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किसानों पर आग का कहर, 250 एकड़ में गेहूं की फसल तबाह
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Tue, 18 Apr 2017 11:59 PM IST
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दो दिन से जल रहा माउंट आबू का जंगल
- फोटो : SELF
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बिजली की तारों से निकली चिंगारी से किसानों के अरमां उनके आंखों के सामने जल गए। मंगलवार को दोपहर में लगी आग ने कई गांवों के सैक ड़ों एक गेहूं की फसल को जलाकर खाक कर दिया। ज्यादा नुकसान सिरसा रोड स्थित गांव गिल्लाखेड़ा एवं आसपास की ढाणियों के किसानों का हुआ है। गांव गिल्लाखेड़ा में तकरीबन 250 एकड़ जमीन पर खड़ी गेहूं की तैयार फसल एवं 450 सौ एकड़ में पड़ा भूसा जलकर खाक हो गया। फतेहाबाद के गांव नहला, भिरडाना और अयालकी के पास भी लगी आग में लगभग 50 एकड़ के करीब आग से नुकसान हुआ। विकराल रूप से लगी आग को किसानों ने अपने स्तर पर बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग इतनी भयंकर थी उनके सारे प्रयत्न नाकाफी साबित हुए।
सूचना पर फतेहाबाद और सिरसा से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची और तकरीबन दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। प्रशासन की ओर से एसडीएम सतबीर जांगू, एसएचओ रूपेश चौधरी एवं नायब तहसीलदार विजय सिंह मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लेते हुए किसानों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बता दें कि गिल्लाखेड़ा गांव पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा का पैतृक गांव है। उन्होंने आग लगने के दौरान लापरवाही बरतने के लिए बिजली निगम के कार्यकारी अभियंता पर जमकर हमला बोला और उन पर केस दर्ज करवाने की भी चेतावनी दी।
जानकारी के अनुसार सिरसा के गांव पतली डाबर में खेतों में जा रही 33 केवी सबस्टेशन की तारों के बीच में स्पार्किंग होने से नीचे खेतों में खड़ी फसल में आग लग गई। इससे पहले मौके पर मौजूद किसान कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप ले लिया और बढ़ते-बढ़ते आग फतेहाबाद के गांव गिल्लाखेड़ा के खेतों में आ पहुंची। गिल्लखेड़ा के ढाणियों एवं खेतों में पहुंचने के बाद हवा के दबाव से आग एकाएक चारों और फैल गई और इसके बाद आग ने मानों कहर ही ढहा दिया।
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प्रशासन की सूझबूझ से मंगलवार को 250 एकड़ में लगी भीषण आग और उससे किसानों के फसल की तबाही को रोका जा सकता था। लेकिन प्रशासन के आपसी तालमेल के अभाव एवं नासमझी के चलते किसानों के अरमां एवं उनकी छह माह की मेहनत उनकी आंखों के सामने जल गई।
बता दें कि पतली डाबर से लेकर गांव गिल्लाखेड़ा के खेतों तक लगभग चार-चार एकड़ में सैकड़ों की संख्या में ट्यूबवेल हैं। जिनसे पानी अंडरग्राउंड पाइपलाइन की मदद से खेतों में जाता है, अगर इन ट्यूबवेलों को चालू कर दिया जाता तो किसान अपने-अपने खेत में आग पहुंचने ही नहीं देता। इससे आग का तांडव कम हो जाता और नुकसान को भी रोका जा सकता था, लेकिन जब बिजली ही नहीं तो भला ट्यूबवेल चलें कैसे। प्रशासनिक अधिकारी खड़े होकर केवल एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे। खेत में जली फसल और किसानों की हालात देखकर पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लखेड़ा बहुत ही व्यथित हुए। सीपीएस ने संबंधित एक्सईएन पर एफआईआर की चेतावनी दी।
बिजली की तारों से ही आग लगी, जब बुझाने के लिए चाहिए थी बिजली तो कट लग गया
गांव गिल्लाखेड़ा में पहुंची आग पतली डाबर से बोदीवाली फीडर को जाने वाली बिजली की तारों में स्पॉर्किंग से लगी थी। अगर बिजली विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की बात मानते हुए गिल्लाखेड़ा फीडर की बिजली छोड़ देते तो गांव के खेतों में लगे ट्यूबवेल आग का प्रभाव पहले ही कम कर देते और आग से इतना नुकसान नहीं हो पाता, जितना हो गया। खुद प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने चार बार डीसी एनके सोलंकी, छह बार एसडीएम सतबीर जांगू एवं 3 बार एक्सईएन विजेंद्र सिंह को फोन किया, लेकिन नियमों की आड़ लेकर अधिकारी मौके पर बड़ा फैसला नहीं ले सके और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
गिल्लाखेड़ा के इन किसानों को हुआ नुकसान
किसान एकड़ फसल का नुकसान
इंद्र सिंह : 25 एकड़
राहुल : 52 एकड़
गगन : 55 एकड़
अरविंद : साढे़ 6 एकड़
रामरख : 56 एकड़
कुलदीप : 30 एकड़
जागर : 10 एकड़
कुल 234 एकड़ (कई किसान इधर-उधर होने की वजह से आंकड़ा नहीं दे पाए)
गिल्लाखेड़ा ने मांगा 40 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा
जले हुए खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने मौके पर पहुंचे एसडीएम सतबीर जांगू को कार्यकारी अभियंता बिजली बोर्ड की शिकायत की और प्रशासन के ढीले रवैये पर सख्त ऐतराज जताया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित किसानों के लिए 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा की मांग भी की। इस पर एसडीएम ने कहा कि वो इन खेतों की तुरंत गिरदावरी करवाकर पूरी रिपोर्ट सरकार को भेज देंगे। मुआवजे के बारे में सरकार ही ऐलान करेगी। हालांकि बिजली निगम की लापरवाही की बात एसडीएम ने भी मानी।
गिल्लाखेड़ा गांव में नुकसान काफी ज्यादा हुआ है। गांव की गिरदावरी करवाई जाएगी और पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। बिजली निगम की लापरवाही की बात तो जांच के बाद ही पता चलेगी, लेकिन बताया जा रहा है कि बोदीवाली स्टेशन को जाने वाली ही तारों में स्पॉर्किंग से आग लगी है तो यहां की बिजली कैसे शुरू हो सकती थी।
सतबीर जांगू, एसडीएम, फतेहाबाद ।
सूचना पर फतेहाबाद और सिरसा से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची और तकरीबन दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। प्रशासन की ओर से एसडीएम सतबीर जांगू, एसएचओ रूपेश चौधरी एवं नायब तहसीलदार विजय सिंह मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लेते हुए किसानों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बता दें कि गिल्लाखेड़ा गांव पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा का पैतृक गांव है। उन्होंने आग लगने के दौरान लापरवाही बरतने के लिए बिजली निगम के कार्यकारी अभियंता पर जमकर हमला बोला और उन पर केस दर्ज करवाने की भी चेतावनी दी।
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जानकारी के अनुसार सिरसा के गांव पतली डाबर में खेतों में जा रही 33 केवी सबस्टेशन की तारों के बीच में स्पार्किंग होने से नीचे खेतों में खड़ी फसल में आग लग गई। इससे पहले मौके पर मौजूद किसान कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप ले लिया और बढ़ते-बढ़ते आग फतेहाबाद के गांव गिल्लाखेड़ा के खेतों में आ पहुंची। गिल्लखेड़ा के ढाणियों एवं खेतों में पहुंचने के बाद हवा के दबाव से आग एकाएक चारों और फैल गई और इसके बाद आग ने मानों कहर ही ढहा दिया।
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प्रशासन की सूझबूझ से मंगलवार को 250 एकड़ में लगी भीषण आग और उससे किसानों के फसल की तबाही को रोका जा सकता था। लेकिन प्रशासन के आपसी तालमेल के अभाव एवं नासमझी के चलते किसानों के अरमां एवं उनकी छह माह की मेहनत उनकी आंखों के सामने जल गई।
बता दें कि पतली डाबर से लेकर गांव गिल्लाखेड़ा के खेतों तक लगभग चार-चार एकड़ में सैकड़ों की संख्या में ट्यूबवेल हैं। जिनसे पानी अंडरग्राउंड पाइपलाइन की मदद से खेतों में जाता है, अगर इन ट्यूबवेलों को चालू कर दिया जाता तो किसान अपने-अपने खेत में आग पहुंचने ही नहीं देता। इससे आग का तांडव कम हो जाता और नुकसान को भी रोका जा सकता था, लेकिन जब बिजली ही नहीं तो भला ट्यूबवेल चलें कैसे। प्रशासनिक अधिकारी खड़े होकर केवल एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे। खेत में जली फसल और किसानों की हालात देखकर पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लखेड़ा बहुत ही व्यथित हुए। सीपीएस ने संबंधित एक्सईएन पर एफआईआर की चेतावनी दी।
बिजली की तारों से ही आग लगी, जब बुझाने के लिए चाहिए थी बिजली तो कट लग गया
गांव गिल्लाखेड़ा में पहुंची आग पतली डाबर से बोदीवाली फीडर को जाने वाली बिजली की तारों में स्पॉर्किंग से लगी थी। अगर बिजली विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की बात मानते हुए गिल्लाखेड़ा फीडर की बिजली छोड़ देते तो गांव के खेतों में लगे ट्यूबवेल आग का प्रभाव पहले ही कम कर देते और आग से इतना नुकसान नहीं हो पाता, जितना हो गया। खुद प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने चार बार डीसी एनके सोलंकी, छह बार एसडीएम सतबीर जांगू एवं 3 बार एक्सईएन विजेंद्र सिंह को फोन किया, लेकिन नियमों की आड़ लेकर अधिकारी मौके पर बड़ा फैसला नहीं ले सके और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
गिल्लाखेड़ा के इन किसानों को हुआ नुकसान
किसान एकड़ फसल का नुकसान
इंद्र सिंह : 25 एकड़
राहुल : 52 एकड़
गगन : 55 एकड़
अरविंद : साढे़ 6 एकड़
रामरख : 56 एकड़
कुलदीप : 30 एकड़
जागर : 10 एकड़
कुल 234 एकड़ (कई किसान इधर-उधर होने की वजह से आंकड़ा नहीं दे पाए)
गिल्लाखेड़ा ने मांगा 40 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा
जले हुए खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने मौके पर पहुंचे एसडीएम सतबीर जांगू को कार्यकारी अभियंता बिजली बोर्ड की शिकायत की और प्रशासन के ढीले रवैये पर सख्त ऐतराज जताया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित किसानों के लिए 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा की मांग भी की। इस पर एसडीएम ने कहा कि वो इन खेतों की तुरंत गिरदावरी करवाकर पूरी रिपोर्ट सरकार को भेज देंगे। मुआवजे के बारे में सरकार ही ऐलान करेगी। हालांकि बिजली निगम की लापरवाही की बात एसडीएम ने भी मानी।
गिल्लाखेड़ा गांव में नुकसान काफी ज्यादा हुआ है। गांव की गिरदावरी करवाई जाएगी और पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। बिजली निगम की लापरवाही की बात तो जांच के बाद ही पता चलेगी, लेकिन बताया जा रहा है कि बोदीवाली स्टेशन को जाने वाली ही तारों में स्पॉर्किंग से आग लगी है तो यहां की बिजली कैसे शुरू हो सकती थी।
सतबीर जांगू, एसडीएम, फतेहाबाद ।