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Fatehabad News: बाबा श्याम के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
Wed, 01 Jan 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 01 Jan 2025 01:30 AM IST
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टोहाना। शहर के मुख्य बाजारों में श्रीश्याम निशान यात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान भक्तों ने हाथ में बाबा श्याम का निशान उठाकर झूमते हुए यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा बाबा खाटू श्याम मंदिर से शुरू हुई, जो शहर के रतिया रोड, अग्रसेन चौक, घंटाघर चौक, लक्कड़ मार्केट से उत्सव स्थल पहुंचकर पूरी हुई। इस दौरान दलीप सेन ने बताया कि श्रीश्याम संकीर्तन महोत्सव के तहत बाबा श्याम की निशान यात्रा शहर से निकाली गई, जिसमें श्याम प्रेमियों ने भाग लेकर बाबा के चरणों में हाजिरी लगाई। खाटू वाला सेठों का सेठ, हारे के सहारे आजा, खाटू वाले श्याम धनी तेरा चर्चा हो रहा सै, तू कृपा कर बाबा कीर्तन करवाऊंगा, कीर्तन कराऊं ऐसा इतिहास बना दूंगा सहित गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।
वीर बाल दिवस के समापन सप्ताह पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन
फतेहाबाद। शहर के जवाहर चौक में वीर बाल दिवस के समापन सप्ताह पर एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य ग्रंथी दविंद्र सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह के साहिब जादों के साहस और धर्म की रक्षा के लिए उनके निस्वार्थ बलिदान के बारे में जानकारी दी। मुख्य ग्रंथी दविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 1705 में धर्म व देश के लिए अपना जीवन बलिदान देने वाले साहिबजादों की याद में वीर बाल दिवस मनाया जाता है। उनका बलिदान हमें सत्य, साहस और कर्तव्य निष्ठा के मार्ग पर चलते हुए सभी चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। तत्कालीन मुगल शासकों ने इस्लाम स्वीकार न करने के कारण साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह को 26 दिसंबर 1705 को शहीद हो गए थे।
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वीर बाल दिवस के समापन सप्ताह पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन
फतेहाबाद। शहर के जवाहर चौक में वीर बाल दिवस के समापन सप्ताह पर एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य ग्रंथी दविंद्र सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह के साहिब जादों के साहस और धर्म की रक्षा के लिए उनके निस्वार्थ बलिदान के बारे में जानकारी दी। मुख्य ग्रंथी दविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 1705 में धर्म व देश के लिए अपना जीवन बलिदान देने वाले साहिबजादों की याद में वीर बाल दिवस मनाया जाता है। उनका बलिदान हमें सत्य, साहस और कर्तव्य निष्ठा के मार्ग पर चलते हुए सभी चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। तत्कालीन मुगल शासकों ने इस्लाम स्वीकार न करने के कारण साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह को 26 दिसंबर 1705 को शहीद हो गए थे।
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