फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   fatehabad, numberdaar, termenated, dc take action, fatehabad, harayana

नंबरदार निपटा, आखिर बड़ी मछलियों पर शिकंजा कब

Fri, 09 Dec 2016 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद Updated Fri, 09 Dec 2016 12:50 AM IST
विज्ञापन
fatehabad, numberdaar, termenated, dc take action, fatehabad,  harayana
नंबरदार की बर्खास्तगी के आदेश की प्रति । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 
विज्ञापन


 गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण में बढ़ा मुआवजा दिलाने के नाम पर अधिकारियों को पैसे दिए जाने वाले एक मामले की जांच में फतेहाबाद उपायुक्त एनके सोलंकी ने सिर्फ आरोपी नंबरदार को ही बर्खास्त किया गया है। जबकि इसी मामले में तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा भी पैसे लेने की बात सामने आई थी। ऐसा प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन के बड़े अफसरों ने अपने पूर्व साथियों को बचाने के चक्कर में इस मामले की जांच ना तो आगे बढ़ाई और ना ही इस मामले में अभी तक कोई केस दर्ज कराया है। ऐसे में ये पूरा मामला किसी बड़े स्कैंडल की जड़ हो सकता है, जिसे अधिकारी कुरेदने से बचना चाह रहे हैं। हालांकि ‘अमर उजाला’ द्वारा मुद्दा उठाने के बाद जिले के मुखिया डीसी एनके सोलंकी जांच के दूसरे चरण की भी बात कह रहे हैं।


जब नंबरदार के खिलाफ जांच तो अधिकारियों से पूछताछ क्यों नहीं
जब एडीसी डा. जेके अभीर की जांच रिपोर्ट में ये बात साफ है कि नंबरदार सज्जन कुमार ने गांव गोरखपुर के सुरेश कुमार और उनके भाइयों से पैसा लेकर परमाणु संयंत्र की जमीन का मुआवजा बढ़ाने के लिए अधिकारियों को दिया था।
विज्ञापन


हालांकि तत्कालीन तहसीलदार का ये कबूलनामा कि उसकी पत्नी का इलाज करवाने के लिए उसने नंबरदार सज्जनकुमार से ढाई लाख रुपये लिए थे, किसी भी तरह से गले नहीं उतरता। क्योंकि नंबरदार ने सुरेश कुमार से पैसे मुआवजा बढ़वाने के नाम के लिए थे। दूसरा तत्कालीन रामचंद्र को एक नंबरदार से पैसे उधार लेने की क्या आवश्यकता पड़ गई। उनकी बीमार बीवी के इलाज के लिए सरकारी सहायता मिलनी तय थी। अगर ज्यादा की भी जरूरत थी तो लोन का भी विकल्प खुला था। दूसरी ओर तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी से पूछताछ तक नहीं की गई। ये हालात तब हैं जब पिछले चार-पांच साल से शिकायतकर्ता को अपनी दी गई रकम ही वापिस नहीं मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन



सामने आ सकता है बड़ा स्कैंडल
अगर इस मामले की विस्तृत एवं ईमानदारी से जांच की जाए तो गांव गोरखपुर में अनेक ऐसे मामले मिलेंगे जो जमीन का मुआवजा बढ़ाने की खातिर कथित रूप से अधिकारियों एवं बिचौलियों को पैसे खिला चुके हैं लेकिन समय के साथ साथ सब चुप हो गए। इस बीच कई अधिकारियों का तबादला हो गया तो कुछ रिटायर हो गए। ऐसे में विस्तृत जांच में मुआवजा बढ़ाने के खेल के पीछे एक बड़ा स्कैंडल सामने आ सकता है।  


ये था मामला
गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए गोरखपुर निवासी सुरेश कुमार, अनिल, अजीत और सुनील की कुल 6 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो गया। इस छह एकड़ में से चार एकड़ जमीन का मुआवजा तो इन लोगों को मिल गया लेकिन बाकी दो एकड़ जमीन इनकी बुआ ओमी देवी के पास थी। इन लोगों का दावा था कि ओमी देवी ने जुबानी वसियत इनके नाम कर रखी थी लेकिन ओमी देवी के बेटे बलवान ने उन दो एकड़ जमीन का मुआवजा लेने के लिए दरख्वास्त लगा दी क्योंकि कागजों में जमीन ओमी देवी के नाम थी।


इस बीच मामले में नंबरदार सज्जन कुमार की इंट्री होती है जो सुरेश और उसके भाइयों को भरोसा दिलाता है कि अगर वे लोग 10 से 12 लाख दे दे तो इस दो एकड़ का मुआवजा भी उनको दिलवा देगा। उनके हां करने के दो दिन बाद सज्जन नंबरदार का संदेश आता है कि प्रशासन के बड़े अफसरों से बात हो गई है और कुल 14 लाख में सेटिंग होगी। एडवांस के तौर पर 4 लाख रुपये सज्जन को 14 अगस्त 2012 को दे दिए। इसके बाद 25 अगस्त 2012 को सज्जन नंबरदार को फिर से 8 लाख रुपये दे दिए गए। उसी साल 26 अक्तूबर को तत्कालीन डीआरओ ने दो एकड़ जमीन का इंतकाल चारों भाइयों के नाम करने के आदेश जारी कर दिए लेकिन बलवान ने डीसी कोर्ट में इस मामले को चैलेंज कर दिया।

सुरेश और उसके भाइयों ने आरोप लगाया है कि डीसी कोर्ट में मामला जाने के बाद सज्जन नंबरदार ने तत्कालीन डीसी साकेत कुमार को देने के नाम पर भी दो लाख और ले लिए। हालांकि डीसी साकेत कुमार की कोर्ट ने बलवान के हक में फैसला दिया। इसके बाद भी सिविल अदालत ने भी बलवान के ही हक में फैसला दिया तो सुरेश और उसके भाइयों ने सज्जन नंबरदार से पैसे वापिस मांगे तो उसने कहा कि जिस अधिकारी को पैसे दिए हैं, वो तीन माह बाद पैसे देने की बात कर रहा है। बार बार मांगने पर तीन साल के बाद 3 जुलाई 2015 को सज्जन ने ढाई लाख रुपये ये कहते वापस कर दिए कि ढाई लाख रुपये तहसीलदार ने वापस कर दिए हैं। अन्य अधिकारियों से वापिस आते ही उनको पैसे वापिस मिल जाएंगे।


एडीसी के सामने नंबरदार और तत्कालीन तहसीलदार ने पैसे लेने की बात कबूली
इस मामले की जांच कर रहे एडीसी जेके अभीर ने इस मामले में दोनों पक्षों के बयान भी दर्ज किए। एडीसी को दिए गए बयानों में सज्जन नंबरदार ने माना है कि उसने वसीयत का इंतकाल करवाने के नाम पर 12 लाख रुपये लिए थे और 12 लाख रुपये तहसीलदार रामचंद्र को दे दिए थे। उसने आगे ये भी बताया है कि तहसीलदार को पैसे मिलने के बाद तत्कालीन डीआरओ राम सिंह ने सुरेश आदि के पक्ष में फैसला सुना दिया था।

लेकिन डीसी कोर्ट से खारिज हो गया। दूसरी ओर एडीसी के पास बयान दर्ज करवाने पहुंचे तत्कालीन तहसीलदार रामचंद्र ने अपने बयानों में ये कहा है कि उसने नंबरदार से ढाई लाख रुपये निजी तौर पर लिए थे क्योंकि उसकी बीवी की तबियत खराब थी। और ये ढाई लाख रुपये उसने वापस कर दिए थे। सुरेश की ओर से भी चार बयानों ने उनके सामने नंबरदार द्वारा पैसे लेने की बात कबूली है।



मेरे पास एडीसी की जांच रिपोर्ट के साथ कार्यवाही की सिफारिश थी। जिसके आधार पर आरोपी नंबरदार को बर्खास्त किया गया है। अगर इसमें अधिकारियों का रोल भी संदिग्ध है तो उनके खिलाफ भी जांच होगी। जांच को अभी पूरा नहीं माना जा सकता, जांच का दूसरा फेज भी होगा।
एनके सोलंकी, डीसी, फतेहाबाद ।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed