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भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में गोसेवा का है विशेष महत्व : मधु
Fri, 12 Dec 2025 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 12 Dec 2025 11:43 PM IST
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भूना।नाढोड़ी गांव में श्री धेनु मानस गोकथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद
भूना। श्रीकृष्ण गोशाला सेवा समिति नाढोड़ी के तत्वावधान में चल रही धेनु मानस गोकथा के तीसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक डॉ. मधु बिश्नोई ने गोमाता की महिमा को भावपूर्ण तरीके से वर्णित करते हुए कहा कि गोमाता केवल धर्म का आधार नहीं, बल्कि मानवता का संवाहक स्वरूप हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में गोसेवा का विशेष महत्व रहा है, जो आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जीव-जंतुओं की हत्या कर उनके मांस से अपनी जीविका या स्वाद की पूर्ति करता है, वह पापकर्म का भागी होता है। ऐसा व्यक्ति नरक का भाग्य लिखकर आता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। उनके अनुसार ऐसे पापी की आत्मा युगों-युगों तक भटकती रहती है।
डॉ. बिश्नोई ने कहा कि गुरु जंभेश्वर भगवान ने बिश्नोई समाज को जीव रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। इसी कारण बिश्नोई समाज आज भी जीवों और पेड़-पौधों की रक्षा में अपना जीवन तक दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटता। वहीं कथा स्थल पर सुबह से ही वातावरण भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
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इस अवसर पर व्यासपीठ का पूजन आत्माराम गिला, नत्थूराम धारनिया, हिमताराम पूनिया, संतोख भांभू, कृष्ण लाल, रामनिवास भांभू हसंगा, प्रियंका देवी, शर्मिला देवी, लखपति, बिरखा देवी, पतासो देवी व भगवती देवी द्वारा किया गया। इसके बाद कथावाचक को तिलक लगाकर उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
कथा के दौरान समिति के प्रधान फकीरचंद गोदारा, पूर्व सरपंच रविंद्र कुमार धारनिया, गोशाला के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह भांभू, महेंद्र सिंह, संजय कुमार खिचड़ सहित बड़ी संख्या में समिति सदस्य और ग्रामीण कथा स्थल पर उपस्थित रहे।
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भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में गोसेवा का विशेष महत्व रहा है, जो आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जीव-जंतुओं की हत्या कर उनके मांस से अपनी जीविका या स्वाद की पूर्ति करता है, वह पापकर्म का भागी होता है। ऐसा व्यक्ति नरक का भाग्य लिखकर आता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। उनके अनुसार ऐसे पापी की आत्मा युगों-युगों तक भटकती रहती है।
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डॉ. बिश्नोई ने कहा कि गुरु जंभेश्वर भगवान ने बिश्नोई समाज को जीव रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। इसी कारण बिश्नोई समाज आज भी जीवों और पेड़-पौधों की रक्षा में अपना जीवन तक दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटता। वहीं कथा स्थल पर सुबह से ही वातावरण भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
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इस अवसर पर व्यासपीठ का पूजन आत्माराम गिला, नत्थूराम धारनिया, हिमताराम पूनिया, संतोख भांभू, कृष्ण लाल, रामनिवास भांभू हसंगा, प्रियंका देवी, शर्मिला देवी, लखपति, बिरखा देवी, पतासो देवी व भगवती देवी द्वारा किया गया। इसके बाद कथावाचक को तिलक लगाकर उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
कथा के दौरान समिति के प्रधान फकीरचंद गोदारा, पूर्व सरपंच रविंद्र कुमार धारनिया, गोशाला के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह भांभू, महेंद्र सिंह, संजय कुमार खिचड़ सहित बड़ी संख्या में समिति सदस्य और ग्रामीण कथा स्थल पर उपस्थित रहे।