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Fatehabad News: वेंडर से दवा खरीदने से पहले करवानी होगी लैब में जांच, अमानक पाए जाने पर नहीं खरीद सकेंगे, वेंडरों के स्वास्थ्य विभाग पर 3.70 करोड़ रुपये बकाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jun 2025 11:03 PM IST
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Before purchasing medicine from the vendor, a laboratory test will have to be conducted; if found substandard, it cannot be purchased. The Health Department is owed 3.70 crore rupees by the vendors.
नागरिक अस्पताल में दवा काउंटर के बाहर खड़े लोग। 
मुकेश खुराना
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फतेहाबाद। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों और अन्य चिकित्सा सामग्री पर संकट के बादल छा गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने वेयरहाउस से दवा नहीं आने पर वेंडरों से खरीदी जाने वाली दवाओं की टेस्टिंग अनिवार्य कर दी है। यानी किसी भी दवा की खरीद से पहले उसका दिल्ली में लैब टेस्ट करवाना होगा। इस प्रक्रिया में काफी समय भी लगता है। जांच में दवा मानकों के अनुरूप नहीं मिलती है तो उसकी खरीदी नहीं की जा सकेगी। विभागीय मुख्यालय ने इस संबंध में सभी सिविल सर्जन कार्यालयों को इसके निर्देश जारी किए हैं।
नए नियम के साथ ही बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण वेंडरों ने दवा आपूर्ति से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग पर 3.70 करोड़ रुपये की उधारी है। वहीं, कई महीनों से बजट जारी नहीं हुआ है। दवा आपूर्ति न होने पर सबसे बड़ा असर लैब और ऑपरेशन से जुड़ी सामग्री पर पड़ने की संभावना है। फिलहाल लैब में रिजेंट्स जैसी जरूरी सामग्री का स्टॉक 20 से 25 दिन का ही है।
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वेयरहाउस में चार माह से कई दवाएं नहीं
जिला वेयरहाउस की स्थिति भी चिंताजनक है। बीते चार महीने से पीसीएम टैबलेट, कैल्शियम, कफ सिरप और रैबीज इंजेक्शन जैसी जरूरी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं। जल्द ही बजट जारी नहीं किया और वेंडरों को भुगतान नहीं हुआ तो सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी किल्लत देखने को मिल सकती है। संवाद
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हिसार वेयरहाउस से आती हैं दवाइयां
नागरिक अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में दवाइयां हिसार में स्थित वेयर हाउस से सप्लाई होती है। वेयर हाउस में भी दवा नहीं है तो सिविल सर्जन कार्यालय निजी वेंडरों से दवा खरीद करते हैं। नए नियम के मुताबिक अगर किसी अस्पताल से दवा की मांग आती है तो सिविल सर्जन कार्यालय पहले संबंधित वेंडर से दवाओं का सैंपल लेगा। सैंपल को जांच के लिए दिल्ली स्थित लैब में भेजा जाएगा। लैब से रिपोर्ट आने के बाद सिविल सर्जन कार्यालय दवा की खरीद कर पाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में साढ़े तीन से चार माह का समय लग सकता है।
उधारी चुकाने के लिए चार माह पहले दिए थे सिर्फ 50 लाख रुपये
मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने फरवरी में 50 लाख रुपये का बजट जारी किया था। वेंडरों की अभी 3.70 करोड़ रुपये की उधार हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग वेंडरों से मुख्य तौर पर लैब से संबंधित सामान, ऑपरेशन थियेटर में प्रयोग होने वाली दवाइयां व अन्य सामान की खरीद करता है। इसके अलावा डिस्पेंसरी में भी वेयर हाउस से न आने वाली दवाइयों की खरीद की जाती है।
जिले में सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र का ब्योरा
जिला अस्पताल - 1
उप नागरिक अस्पताल - 1
सीएचसी - 5
पीएचसी 18
सब सेंटर - 131
अर्बन पीएचसी - 4
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वेयरहाउस में दवाइयों का टोटा
प्रदेश सरकार द्वारा सात वेयर हाउस स्थापित किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें बेहद सीमित मात्रा में दवाइयां पहुंच रही हैं। हालात ये हैं कि पिछले चार माह से पीसीएम टैबलेट, कैल्शियम गोली, कफ सिरप और रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। जनहित को देखते हुए सिविल सर्जन कार्यालय को खुद दवाइयों की खरीद करनी पड़ रही है। सरकार से पर्याप्त बजट न मिलने के कारण उधारी बढ़ गई है।

- कृष्ण बिश्नोई, फार्मेसी ऑफिसर एवं जिला प्रधान, फार्मेसी ऑफिसर एसोसिएशन

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वेयर हाउस से दवाई न आने पर इमरजेंसी में दवाइयां वेंडर से खरीदी जाती है। बजट को लेकर मुख्यालय को डिमांड भेजी जा चुकी है। उम्मीद है जल्द बजट जारी हो जाएगा। - डॉ.कुलप्रतिभा, सिविल सर्जन
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