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फर्जी फर्म बनाकर टैक्स चोरी के मामले में 21 साल बाद सात फर्मों से हुई 25 लाख की रिकवरी

Sat, 01 Jun 2019 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 01 Jun 2019 12:15 AM IST
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फर्जी फर्म बनाकर टैक्स चोरी के मामले में 21 साल बाद सात फर्मों से हुई 25 लाख की रिकवरी
फतेहाबाद। करीब 21 साल पहले फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी करने के मामले में दबी फाइलों की परतें खुलने लगी हैं। इन फर्जी फर्मों पर साल 1997 में सौ करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी बिल काटने का आरोप है। इस मामले में इन फर्मों पर पांच करोड़ से अधिक की सेल टैक्स चोरी का मामला बनता था। इस मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग ने अब बैंक खाते अटैच करके 21 लाख रुपये की रिकवरी की है। हालांकि विभाग इन फर्जी फर्मों के मालिकों से पांच करोड़ रुपये की सेल टैक्स चोरी की रिकवरी की मांग कर रहा है। विभाग अब इस दौरान इनकी बेची गई संपत्ति की जानकारी जुटा रहा है ताकि इसे कुर्क करके बकाया राशि प्राप्त की जा सके।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार फतेहाबाद में वर्ष 1993-94 में कई लोगों ने बोगस फर्में बनाकर ऑयल के फर्जी कारोबार दिखाकर बिल काट दिए थे। ये लोग अपनी फर्मों के बिल काटकर व्यापारियों से टैक्स वसूल लेते थे और स्वयं हड़प जाते थे। जबकि ये बिल फर्जी होते थे और नियमानुसार विभाग को टैक्स जमा ही नहीं करवाया जाता था। उस दौरान इन सात फर्मों ने 100 करोड़ से अधिक की बिलिंग दिखाकर विभाग को 5 करोड़ 11 लाख 13 हजार 920 रुपये की टैक्स चोरी की। विभाग को जब इसका पता चला तो उन्होंने खाता खंगाला तो इतनी ही राशि ही की डिमांड निकाल दी। विभाग की मानें तो ये घोटाला 1988 से चला आ रहा था। दबी जुबान में तो यहां तक कहा जा रहा है कि तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इन फाइलों को दबा दिया गया। उस समय के ज्वाइंट कमिश्नर आर एल गर्ग ने इसकी जांच सीबीआई के पास भेजने की भी गुहार लगाई थी। तब 11 मार्च 1997 को विभाग ने सात फर्मों के खिलाफ जालसाजी, षडयंत्र, सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज करवा दिया। मामला यही दबा रहा। 12 साल बाद 2009 में इस केस के खिलाफ सभी फर्में स्थानीय न्यायालय पहुंची और आपराधिक धाराओं से छूट की मांग की। कोर्ट ने उस समय आदेश दिया कि इन सभी फर्मों से तुरंत वसूली की जाए। लेकिन इसके दस साल बाद भी फाइलें फिर दफ्तरों की दराजों के अंदर दफन हो गई। अब विभाग ने इनके खाते अटैच कर बैंकों से 12 लाख की रिकवरी की है। विभाग के अनुसार इन फर्जी फर्मों ने उस समय खरीदी हुई संपति बेच दी या किसी के नाम करवा दी। विभाग की नजर अब उन पर है। इन संपत्ति की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि इन संपतियों को कुर्क करवा विभाग की रिकवरी पूरी की जा सके। इस संदर्भ में विभाग को प्रदेश सरकार की अनुमति मिल चुकी है।
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ये हैं आरोपी फर्में
1. शिव ऑयल फैक्टरी
2. लार्ड कृष्णा फैक्टरी
3. बंसल इंटरप्राइजेज
4. हजारी लाल एंड संस
5. लीलाकृष्ण सतीश कुमार
6. हरियाणा कार्पोरेशन
7. दीपू सेल्स कार्पोरेशन
वर्जन
1990 से 97 तक यहां अनेक ऐसी फर्में थीं जो फर्जी बिल काटने का ही धंधा करती थी। असल में इनका कोई कारोबार नहीं था बल्कि टैक्स चोरी से सरकार को नुकसान पहुंचाते रहे। इनका काम सिर्फ पेपर बिलिंग था। कागजों में ही ये धंधा दिखाते थे। इन पर पांच करोड़ 11 लाख 13 हजार 220 रुपये रिकवरी बनती है। 25 लाख की रिकवरी विभाग ने 29 मई 2019 को कर ली है, शेष रिकवरी भी जल्द की जाएगी।
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- वीके शास्त्री, जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त, फतेहाबाद।
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