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डबल मर्डर के आरोपियों की गिरफ्तारी ना होने से गुस्साए ग्रामीणों का सचिवालय पर हंगामा, पुलिस से झड़प, धरना
Updated Fri, 04 May 2018 12:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
गोरखपुर में बीती 23 अप्रैल को दामाद द्वारा ससुराल में घुसकर अपनी सास व चाची सास की हत्या करने के मामले में आरोपी दामाद के बाकी परिजनों की गिरफ्तारी नहीं होने से गुस्साए सैकड़ों ग्रामीणों ने वीरवार सुबह लघु सचिवालय में जमकर हंगामा किया। इस दौरान गोरखपुर के ग्रामीणों ने जबरदस्ती सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास किया जिसके चलते उन्हें रोकने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों से ग्रामीणों की 15 मिनट तक झड़प भी हुई। पुलिसकर्मियों ने डंडों की मदद से दीवार बनाकर ग्रामीणों को रोकने का प्रयास किया जिसके जवाब में ग्रामीणों ने भी पुलिसकर्मियों को धक्के दिए। कुछ देर के लिए हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे लेकिन बाद में ग्रामीणों में मौजूद कुछ बुजुर्गों ने हंगामा कर रहे युवाओं व बाकी ग्रामीणों को समझाकर वहीं बिठा लिया। इतने हंगामे के बाद उनकी बात सुनने पहुंचे पुलिस कप्तान दीपक सहारन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि एक हफ्ते में बाकी आरोपियों को शामिल जांच करवा लिया जाएगा और इस मामले का ‘लॉजिकल एंड’ कर दिया जाएगा। एसपी के संबोधन के दौरान भी कुछ युवाओं ने उनपर टीका-टिप्पणी कर दी जिस पर एकबारगी एसपी भी उखड़ गए लेकिन बाद में संभलते हुए उन्होंने ग्रामीणों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया।
एसपी के न आने से नाराज हो गए ग्रामीण
23 अप्रैल के गोरखपुर हत्याकांड मामले में पुलिस की ढिलाई से त्रस्त ग्रामीण एसपी दीपक सहारन से मिलने सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान पहले से वहां मौजूद सिटी एसएचओ सुरेंद्र कंबोज व खुफिया विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को एसपी से जल्द मिलाने का आश्वासन देकर सभी ग्रामीणों को सचिवालय के पार्क में बिठा दिया। उधर एसपी चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने में व्यस्त थे। इस बीच लगभग एक घंटे तक भी जब एसपी सहारन उनसे मिलने नहीं पहुंचे तो भीड़ में मौजूद युवा नारेबाजी करते हुए पार्क से बाहर निकलने लगे। सिटी एसएचओ कंबोज व अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का असफल प्रयास किया। इस बीच जब पार्क से निकलकर ग्रामीण सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे तो एक बार फिर पुलिस ने डंडो की मदद से एक मजबूत घेरा बना लिया और इसी दौरान ही पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे को धक्के भी दिए।
ग्रामीणों ने परिवार के बाकी सदस्यों को बताया जान का खतरा
सचिवालय के गेट के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीणों से मिलने पहुंचे एसपी दीपक सहारन के सामने ग्रामीणों हंसराज सिवाच, विजेंद्र सिवाच जिप पार्षद, सतबीर, बलराज आदि ने पीड़ित परिवार के बाकी सदस्यों की जान को भी खतरा बताया। ग्रामीण हंसराज सिवाच ने कहा कि आरोपी बार-बार ये धमकी दे रहा था कि इस परिवार के तीन और लोगों को मारूंगा। ऐसे में पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ है। इस पर एसपी सहारन ने तुरंत भूना एसएचओ को निर्देश देकर परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने को कहा।
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यह है मामला
गत 23 अप्रैल को हिसार निवासी रिटायर्ड फौजी देवेंद्र ने गोरखपुर गांव में स्थित अपनी ससुराल में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस फायरिंग में उसकी सास मनपति देवी और चाची सास केलादेवी की मौत हो गई थी। आरोपी देवेंद्र ने मायके में रह रही अपनी पत्नी सुनीता पर भी गोली चलाने का प्रयास किया लेकिन उसकी किस्मत अच्छी निकली और वह छत के रास्ते निकल भागी। बाद में पुलिस की तीन घंटे की मशक्कत के बाद उसने सरेंडर कर दिया था। उसका कहना था कि 20 मार्च को उसके ससुरालियों ने गांव गोरखपुर में ही उसकी पिटाई कर दी थी जिसके बाद से उसने इसका बदला लेने की ठान ली थी और इसी के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने ग्रामीणों के दबाव के बाद आरोपी देवेंद्र के साथ साथ उसके भाई, भाभी, मां और बहन के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। लेकिन इस केस में देवेंद्र के अलावा अभी तक किसी की गिरफ्तारी ना होने से ही गांव गोरखपुर के ग्रामीण वीरवार को भड़के हुए थे।
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फतेहाबाद।
गोरखपुर में बीती 23 अप्रैल को दामाद द्वारा ससुराल में घुसकर अपनी सास व चाची सास की हत्या करने के मामले में आरोपी दामाद के बाकी परिजनों की गिरफ्तारी नहीं होने से गुस्साए सैकड़ों ग्रामीणों ने वीरवार सुबह लघु सचिवालय में जमकर हंगामा किया। इस दौरान गोरखपुर के ग्रामीणों ने जबरदस्ती सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास किया जिसके चलते उन्हें रोकने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों से ग्रामीणों की 15 मिनट तक झड़प भी हुई। पुलिसकर्मियों ने डंडों की मदद से दीवार बनाकर ग्रामीणों को रोकने का प्रयास किया जिसके जवाब में ग्रामीणों ने भी पुलिसकर्मियों को धक्के दिए। कुछ देर के लिए हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे लेकिन बाद में ग्रामीणों में मौजूद कुछ बुजुर्गों ने हंगामा कर रहे युवाओं व बाकी ग्रामीणों को समझाकर वहीं बिठा लिया। इतने हंगामे के बाद उनकी बात सुनने पहुंचे पुलिस कप्तान दीपक सहारन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि एक हफ्ते में बाकी आरोपियों को शामिल जांच करवा लिया जाएगा और इस मामले का ‘लॉजिकल एंड’ कर दिया जाएगा। एसपी के संबोधन के दौरान भी कुछ युवाओं ने उनपर टीका-टिप्पणी कर दी जिस पर एकबारगी एसपी भी उखड़ गए लेकिन बाद में संभलते हुए उन्होंने ग्रामीणों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया।
एसपी के न आने से नाराज हो गए ग्रामीण
23 अप्रैल के गोरखपुर हत्याकांड मामले में पुलिस की ढिलाई से त्रस्त ग्रामीण एसपी दीपक सहारन से मिलने सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान पहले से वहां मौजूद सिटी एसएचओ सुरेंद्र कंबोज व खुफिया विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को एसपी से जल्द मिलाने का आश्वासन देकर सभी ग्रामीणों को सचिवालय के पार्क में बिठा दिया। उधर एसपी चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने में व्यस्त थे। इस बीच लगभग एक घंटे तक भी जब एसपी सहारन उनसे मिलने नहीं पहुंचे तो भीड़ में मौजूद युवा नारेबाजी करते हुए पार्क से बाहर निकलने लगे। सिटी एसएचओ कंबोज व अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का असफल प्रयास किया। इस बीच जब पार्क से निकलकर ग्रामीण सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे तो एक बार फिर पुलिस ने डंडो की मदद से एक मजबूत घेरा बना लिया और इसी दौरान ही पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे को धक्के भी दिए।
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ग्रामीणों ने परिवार के बाकी सदस्यों को बताया जान का खतरा
सचिवालय के गेट के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीणों से मिलने पहुंचे एसपी दीपक सहारन के सामने ग्रामीणों हंसराज सिवाच, विजेंद्र सिवाच जिप पार्षद, सतबीर, बलराज आदि ने पीड़ित परिवार के बाकी सदस्यों की जान को भी खतरा बताया। ग्रामीण हंसराज सिवाच ने कहा कि आरोपी बार-बार ये धमकी दे रहा था कि इस परिवार के तीन और लोगों को मारूंगा। ऐसे में पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ है। इस पर एसपी सहारन ने तुरंत भूना एसएचओ को निर्देश देकर परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने को कहा।
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यह है मामला
गत 23 अप्रैल को हिसार निवासी रिटायर्ड फौजी देवेंद्र ने गोरखपुर गांव में स्थित अपनी ससुराल में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस फायरिंग में उसकी सास मनपति देवी और चाची सास केलादेवी की मौत हो गई थी। आरोपी देवेंद्र ने मायके में रह रही अपनी पत्नी सुनीता पर भी गोली चलाने का प्रयास किया लेकिन उसकी किस्मत अच्छी निकली और वह छत के रास्ते निकल भागी। बाद में पुलिस की तीन घंटे की मशक्कत के बाद उसने सरेंडर कर दिया था। उसका कहना था कि 20 मार्च को उसके ससुरालियों ने गांव गोरखपुर में ही उसकी पिटाई कर दी थी जिसके बाद से उसने इसका बदला लेने की ठान ली थी और इसी के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने ग्रामीणों के दबाव के बाद आरोपी देवेंद्र के साथ साथ उसके भाई, भाभी, मां और बहन के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। लेकिन इस केस में देवेंद्र के अलावा अभी तक किसी की गिरफ्तारी ना होने से ही गांव गोरखपुर के ग्रामीण वीरवार को भड़के हुए थे।