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Fatehabad News: बाजारों में मिट्टी से बने सामान की बढ़ी मांग, कोई दीये खरीद रहा तो कोई बर्तन
Mon, 28 Oct 2024 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 28 Oct 2024 12:49 AM IST
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फतेहाबाद। दिवाली के त्योहार में अब मात्र चार दिनों का समय शेष है। इसको लेकर बाजारों में रौनक बढ़ी है और खरीदारी भी पूरे जोरों पर है। लोग मिट्टी से बने सामान की अधिक मांग कर रहे हैं। कोई घर को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों की खरीदारी कर रहे हैं, तो कोई मिट्टी के बर्तनों की।
शहर में मिट्टी के दीयों के विक्रेता हरि सिंह, कृष्ण, धर्मपाल, राजकुमार और मुंशीराम ने बताया कि पिछले कुछ साल से चल रहे अभियान के तहत चीन निर्मित सामान के बहिष्कार और देश निर्मित सामान के उपयोग में रुचि बढ़ने से मिट्टी के दीयों की मांग भी बढ़ रही है। गत वर्ष की अपेक्षा इस साल भी मांग अधिक होने से कारीगर एक महीने पहले ही मिट्टी के दीये तैयार करने में जुट गए। अब पिछले एक सप्ताह से बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में दीयों को बेचा जा रहा हैं। इस बार सभी कारीगरों को अच्छे व्यापार की उम्मीद है।
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पिछले साल से 10 प्रतिशत बढ़ी मांग
फतेहाबाद शहर में 30 से अधिक कारीगर रहते हैं, जो दिवाली पर दीये तैयार करते हैं। कारीगर राजकुमार ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल दीयों की मांग में 10 प्रतिशत की वृद्धि रहने की उम्मीद है। पिछले साल से इस साल ऑर्डर अधिक मिला है। इस बार ग्राहक 51 दीयों के सेट की मांग कर रहे हैं। वहीं पूजा के लिए रंग-बिरंगें सजावटी दीयों की भी मांग कर रहे हैं। इससे मिट्टी कला के कारीगरों में खुशी का माहौल है।
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मिट्टी का दीया जलाने का धार्मिक महत्व
मिट्टी के दीये का धार्मिक महत्व भी है। पूजा-पाठ से लेकर हर शुभ कार्य में मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि मिट्टी के दीये से निकलने वाली रोशनी लोगों के जीवन में खुशियों का प्रतीक है। साथ ही इसका आर्थिक फायदा भी है। यह बिजली की लाइटिंग से सस्ती है। साथ दीयों की खरीदारी से इस कार्य से जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलता है।
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मिट्टी मूर्तियों और खिलौनों की मांग बढ़ी
मिट्टी कला से जुड़े कारीगरों को इन दिनों एक पल की भी फुर्सत नहीं है। इस बार गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों से लेकर खिलौनों तक की मांग बढ़ी है। गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ महिलाएं खिलौने तैयार करने में जुटी हैं। खिलौनों का रंग रोगन तेजी से चल रहा है। घरेलू बर्तन, गुल्लक, चकिया, चूल्हा, कार, ग्वालिन सहित खिलौने की बेहतरीन मांग हो रही है।
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शहर में मिट्टी के दीयों के विक्रेता हरि सिंह, कृष्ण, धर्मपाल, राजकुमार और मुंशीराम ने बताया कि पिछले कुछ साल से चल रहे अभियान के तहत चीन निर्मित सामान के बहिष्कार और देश निर्मित सामान के उपयोग में रुचि बढ़ने से मिट्टी के दीयों की मांग भी बढ़ रही है। गत वर्ष की अपेक्षा इस साल भी मांग अधिक होने से कारीगर एक महीने पहले ही मिट्टी के दीये तैयार करने में जुट गए। अब पिछले एक सप्ताह से बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में दीयों को बेचा जा रहा हैं। इस बार सभी कारीगरों को अच्छे व्यापार की उम्मीद है।
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पिछले साल से 10 प्रतिशत बढ़ी मांग
फतेहाबाद शहर में 30 से अधिक कारीगर रहते हैं, जो दिवाली पर दीये तैयार करते हैं। कारीगर राजकुमार ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल दीयों की मांग में 10 प्रतिशत की वृद्धि रहने की उम्मीद है। पिछले साल से इस साल ऑर्डर अधिक मिला है। इस बार ग्राहक 51 दीयों के सेट की मांग कर रहे हैं। वहीं पूजा के लिए रंग-बिरंगें सजावटी दीयों की भी मांग कर रहे हैं। इससे मिट्टी कला के कारीगरों में खुशी का माहौल है।
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मिट्टी का दीया जलाने का धार्मिक महत्व
मिट्टी के दीये का धार्मिक महत्व भी है। पूजा-पाठ से लेकर हर शुभ कार्य में मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि मिट्टी के दीये से निकलने वाली रोशनी लोगों के जीवन में खुशियों का प्रतीक है। साथ ही इसका आर्थिक फायदा भी है। यह बिजली की लाइटिंग से सस्ती है। साथ दीयों की खरीदारी से इस कार्य से जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलता है।
मिट्टी मूर्तियों और खिलौनों की मांग बढ़ी
मिट्टी कला से जुड़े कारीगरों को इन दिनों एक पल की भी फुर्सत नहीं है। इस बार गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों से लेकर खिलौनों तक की मांग बढ़ी है। गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ महिलाएं खिलौने तैयार करने में जुटी हैं। खिलौनों का रंग रोगन तेजी से चल रहा है। घरेलू बर्तन, गुल्लक, चकिया, चूल्हा, कार, ग्वालिन सहित खिलौने की बेहतरीन मांग हो रही है।