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Fatehabad News: विद्यार्थी परिवहन योजना के लिए नहीं मिला बजट
Sat, 27 Apr 2024 05:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 27 Apr 2024 05:36 AM IST
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जनवरी में विद्यार्थी परिवहन योजना का शुभारंभ करते अधिकारी।
विपिन चावला
रतिया। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दी गई परिवहन सुविधा दो महीने में ही बंद हो गई है। चालीस लाख रुपये का बजट नहीं आने के चलते विद्यार्थी परिवहन योजना बीच में ही लटक गई है। 31 मार्च के बाद से वाहनचालकों ने अपने वाहन भेजने बंद कर दिए हैं।
जिले में शिक्षा विभाग ने रतिया क्षेत्र के 34 सरकारी स्कूलों में इस योजना को जनवरीमें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था। विधायक लक्ष्मण नापा व अधिकारियों द्वारा स्कूलों से झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया गया था। मगर दो महीने के बाद ही बजट अटकने से योजना ठप हो गई। शिक्षा विभाग बजट व स्कूलों के बैंक खाता खुलने में देरी को वजह बता रहा है।प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के इरादे से प्राइवेट स्कूलों के बराबर सुविधा देने के लिए कॉन्वेंट स्कूलों की तरह मॉडल संस्कृति स्कूल व पीएमश्री स्कूलों को खोला गया।
वहीं, जनवरी में सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट स्कूलों की तरह विद्यार्थियों को परिवहन सुविधा देने की योजना शुरू की थी। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी से आने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने और साइकिल नहीं लेने वाले विद्यार्थियों को स्कूल बस या अन्य वाहन के माध्यम से घर से स्कूल और स्कूल से घर छोड़ने की सुविधा दी गई थी। योजना के तहत हर सरकारी स्कूल की स्कूल प्रबंधक कमेटी को प्रबंध करने की जिम्मेदारी दी गई थी। विद्यार्थियों की संख्या व वाहन की व्यवस्था के अनुसार स्कूल के खाते में बजट डाला जाना था। संवाद
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शुरुआत में दिया था दस लाख का बजट
योजना की शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के लिए दस लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। मगर 31 मार्च तक इस प्रोजेक्ट के तहत जारी किया जाने वाला चालीस लाख रुपये का बजट तकनीकी कारणों से अटक गया। इसके बाद सभी स्कूल प्रबंधन कमेटी ने हाथ खड़े कर दिए। इसके चलते वाहन चालकों ने भी बजट न देने के चलते वाहनों को बंद कर दिया। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर योजना को आगे बढ़ाने के प्रयास शुरू किए थे। मगर महेंद्रगढ़ के कनीना में प्राइवेट स्कूल की बस का हादसा होने के बाद नियमों की पालना संबंधी सख्ती आड़े आ गई। बताया जा रहा है कि अब शिक्षा विभाग बजट पास करवाने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में दोबारा इस योजना को शुरू करने के लिए स्कूल प्रबंधक कमेटी से शपथ पत्र लेकर जिम्मेदारी तय करेगा। साथ ही तीन सदस्यों की कमेटी भी बनाई जाएगी, जो सरकारी स्कूल में चलने वाले वाहनों के नियम पूरे करवाने, वाहनों की पासिंग करवाने, बैंक में खाते खुलवाकर उसमें बजट लगाने का काम करेगी।
चालीस लाख रुपये का बजट अटकने तथा स्कूलों के खाते खुलने में देरी होने के कारण 31 मार्च से ही विद्यार्थी परिवहन योजना बंद पड़ी है। विभाग द्वारा बजट पास करवाने तथा स्कूलों के खाते खुलवाने को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होने पर स्कूली वाहनों के नियम पूरे करवाने के बाद पासिंग करवा कर योजना को दोबारा शुरू करवाया जाएगा। -अनीता बाई, खंड शिक्षा अधिकारी, रतिया
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रतिया। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दी गई परिवहन सुविधा दो महीने में ही बंद हो गई है। चालीस लाख रुपये का बजट नहीं आने के चलते विद्यार्थी परिवहन योजना बीच में ही लटक गई है। 31 मार्च के बाद से वाहनचालकों ने अपने वाहन भेजने बंद कर दिए हैं।
जिले में शिक्षा विभाग ने रतिया क्षेत्र के 34 सरकारी स्कूलों में इस योजना को जनवरीमें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था। विधायक लक्ष्मण नापा व अधिकारियों द्वारा स्कूलों से झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया गया था। मगर दो महीने के बाद ही बजट अटकने से योजना ठप हो गई। शिक्षा विभाग बजट व स्कूलों के बैंक खाता खुलने में देरी को वजह बता रहा है।प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के इरादे से प्राइवेट स्कूलों के बराबर सुविधा देने के लिए कॉन्वेंट स्कूलों की तरह मॉडल संस्कृति स्कूल व पीएमश्री स्कूलों को खोला गया।
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वहीं, जनवरी में सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट स्कूलों की तरह विद्यार्थियों को परिवहन सुविधा देने की योजना शुरू की थी। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी से आने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने और साइकिल नहीं लेने वाले विद्यार्थियों को स्कूल बस या अन्य वाहन के माध्यम से घर से स्कूल और स्कूल से घर छोड़ने की सुविधा दी गई थी। योजना के तहत हर सरकारी स्कूल की स्कूल प्रबंधक कमेटी को प्रबंध करने की जिम्मेदारी दी गई थी। विद्यार्थियों की संख्या व वाहन की व्यवस्था के अनुसार स्कूल के खाते में बजट डाला जाना था। संवाद
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शुरुआत में दिया था दस लाख का बजट
योजना की शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के लिए दस लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। मगर 31 मार्च तक इस प्रोजेक्ट के तहत जारी किया जाने वाला चालीस लाख रुपये का बजट तकनीकी कारणों से अटक गया। इसके बाद सभी स्कूल प्रबंधन कमेटी ने हाथ खड़े कर दिए। इसके चलते वाहन चालकों ने भी बजट न देने के चलते वाहनों को बंद कर दिया। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर योजना को आगे बढ़ाने के प्रयास शुरू किए थे। मगर महेंद्रगढ़ के कनीना में प्राइवेट स्कूल की बस का हादसा होने के बाद नियमों की पालना संबंधी सख्ती आड़े आ गई। बताया जा रहा है कि अब शिक्षा विभाग बजट पास करवाने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में दोबारा इस योजना को शुरू करने के लिए स्कूल प्रबंधक कमेटी से शपथ पत्र लेकर जिम्मेदारी तय करेगा। साथ ही तीन सदस्यों की कमेटी भी बनाई जाएगी, जो सरकारी स्कूल में चलने वाले वाहनों के नियम पूरे करवाने, वाहनों की पासिंग करवाने, बैंक में खाते खुलवाकर उसमें बजट लगाने का काम करेगी।
चालीस लाख रुपये का बजट अटकने तथा स्कूलों के खाते खुलने में देरी होने के कारण 31 मार्च से ही विद्यार्थी परिवहन योजना बंद पड़ी है। विभाग द्वारा बजट पास करवाने तथा स्कूलों के खाते खुलवाने को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होने पर स्कूली वाहनों के नियम पूरे करवाने के बाद पासिंग करवा कर योजना को दोबारा शुरू करवाया जाएगा। -अनीता बाई, खंड शिक्षा अधिकारी, रतिया