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लैब में धूल फांक रहे कंप्यूटर, एन कंप्यूटरिंग भी फेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 10:06 PM IST
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Computers gathering dust in the lab, n computering also failed
फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कंप्यूटर का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। विद्यार्थियों को कंप्यूटर ज्ञान देने के लिए 11 साल पहले वर्ष 2011 में एनसीटी यानी इंफोरमेशन कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की तरफ से लैब शुरू की गई थी। सरकार की लापरवाही और सिस्टम की मार के चलते 90 फीसदी स्कूलों में योजना फेल हो गई है। कंप्यूटरों पर धूल चढ़ी हुई है तो इन्हें चलाने के लिए साथ भेजे गए बैटरियां और जनरेटर भी काम करना छोड़ चुके हैं।
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वजह ये ही है कि 11 साल पहले आईसीटी स्कीम के तहत स्कूलों में जो कंप्यूटर लैब शुरू की गई थी, उन्हें एक बार भी संभाला तक नहीं किया गया है। शिक्षा विभाग ने आईसीटी की तरफ से चल रही लैब के लिए बजट तक जारी नहीं किया गया। वर्ष 2011 में शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए किताबें जारी की थी, इसके बाद किताबें ही नहीं भेजी गई है। इन हालातों के कारण सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर ज्ञान दिया ही नहीं जा रही है। कंप्यूटर कक्षा का पीरियड भी तय नहीं किया गया है। संवाद
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एन कंप्यूटरिंग हुई फेल, सिस्टम पर चढ़ी धूल
शिक्षा विभाग ने लैब में दो सीपीयू और 24 एलसीडी भेजी थी। एक सीपीयू से एन कंप्यूटरिंग के जरिये 11-11 कंप्यूटरों को जोड़ा गया। कंप्यूटरों की समय पर विंडो न होने और नेटवर्किंग तारों को न बदले जाने के कारण एन कंप्यूटरिंग भी फेल हो चुकी है। फिलहाल हालात ये है कि करीब 90 फीसदी स्कूलों में सिस्टम पर धूल चढ़ी हुई है। 10 फीसदी ही स्कूल ऐसे हैं जो अपने स्तर पर कंप्यूटरों की मरम्मत करवा रहे हैं।
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लाखों रुपये के ऑटोमैटिक जनरेटर भी हुए फेल
कंप्यूटर लैब जिन स्कूलों में शुरू की गई वहां पर विभाग ने साथ में ऑटोमैटिक जनरेटर भी भेजे गए थे। इन जनरेटर के लिए 2013 में पांच-पांच हजार रुपये तेल के लिए बजट दिया गया लेकिन इसके बाद तेल के लिए और न ही मरम्मत के लिए बजट जारी हुआ। सर्विस न होने के चलते जनरेटर भी काम करना छोड़ चुके हैं। इसके अलावा कंप्यूटर लैब में बैटरियां भी भेजी गई, जो कि अब खराब हो चुकी हैं।
स्कूलों को मिले थे 25-25 कंप्यूटर
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2011 में हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू की थी। मिडिल और हाई स्कूलों को 25-25 कंप्यूटर दिए गए थे। इसके अलावा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को 50-50 कंप्यूटर दिए गए। 25 कंप्यूटरों के साथ एक लैब शुरू हुई थी। जिले में फिलहाल लैब संभालने के लिए 115 कंप्यूटर शिक्षक और 95 लैब अटेंडेंट हैं।
जिले में स्कूलों की स्थिति
खंड स्कूल
फतेहाबाद 165
भट्टू 68
भूना 85
जाखल 52
रतिया 144
टोहाना 109
कोट
कंप्यूटर लैब के लिए शिक्षा विभाग ने 11 साल से लैब के लिए बजट नहीं दिया है। हालात ये हैं कि कई स्कूलों में सिस्टम खराब हो चुके है। स्कूल अपने स्तर पर लैब चलाने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विभाग से मांग भी है कि कंप्यूटर को जरूरी विषय में शामिल किया जाए।

- हरविंद्र सिंह, जिला प्रधान कंप्यूटर लैब अटेंडेंट यूनियन
कोट
कंप्यूटर लैब में मरम्मत के लिए कितना बजट चाहिए और किन-किन चीजों की जरूरत है, इसको लेकर स्कूल डिमांड नहीं भेज रहे है। अगर स्कूल डिमांड भेजे तो निदेशालय में भेजी जाएगी। ये बात यही है कि कई स्कूलों में सिस्टम नहीं चल रहे हैं।
-दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी

फतेहाबाद के सरकारी स्कूल की लैब में बंद पड़े कम्प्यूटर सिस्टम।

फतेहाबाद के सरकारी स्कूल की लैब में बंद पड़े कम्प्यूटर सिस्टम।- फोटो : Fatehabad

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