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Haryana: प्रशासन की देरी किसानों की बढ़ा रही चिंता, अफसरों के दावे पर उठ रहे सवाल; राम भरोसे घग्गर नदी का बांध

Fri, 14 Jun 2024 12:43 PM IST
नवीन दलाल कपिल शर्मा, फतेहाबाद (हरियाणा)
कपिल शर्मा, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 14 Jun 2024 12:43 PM IST
सार

पिछली बार पंजाब क्षेत्र में बांध टूटने से जाखल के जरिये फतेहाबाद जिले में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। घग्गर नदी में ज्यादा पानी होने पर रंगोई नाले में पानी डाला जाता है। मगर, रंगोई नाले के तटबंध कमजोर साबित हुए। तीन जगह रंगोई नाले के तटबंध टूट गए थे। इस बार भी अधिकारियों के दावे हवा-हवाई लग रहे हैं।

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delay of administration in Haryana is increasing worrie of  farmers, questions being raise on claim of officer
घग्गर नदी पर जाखल-कासिमपुर पुल - फोटो : संवाद

विस्तार

पिछले साल बाढ़ की भयावह स्थिति झेल चुके किसानों की चिंता फिर बढ़ गई है। करीब 11 महीने पहले आई बाढ़ का जख्म जिलावासी अभी भूल ही नहीं पाए कि इस बार भी तटबंध टूटने की आशंका उनमें डर पैदा कर दी है। किसानों को डर है कि इस बार भी अगर अधिक बारिश हुई तो प्रशासन के प्रबंध नाकाफी साबित होंगे और किसानों को बाढ़ से जूझना पड़ सकता है। वहीं, अब तक बेफिक्र बैठे अधिकारी सिर्फ 18 दिन में घग्गर नदी और रंगोई नाले के तटबंध मजबूत करने से लेकर ड्रेनों की सफाई तक का काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि वर्ष 2023 में 13 जुलाई को पंजाब क्षेत्र में घग्गर नदी का बांध टूटने से जाखल के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। इसके बाद धीरे-धीरे जिले के 124 गांवों के खेतों में जलभराव हो गया था। करीब 40 दिन तक जलभराव से जिले की आधी आबादी जूझती रही थी। हालांकि प्रशासन ने शहरों व गांवों की आबादी में पानी नहीं आने दिया था। जाखल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली घग्गर नदी में पानी की क्षमता 22 हजार क्यूसेक है। इससे ज्यादा जलप्रवाह होने पर नदी का पानी रंगोई नाले में भी छोड़ा जाता है। संवाद
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मुआवजे के लिए चार महीने से जाखल उपतहसील में किसानों का धरना
बाढ़ पीड़ित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया है। पहले पोर्टल पर नुकसान दर्शाने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अधिकारियों को सत्यापन में समय लगता रहा। करीब छह महीने बाद किसानों के लिए करीब चार करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया। मगर, किसान संगठनों ने कई किसानों के मुआवजे से वंचित रहने के आरोप लगाए। सुनवाई नहीं होने पर 7 फरवरी को जाखल उपतहसील कार्यालय में किसान संगठनों ने धरना शुरू दिया। पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान, किसान नेता लाभ सिंह, जग्गी महल ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीने से किसानों का उपतहसील में धरना चल रहा है। अब भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।

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रंगोई नाले की सफाई नहीं हुई, तटबंधों को भी मजबूती का इंतजार

पिछली बार पंजाब क्षेत्र में बांध टूटने से जाखल के जरिये फतेहाबाद जिले में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। घग्गर नदी में ज्यादा पानी होने पर रंगोई नाले में पानी डाला जाता है। मगर, रंगोई नाले के तटबंध कमजोर साबित हुए। तीन जगह रंगोई नाले के तटबंध टूट गए थे। घग्गर नदी में भी लीकेज हो गई थी। गांव लांबा के पास घग्गर में 15 फुट और गांव जाखल के पीछे घग्गर नदी में 10 फुट तक कटाव हो गया था। मगर, अभी तक प्रशासन की ओर से घग्गर नदी व रंगोई नाले के तटबंधों को मजबूत करने के लिए प्रयास नहीं किए। फतेहाबाद, टोहाना, जाखल व रतिया क्षेत्र में सड़कों के नीचे बनी पानी निकासी की पुलियों की भी सफाई करवाने की जरूरत है। इनकी भी अब तक सफाई नहीं कराई गई है।

ये हुआ था नुकसान

फतेहाबाद जिले में 124 गांवों में करीब 92000 एकड़ में जलभराव हो गया था। इससे धान, नरमा, ज्वार व पशुओं के चारे की फसलें बर्बाद हो गई थीं। खेतों में बने 1123 मकानों को नुकसान हुआ था और 45 पशुओं की मौत हो गई थी। जाखल क्षेत्र के गांवों में खेतों में मिट्टी भर गई थी। इस मिट्टी को भी खेतों से बाहर निकालने का सारा काम किसानों ने अपने स्तर पर ही करवाया था और पंजाब के किसानों ने भी ट्रैक्टर भेजे थे।

सिंचाई विभाग ने यह बनाया था प्लान

सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओमप्रकाश बिश्नोई के अनुसार पिछले साल आई बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग ने करीब 90 करोड़ रुपये के काम करवाने के लिए एस्टीमेट तैयार किए थे। इनके तहत फतेहाबाद की मुंशीवाली माइनर, भिरड़ाना माइनर व रत्ताथेह माइनर के नीचे साइफन बनाए जाएंगे, ताकि बाढ़ का पानी आगे निकल जाए। अभी 9 गांवों में पाइप लाइन बिछाई जानी हैं, जो सीधा पास से गुजर रही नहरों तक जाएंगी।

जाखल-कुलां मार्ग पर निकलने वाली भाखड़ा नहर घग्गर के ऊपर से गुजर रही है, इसके तटबंधों को ऊंचा किया जाना है। जिले में गुजरने वाले सभी रंगोई नालों के तटबंधों को मजबूत किया जाना है, ताकि बाढ़ का पानी रंगोई नाले में डाला जाए तो तटबंध न टूटे। करीब 24 लाख रुपये से नए पंप सेट और अन्य सामान खरीदा जाना था। इनमें से अधिकांश कार्यों के टेंडर हो चुके हैं, काम शुरू होना बाकी है। वैसे प्रशासन का दावा है कि 30 जून से पहले सारे काम पूरे किए जाएंगे।

अधिकारी के अनुसार

मैंने अधिकारियों के साथ फील्ड में जाकर सभी जगहों का निरीक्षण किया है। तटबंधों को मजबूत करने, चांदपुरा साइफन से लेकर सभी ड्रेनों की सफाई करवाने का कार्य 30 जून तक पूरे करवाने के निर्देश दे दिए हैं। जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। -राहुल नरवाल, डीसी, फतेहाबाद।

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