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कोरोना से शैक्षणिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न, सिलेबस कम करना सरकार की राहतभरी पहल

Sat, 05 Sep 2020 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 11:36 PM IST
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Course dhort commendable
कोरोना के चलते शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गई है। स्कूलों के लाखों विद्यार्थी शिक्षा के लिए महज ऑनलाइन विकल्पों पर आश्रित रह गए हैं। ऐसे में पिछले लंबे समय से इस बात को चर्चा छिड़ी हुई थी कि पढ़ाई ऑनलाइन करवाने के बाद अब परीक्षाओं का स्वरूप क्या होगा। इस पर बीते दिन प्रदेश सरकार ने स्थिति साफ करने का प्रयास करते हुए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को शामिल करने एवं नौंवी से बारहवीं तक का सिलेबस 30 प्रतिशत तक कम करने की बात कही है। अमर उजाला’ ने इस संदर्भ में जिले के अध्यापकों व प्रिंसिपलों से बात कर ये जानने का प्रयास किया कि आखिर सरकार के इस कदम को वो किस रूप में देखते हैं।
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‘वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल करना और सिलेबस को कम करना फिलहाल मौजूदा परिस्थितियों में सबसे श्रेष्ठ विकल्प था जिसे सरकार लागू करने जा रही है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अनेक बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो सकी है तकनीकी कारणों या अन्य कारणों के चलते। इस ओर भी सरकार ध्यान दे और संभव हो तो बच्चों को फेल करने से बचना चाहिए।’ -दीपिका झांब, प्रिंसिपल, आर्यभट्ट पब्लिक स्कूल फतेहाबाद ।
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‘निश्चित तौर पर सरकार के इस कदम से लाखों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। इस बार टॉपर्स सूची जारी करने की बजाए सरकार को सभी को एक समान करने का प्रयास करना चाहिए। किसी के पास मोबाइल सही नहीं तो किसी के पास इंटरनेट की दुविधा भी रही। ऐसे में सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।’ -सेवा सिंह मुआल, शिक्षक, सरकारी स्कूल, धिड़ गांव ।
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‘प्रतियोगी परीक्षाओं को इस बार सिलेबस का आधार बनाए जाने के बारे में जानकारी मिली है। अगर इसे लागू किया जाता है तो बच्चों को समय से पहले ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सकेगा। आगे जाकर उन्हें रोजगार व नौकरी के लिए इधर-इधर परेशान नहीं होना पड़ेगा। सिलेबस को कम करने का फैसला मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार बहुत सही है।’ -रण सिंह रेपसवाल, प्रिंसिपल, शांति निकेतन पब्लिक स्कूल, ढिंगसरा ।

‘परीक्षा में विद्यार्थियों को राहत पहुंचाने के लिए बहुविकल्पीय प्रश्नों की संख्या बढ़ाने के बारे में आज पता चला है। वैसे तो इससे परीक्षार्थी की सही क्षमता का पता नहीं चल पाता, लेकिन इस समय के जो हालात हैं, उसके अनुसार तो ये सही कदम है। लेकिन सरकार को ये भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि अगर स्कूलों को 30 सितंबर के बाद भी बंद रखा जाता है तो विद्यार्थियों को और भी राहत देनी पड़ सकती है।’ -कृष्ण कुमार, प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गांव बीघड़ ।
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