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Fatehabad News: भाजपा के बाद बगावत की आग की लपटों से बच नहीं पाएगी कांग्रेस
Sun, 08 Sep 2024 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 08 Sep 2024 01:00 AM IST
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फतेहाबाद। टिकट वितरण के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरह ही कांग्रेस में भी बगावत के आसार बन रहे हैं। फतेहाबाद विधानसभा से 19 दावेदारों ने पार्टी की टिकट पाने के लिए आवेदन किया हुआ है। इनमें तीन पूर्व विधायक और दो प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। कई दावेदारों ने तो टिकट पाने की चाहत में दिल्ली में ही डेरा डाला हुआ है। अधिकांश दावेदार अपने-अपने आकाओं के समर्थन से टिकट पाने की जुगत में हैं।गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पाने के लिए पिछले दिनों पार्टी की ओर से आवेदन मांगे गए थे। फतेहाबाद विधानसभा सीट से 19 दावेदारों ने टिकट के लिए हाईकमान के समक्ष आवेदन किया है। दावेदारों में से कोई पार्टी के प्रति लंबे समय से वफादारी तो कोई पीढि़यों से पार्टी से जुड़े होने के नाम पर टिकट मांग रहा है। जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला तीनों गुट में नेता हैं। मगर सबसे प्रभावी हुड्डा और सैलजा गुट ही है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर किसी बड़े नेता ने कांग्रेस से बगावत कर दी तो चुनाव जीतने की राह बेहद मुश्किल हो जाएंगी क्योंकि सामने भाजपा से अनुभवी और मजबूत उम्मीदवार दुड़ाराम हैं। यदि उनको हराना है, तो कांग्रेस की एकजुटता ज्यादा जरूरी रहेगी।
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इन नेताओं को सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ना जरूरी
विशेष बात यह है कि प्रमुख तीन दावेदारों के पास अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए चुनाव लड़ना बेहद जरूरी हो गया है। इनमें पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा और डॉ. वीरेंद्र सिवाच शामिल हैं। डॉ. वीरेंद्र ने साल 2019 का चुनाव जजपा की टिकट पर लड़ा था और 74 हजार से अधिक वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वह मात्र 3300 वोटों से विधायक बनने से चूक गए थे। फिर से दांव लगाकर डॉ. सिवाच विधानसभा की सीढि़यां चढ़ने की ललक रखे हुए हैं।
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पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थे। मगर वह तीसरे नंबर पर रहे थे। इससे पहले 2014 में भी उनको हार झेलनी पड़ी थी। इस कारण गिल्लाखेड़ा इस बार जीत का स्वाद चखने के मूड में हैं। वहीं, बलवान सिंह दौलतपुरिया ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मगर पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिल पाई। इस कारण वह साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ सके। इसके बाद उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आस्था जताई। अब फिलहाल वे कुमारी सैलजा गुट के प्रमुख नेता हैं।
सिरसा लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर कुमारी सैलजा बड़े मार्जिन से जीतकर सांसद बनी हैं। ऐसे में बलवान सिंह दौलतपुरिया सैलजा के जरिये टिकट पाने का दांव लगा रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछला चुनाव नहीं लड़ने के कारण और सियासत बचाए रखने के लिए उनका इस बार चुनाव लड़ना जरूरी हो गया है।
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ये हैं फतेहाबाद से कांग्रेस टिकट के 19 दावेदार
फतेहाबाद सीट से टिकट पाने के लिए पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व विधायक कुलबीर बैनीवाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डॉ. विनीत पूनियां, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन पोटलिया, वरिष्ठ नेता डॉ. वीरेंद्र सिवाच, युवा नेता आनंदवीर गिल्लाखेड़ा, पूर्व गृहमंत्री मनीराम गोदारा के पौत्र सुधीर गोदारा, मुकेश प्रजापति, सुभाष बिश्नोई, महिला नेत्री चितवन गोदारा व डॉ. ऊषा दहिया, माधोराम गोदारा, सीताराम बैनीवाल, राजबीर सोनी, अमित दलाल, अनिल ज्याणी, अश्विनी चौधरी व अमन ढिल्लो ने कांग्रेस की टिकट के लिए आवेदन किया हुआ है।
कांग्रेस में भी बगावत के आसार रहेंगे। बड़े नेताओं के सामने चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, अन्यथा उनकी सियासी जमीन खिसक जाएगी। एकजुटता बनाए रखने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व कुमारी सैलजा को गंभीरता से प्रयास करने होंगे।
अर्जुन सिंह, राजनीतिक विशेषज्ञ
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राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर किसी बड़े नेता ने कांग्रेस से बगावत कर दी तो चुनाव जीतने की राह बेहद मुश्किल हो जाएंगी क्योंकि सामने भाजपा से अनुभवी और मजबूत उम्मीदवार दुड़ाराम हैं। यदि उनको हराना है, तो कांग्रेस की एकजुटता ज्यादा जरूरी रहेगी।
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इन नेताओं को सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ना जरूरी
विशेष बात यह है कि प्रमुख तीन दावेदारों के पास अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए चुनाव लड़ना बेहद जरूरी हो गया है। इनमें पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा और डॉ. वीरेंद्र सिवाच शामिल हैं। डॉ. वीरेंद्र ने साल 2019 का चुनाव जजपा की टिकट पर लड़ा था और 74 हजार से अधिक वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वह मात्र 3300 वोटों से विधायक बनने से चूक गए थे। फिर से दांव लगाकर डॉ. सिवाच विधानसभा की सीढि़यां चढ़ने की ललक रखे हुए हैं।
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पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थे। मगर वह तीसरे नंबर पर रहे थे। इससे पहले 2014 में भी उनको हार झेलनी पड़ी थी। इस कारण गिल्लाखेड़ा इस बार जीत का स्वाद चखने के मूड में हैं। वहीं, बलवान सिंह दौलतपुरिया ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मगर पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिल पाई। इस कारण वह साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ सके। इसके बाद उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आस्था जताई। अब फिलहाल वे कुमारी सैलजा गुट के प्रमुख नेता हैं।
सिरसा लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर कुमारी सैलजा बड़े मार्जिन से जीतकर सांसद बनी हैं। ऐसे में बलवान सिंह दौलतपुरिया सैलजा के जरिये टिकट पाने का दांव लगा रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछला चुनाव नहीं लड़ने के कारण और सियासत बचाए रखने के लिए उनका इस बार चुनाव लड़ना जरूरी हो गया है।
ये हैं फतेहाबाद से कांग्रेस टिकट के 19 दावेदार
फतेहाबाद सीट से टिकट पाने के लिए पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व विधायक कुलबीर बैनीवाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डॉ. विनीत पूनियां, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन पोटलिया, वरिष्ठ नेता डॉ. वीरेंद्र सिवाच, युवा नेता आनंदवीर गिल्लाखेड़ा, पूर्व गृहमंत्री मनीराम गोदारा के पौत्र सुधीर गोदारा, मुकेश प्रजापति, सुभाष बिश्नोई, महिला नेत्री चितवन गोदारा व डॉ. ऊषा दहिया, माधोराम गोदारा, सीताराम बैनीवाल, राजबीर सोनी, अमित दलाल, अनिल ज्याणी, अश्विनी चौधरी व अमन ढिल्लो ने कांग्रेस की टिकट के लिए आवेदन किया हुआ है।
कांग्रेस में भी बगावत के आसार रहेंगे। बड़े नेताओं के सामने चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, अन्यथा उनकी सियासी जमीन खिसक जाएगी। एकजुटता बनाए रखने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व कुमारी सैलजा को गंभीरता से प्रयास करने होंगे।
अर्जुन सिंह, राजनीतिक विशेषज्ञ