पहुंचते हैं। इसका सीधा असर अपने काम के लिए आने वाले लोगों पर पड़ता है।
संवाद न्यूज एजेंसी के सहयोगी ने शुक्रवार को जब पड़ताल की तो नजर आया कि कर्मचारी समय पर न आकर अपनी मर्जी से पहुंच रहे हैं। फर्द शाखा में सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर तीन कर्मचारियों में से एक ही पहुंचा था। डाइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण शाखा में एक ही कर्मचारी सीट पर मौजूद था जबकि बाकी कोई नजर नहीं आया। सूत्रों के अनुसार यहां पर आठ कर्मचारियों की नियुक्ति है।
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उल्लेखनीय है कि ई-दिशा केंद्र में रोजाना करीब एक हजार से ज्यादा लोग विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। यहां फर्द, रजिस्ट्री, वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, सामान के गुम की एफआईआर सहित अनेक सेवाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग सुबह नौ बजे से पहले ही केंद्र पहुंच जाते हैं ताकि समय रहते उनका कार्य पूरा हो सके लेकिन आमजन को जल्द कार्यालय पहुंचने का कोई लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि कर्मचारी अपने निर्धारित समय से लेट पहुंच रहे हैं। इस बारे में जब सीटीएम गौरव गुप्ता से पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क ही नहीं हो सका।
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अधिकारी भी नहीं कर पा रहे कुछ
शुक्रवार सुबह 9 बजे के करीब केंद्र में 10 के लगभग लोग मौजूद थे जो अपने अलग-अलग कार्य के लिए वहां पर आए हुए थे। कर्मचारियों की कार्यप्रणाली ऐसी है कि लोगों ने भी उस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ही ऐसी है कि इसमें अधिकारी कुछ भी कर ले कुछ दिनों के बाद फिर से वहीं स्थिति हो जाती है। अगर वे कर्मचारियों से कुछ पूछते हैं तो वे सही से जवाब भी नहीं देते। लोगों के अनुसार कर्मचारी काम को करने के बजाय टालने की स्थिति में ज्यादा रहते हैं।
रजिस्ट्री करने वाले स्थान से भी कर्मचारी गायब
ई-दिशा केंद्र में रजिस्ट्री शाखा में पेपरलेस रजिस्ट्री वाले स्थान पर भी दो कर्मचारी की ड्यूटी निर्धारित है। 9 बजकर 30 मिनट के बाद उस सीट पर कर्मचारी आएं। वहीं ई-दिशा केंद्र में सीएम विंडो पर शिकायत देने वाली सीट पर भी कोई कर्मचारी नहीं था। जिस कारण आमजन को अपने काम को करवाने में देरी हुई।
ई-दिशा केंद्र में नहीं लगा सिटीजन चार्ट
ई-दिशा केंद्र के परिसर में न तो सिटीजन चार्ट लगा और न ही कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने व जाने का समय लिखा हुआ है। इस कारण आमजन को भी नहीं पता चलता कि किस सीट पर कौन से कार्य होगा और उसका होने का कितना समय है। कर्मचारियों के आने-जाने का क्या समय है और उनके न होने पर कौन उस सीट का कार्य देखेगा।
कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं
लोग अपना काम जल्द करवाने के लिए निर्धारित समय पर आ जाते हैं ताकि उनका समय बच सके। यहां आकर पता चलता है कि काम होने में समय लगेगा क्योंकि कर्मचारी अपनी सीट पर ही नहीं हैं। कर्मचारियों के देरी से आने के कारण कार्य होने में अनावश्यक देरी होती है।
- पवन कुमार, निवासी भूथन कलां।
कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी के निर्धारित समय से पहले आने चाहिए लेकिन यहां पर इसका विपरीत है। कर्मचारी 5-10 मिनट नहीं आधा-आधा घंटा तक लेट आते हैं। अगर कर्मचारी समय से आ जाएं तो लोगों का समय बच सकता है। ऐसा लगता है यहां कोई देखने वाला नहीं है।
- विकास कुमार, निवासी फतेहाबाद।
केंद्र में नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। देरी से आने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। जब कार्यालयों में अनुशासन और समयबद्ध कार्य प्रणाली होगी तो लोगों को मिलने वाली सेवाएं बेहतर होंगी।
- तरसेम, निवासी हिजरावां कलां