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गरीबों के लिए आया गेहूं बेचने पर जाम
fatehabad
Updated Fri, 30 May 2014 11:45 PM IST
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गांव में पिछले कई महीनों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला गेहूं पात्र लोगों को नहीं मिल रहा था। इससे लोग बार-बार डिपो होल्डरों के चक्कर लगा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि डिपो होल्डर इसे खुले बाजार में बेच देते हैं। शुक्रवार दोपहर गांव से टाटा एस गाड़ी में 40 कट्टे गेहूं के भरे हुए ले जाए जा रहे थे।
यह गाड़ी गांव से फतेहाबाद जा रही थी। इस पर गांव के लेखराज, भगवानदास, मदन लाल और मंगलाराम इत्यादि को शक हुआ तो उन्होंने गाड़ी का पीछा किया और दौलतपुर के पास गाड़ी रुकवा ली। गाड़ी चालक से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह गेहूं गांव के डिपो होल्डर मुंशी राम और प्यारे लाल का है और फतेहाबाद ले जा रहा है। इस पर ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और दोनों डिपोधारक भी मौके पर आ गए। ग्रामीणों ने बीच-बचाव करके फैसला किया कि पकड़े गए पूरे गेहूं को गुरुद्वारे में दान कर दिया जाए।
इस पर दोनों पक्षों में सहमति बन गई, लेकिन जैसे ही गाड़ी वापिस गांव पहुंची तो उससे पहले ही डिपो होल्डर मुंशी राम ने इस गेहूं को अपने घर में उतरवा लिया। इस बात की भनक जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया और गांव के बस स्टैंड पर जाम लगाकर खूब बवाल काटा। मौका संभालने के लिए पुलिस के कुछ कर्मचारी वहां पहुंचे लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। समाचार लिखे जाने तक जाम लगा रहा था।
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यह गाड़ी गांव से फतेहाबाद जा रही थी। इस पर गांव के लेखराज, भगवानदास, मदन लाल और मंगलाराम इत्यादि को शक हुआ तो उन्होंने गाड़ी का पीछा किया और दौलतपुर के पास गाड़ी रुकवा ली। गाड़ी चालक से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह गेहूं गांव के डिपो होल्डर मुंशी राम और प्यारे लाल का है और फतेहाबाद ले जा रहा है। इस पर ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और दोनों डिपोधारक भी मौके पर आ गए। ग्रामीणों ने बीच-बचाव करके फैसला किया कि पकड़े गए पूरे गेहूं को गुरुद्वारे में दान कर दिया जाए।
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इस पर दोनों पक्षों में सहमति बन गई, लेकिन जैसे ही गाड़ी वापिस गांव पहुंची तो उससे पहले ही डिपो होल्डर मुंशी राम ने इस गेहूं को अपने घर में उतरवा लिया। इस बात की भनक जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया और गांव के बस स्टैंड पर जाम लगाकर खूब बवाल काटा। मौका संभालने के लिए पुलिस के कुछ कर्मचारी वहां पहुंचे लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। समाचार लिखे जाने तक जाम लगा रहा था।
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