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सरकारी अस्पताल में संक्रमित मृतक का शव बदला

Sun, 02 May 2021 11:07 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 11:07 PM IST
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Dead body of infected deceased changed in government hospital
कोरोना महामारी में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही के चलते परिवार के लोग संक्रमित मृतक सदस्य के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए। फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में शव बदले जाने का मामला सामने आया है। शव बदलने का पता तब चला जब नगर परिषद की टीम दाह संस्कार कर चुकी थी और दूसरे परिवार के लोग अस्थियां भी एकत्र कर चुके थे। वहीं दूसरे परिवार के लोग शनिवार शाम से लेकर रविवार दोपहर तक शव मिलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब शव गृह में जाकर देखा तो शव गायब होने पर परिवारजन हैरान हुए ही प्रशासन में भी खलबली मच गई। जांच की तो पता चला कि शव का तो शनिवार को ही अंतिम संस्कार हो चुका था।
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हुआ यूं कि शनिवार शाम को फतेहाबाद के कीर्तिनगर निवासी बुजुर्ग जगतार सिंह और जगजीवनपुरा मोहल्ला निवासी बुजुर्ग श्रवण की कोराना संक्रमण से मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शव को पैक कर शव गृह में रखवा दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान श्रवण के परिवार के लोग मौके पर नहीं थे। इस दौरान कीर्ति नगर निवासी जगतार सिंह के परिवार के लोग पहुंचे और कोविड एंबुलेंस में शव ले गए। नगर परिषद ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं मृतक श्रवण के भांजे अतुल भाटिया ने बताया कि रात को जब परिवार के लोग पहुंचे तो अस्पताल प्रशासन ने शव को शव गृह में होना बताया और कहा गया कि रविवार सुबह शव को कोविड एंबुलेंस में ले जाया जाएगा। परिवार के लोग सुबह से लेकर दोपहर तक कोविड एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। दोपहर को जब कोविड एंबुलेंस आई और शव गृह में देखा तो शव नहीं था। अस्पताल प्रशासन से पूछा गया तो वह खुद हैरान हो गए कि शव आखिर कहां गया। मृतक जगतार सिंह जिसके शव को कागजों में शनिवार शाम को ले जाया गया दिखा रहा था, वह मौजूद था। अस्पताल प्रशासन ने जगतार सिंह के परिवार को बुलाया तो ये खुलासा हुआ कि जगतार सिंह का शव समझ परिवार के लोग जगजीवनपुरा मोहल्ला निवासी श्रवण का शव ले गए और अंतिम संस्कार भी करवा दिया।
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अस्पताल प्रशासन को स्लिप लगानी चाहिए : अतुल भाटिया
हम शनिवार रात से शव के बारे में पूछ रहे थे तो ये ही कहा जा रहा था कि शव गृह में रखवा दिया गया है। दोपहर को हमने जब देखा तो शव नहीं था। अस्पताल प्रशासन को भी नहीं पता था। जांच की तो पता चला कि मामा के शव को दूसरे परिवार के लोग ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया। अब हम ने उनसे अस्थियां ले ली है। अस्पताल प्रशासन को कम से कम शव पर स्लिप लगानी चाहिए।
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- अतुल भाटिया, मृतक का भांजा।
कोट
शव को स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस में लेकर आती है और परिवार के लोग पहचान करते है। इसके बाद नगर परिषद की टीम दाह संस्कार करती है।
- महेश कुमार, एसआई, नगर परिषद।
कोट
एंबुलेंस में शव डालकर कर्मचारी ले गए थे, परिवार ने पहचान की थी। लेकिन फिलहाल मामला अभी सुलझ गया है।
- डॉ. हनुमान, उप सिविल सर्जन।
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