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Fatehabad News: नशामुक्ति कैंप प्रकरण में निदेशक की जांच में मनोचिकित्सक व एमईओ दोषी मिले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Dec 2022 11:03 PM IST
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Director's inquiry finds psychiatrist, MEO guilty in drug de-addiction camp case
फतेहाबाद का नशा मुक्ति केंद्र। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिले के 30 गांवों में नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए समाज कल्याण विभाग की तरफ से जारी बजट का दुरुपयोग किया गया। नशा मुक्ति कैंपों के तहत नशा मुक्ति केंद्र फतेहाबाद के नोडल अधिकारी एवं मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश और एमईओ गौरव पर बजट का दुरुपयोग करने का आरोप था। इस मामले की स्वास्थ्य विभाग के निदेशक जेएस पूनिया ने जांच की। जांच में निदेशक ने मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश और एमईओ गौरव को दोषी पाया है। सिविल सर्जन ने मामले में एमईओ गौरव के खिलाफ कार्रवाई के लिए एमडी एनएचएम को पत्र लिखा है।
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टोहाना के कल्याणी नर्सिंग होम के संचालक डॉ. गगनदीप गर्ग ने नशा मुक्ति कैंपों के लिए जारी की गई 14 लाख 56 हजार रुपये की राशि गलत तरीके से आवंटित करने के आरोप लगाए थे। इस मामले को लेकर जांच स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. जेएस पूनिया को सौंपी गई। निदेशक पूनिया ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि 4500 रुपये प्रति दिन के हिसाब से कुल 2 लाख 70 हजार रुपये की राशि मनोरोग विशेषज्ञ को देना उचित प्रतीत नहीं होता है। डॉ. गिरीश नशा मुक्ति केंद्र फतेहाबाद में मनोरोग विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत हैं, लेकिन कैंप के लिए अलग से राशि क्लेम की गई।
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इसी तरह से नागरिक अस्पताल में तैनात एमईओ गौरव कुमार को भी 2500 रुपये मानदेय दिया गया और एक हजार रुपये टीए भी गलत क्लेम किया गया। कैंप लगाने की एवज में इन दिनों में सरकार से तनख्वाह भी ली गई। नार्मल कोर्स ड्यूटी होते हुए डॉ. गिरीश ने 2 लाख 70 हजार और एमईओ गौरव कुमार डेढ़ लाख रुपये मानदेय और 40 हजार रुपये गाड़ी के लिए क्लेम किया, जो कि उचित नहीं था। स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट में कहा है कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक एमईओ गौरव कुमार के खिलाफ गलत तरीके से मानदेय प्राप्त करने की रिकवरी व नियमानुसार कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन को लिखा गया है।
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वर्ष 2020 में जारी हुई थी राशि
जिले के 30 गांवों में लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए सामाजिक एवं न्याय एवं अधिकारिता विभाग की तरफ से वर्ष 2020 में सिविल सर्जन फतेहाबाद को 14 लाख 56 हजार रुपये की राशि जारी है। मेरी ड्यूटी उच्चाधिकारियों द्वारा ही नशा मुक्ति कैंप में लगाई गई थी। आदेशों के मुताबिक कैंप में ड्यूटी दी गई। जो क्लेम है वह भी उच्च अधिकारियों द्वारा ही जारी किया गया है। मैंने उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन किया है। बेवजह गलत आरोप लगाए जा रहे है। अगर जरूरत पड़ी तो मामले को कोर्ट में ले जाएंगे।

- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक
जांच रिपोर्ट आई है। उसके अनुसार एमईओ गौरव कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए एमडी एनएचएम को लिखा गया है। बजट भी दूसरे विभाग की तरफ से जारी हुआ था। डॉ. गिरीश के खिलाफ जो भी कार्रवाई है वह मुख्यालय स्तर पर होनी है।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
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