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फर्जी पासपोर्ट मामला: गैर-जिम्मेदाराना वेरिफिकेशन प्रक्रिया से सफल हुए आरोपी, मामलों में हुई बढ़ोतरी

Thu, 03 Feb 2022 12:45 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 03 Feb 2022 12:45 AM IST
सार

ऑनलाइन आवेदन में जानकारियां बदलने की प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती बनी है। नियमों में ढील से भी हाल ही में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।

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cases of fake passports are coming to the fore due to irresponsible verification process In Fatehabad
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक के बाद एक फर्जी पासपोर्ट के कई मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि इसके लिए पुलिस की गैर-जिम्मेदाराना वेरिफिकेशन प्रक्रिया को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पुलिस को ऑनलाइन मोड में दस्तावेज बदलने की प्रक्रिया भी चुनौती बनी हुई है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर रवि उर्फ नोनू के फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आने से पूर्व टोहाना में फर्जी पासपोर्ट के मामलों में दर्ज एफआईआर की जांच कर रही एसआईटी की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि जिले में बने फर्जी पासपोर्ट बनने के मामलों में या तो वेरिफिकेशन के लिए गवाहों को थाने में बुलाकर खानापूर्ति की गई अथवा पुलिस ने भरोसेमंद लोगों पर विश्वास कर रिपोर्ट बनाकर भेज दी।

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ऐसे में टोहाना में बने फर्जी पासपोर्ट के मामलों में तत्कालीन थाना मुंशी सहित कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी गई थी लेकिन प्रक्रिया में अभी भी बदलाव नहीं हो सका है। यदि प्रक्रिया में बदलाव किया गया होता तो रवि का फर्जी पासपोर्ट नहीं बनता।

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विशेषज्ञ बोले... पुलिस बरत रही बड़ी लापरवाही

एडवोकेट विनय शर्मा बताते हैं कि पासपोर्ट ही नहीं किसी भी कार्य के लिए वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को संबंधित थाने के पुलिसकर्मी को मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से संबंधित व्यक्ति के बारे में पड़ताल कर रिपोर्ट बनानी होती है लेकिन राज्य में पुलिस मौके पर पहुंचने के स्थान पर आवेदक को फोन कर अपनी मर्जी से अपने साथ दो गवाह के पहचान पत्र लाने के लिए कह देती है। यही सबसे बड़ी लापरवाही फर्जीवाड़े को जन्म देती है।

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ऑनलाइन आवेदन में फर्जी दस्तावेज अपलोड करने से बढ़ी चुनौती 

नाम न छापने की शर्त पर एक पासपोर्ट एजेंट ने बताया कि पहले पासपोर्ट का आवेदन ऑफलाइन होता था। ऐसे में कई जरूरी दस्तावेजों की मौके पर ही जांच हो जाती थी। हालांकि अब ऑनलाइन प्रक्रिया में दस्तावेज स्कैन कर अपलोड कर दिए जाते हैं। इसके बाद पुलिस के पास वेरिफिकेशन के लिए पत्र जाता है। पुलिस किसी दस्तावेज की जांच न कर आवेदक को खुद ही थाने बुलाकर वेरिफिकेशन रिपोर्ट भेज देती है। 

आधार कार्ड में बदलाव करने का प्रावधान भी चिंताजनक 

ऑनलाइन प्रक्रिया में सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बात यह भी है कि आधार कार्ड जैसे आईडी प्रूफ में समय-समय पर बदलाव करवाने का प्रावधान है। इसके अलावा कई लोग खुद ही दस्तावेज पर अपना नाम बदलकर वेरिफिकेशन को प्रभावित करने में कामयाब हो जाते हैं।

हैंडलर के पासपोर्ट की वेरिफिकेशन में लापरवाही की जांच जारी

आतंकी संगठन के हैंडलर रवि उर्फ नोनू के सदर थाना क्षेत्र के गांव अहरवां के पते पर बने फर्जी पासपोर्ट की वेरिफिकेशन में लापरवाही की जांच भी पुलिस कर रही है। पिछले वर्ष 2021 में फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आने पर किस पुलिस अधिकारी ने दस्तावेजों की जांच कैसे की? और जांच में क्या लापरवाही बरती? इसे भी जांच में शामिल किया जा रहा है। 

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