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Fatehabad News: ब्लड बैंक के भवन का होगा विस्तार, लगेंगी कंपोनेंट सेपरेटर मशीन
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में बना ब्लड बैंक
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक का जल्द विस्तार होने जा रहा है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए दूसरे जिले में जाने की जरूरत नहीं होगी। मरीजों को फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक से ही प्लेटलेट्स मिल सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड बैंक के भवन के विस्तार को लेकर करीब 8 लाख रुपये का बजट जारी करने के बाद लोक निर्माण विभाग ने निर्माण के लिए टेंडर लगा दिया है। मार्च माह में बिल्डिंग के विस्तार को लेकर निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कोरोना महामारी शुरू होने से पहले वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। लेकिन भवन न होने के चलते मशीन पड़ी रही और फिर इन मशीनों को कोरोना महामारी के दौरान अग्रोहा मेडिकल में भेज दी थी। इसके बाद पंचकूला से दोबारा मशीनें अलॉट हुई लेकिन इस्टॉल नहीं की गई। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर वर्ष 2021 में डीजी कार्यालय के अधिकारियों ने स्टेटस देखने के लिए निरीक्षण किया था। लेकिन यहां डिब्बे में बंद मशीनें देखकर फटकार लगाई थी और एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2023 में एस्टीमेट बना और डिमांड की गई। अब लोक निर्माण विभाग ने भवन विस्तार की प्रक्रिया शुरू की है। संवाद
एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेट मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
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डेंगू फैला तो प्लेटलेट्स के लिए हिसार से किया अनुबंध
डेंगू जिले में फैलना शुरू हुआ तो फतेहाबाद स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू की थी। प्लेटलेट्स को लेकर हिसार के नागरिक अस्पताल से अनुबंध किया गया। हालांकि जिले में डेंगू के करीब 89 केस मिले लेकिन प्लेटलेट्स की डिमांड नहीं आई।
कोट
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने के लिए जगह की जरूरत होती है। भवन निर्माण को लेकर पिछले दिनों डिमांड की गई थी। बजट आने के बाद लोक निर्माण विभाग को दे दिया गया है। जल्द ही भवन का विस्तार होगा और यहां मशीनें लग पाएंगी।
- डॉ. सुभाष, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कोरोना महामारी शुरू होने से पहले वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। लेकिन भवन न होने के चलते मशीन पड़ी रही और फिर इन मशीनों को कोरोना महामारी के दौरान अग्रोहा मेडिकल में भेज दी थी। इसके बाद पंचकूला से दोबारा मशीनें अलॉट हुई लेकिन इस्टॉल नहीं की गई। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर वर्ष 2021 में डीजी कार्यालय के अधिकारियों ने स्टेटस देखने के लिए निरीक्षण किया था। लेकिन यहां डिब्बे में बंद मशीनें देखकर फटकार लगाई थी और एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2023 में एस्टीमेट बना और डिमांड की गई। अब लोक निर्माण विभाग ने भवन विस्तार की प्रक्रिया शुरू की है। संवाद
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एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेट मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
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डेंगू फैला तो प्लेटलेट्स के लिए हिसार से किया अनुबंध
डेंगू जिले में फैलना शुरू हुआ तो फतेहाबाद स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू की थी। प्लेटलेट्स को लेकर हिसार के नागरिक अस्पताल से अनुबंध किया गया। हालांकि जिले में डेंगू के करीब 89 केस मिले लेकिन प्लेटलेट्स की डिमांड नहीं आई।
कोट
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने के लिए जगह की जरूरत होती है। भवन निर्माण को लेकर पिछले दिनों डिमांड की गई थी। बजट आने के बाद लोक निर्माण विभाग को दे दिया गया है। जल्द ही भवन का विस्तार होगा और यहां मशीनें लग पाएंगी।
- डॉ. सुभाष, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी