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Fatehabad News: साइबर ठगी और सट्टे के लिए पांच से दस हजार में बिक रहे बैंक खाते
Sun, 04 Oct 2026 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:14 PM IST
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फतेहाबाद में साइबर क्राइम थानास्त्रोत :लाइब्रेरी
फतेहाबाद। साइबर ठगी और क्रिकेट सट्टे के अवैध कारोबार में रकम का लेनदेन छिपाने के लिए युवकों के बैंक खाते पांच से दस हजार रुपये में खरीदे जा रहे हैं। शहर में सक्रिय दलाल युवकों को लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते हैं।
इसके बाद चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर गिरोह के सदस्यों को सौंप देते हैं। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगवाने और क्रिकेट सट्टे से जुड़े लेनदेन में किया जाता है। खाते खुलवाने वाले युवकों को इसके बदले पांच से दस हजार रुपये तक दिए जाते हैं।
इस तरह युवक मामूली रकम के लालच में अपने बैंक खातों का नियंत्रण दूसरे लोगों को सौंप रहे हैं। शहर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस जांच में बैंक खातों के दुरुपयोग से जुड़े खुलासे हुए हैं। संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि खातों की खरीद-फरोख्त में दलालों की भूमिका अहम है। गिरोह इन खातों के माध्यम से लेनदेन कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं।
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संवाद संवाददाता और दलाल की बातचीत
रिपोर्टर : बैंक खाता कितने में खरीदते हैं।
दलाल : 8 से 10 हजार रुपये में खरीदते हैं और आगे 11 से 12 हजार में बेच देते हैं।
रिपोर्टर : बैंक खातों के लिए किसको जाल में फंसाते हैं, मजदूर लोग होंगे।
दलाल : नहीं दुकानों पर काम करने वाले कई युवक होते हैं जो आसानी से आईडी दे देते हैं।
रिपोर्टर : क्या बैंक आसानी से खाता खोल देता है।
दलाल : फतेहाबाद में एक बैंक तो है नहीं 20 बैंक हैं।
रिपोर्टर : बैंक खातों का किसलिए प्रयोग होता है।
दलाल : क्रिकेट स्टोरिये मुख्य तौर पर बैंक खाते लेते हैं, क्योंकि उन्हें ऑनलाइन पेमेंट गूगल-पे के जरिये लेनी होती है। उसमें उन्हें आसानी होती है।
रिपोर्टर : क्या फतेहाबाद में भी क्रिकेट सट्टे में बैंक खाते का इस्तेमाल हो रहा है।
दलाल : हां, फतेहाबाद में भी काफी बैंक खातों का क्रिकेट सट्टे में इस्तेमाल होते हैं। यहां के युवक दिल्ली, चंडीगढ़ में काम कर रहे हैं।
रिपोर्टर : खाता खुलवाने के लिए पैसे कौन देता है।
दलाल : बैंक खाता जीरो बैलेंस में भी खुल जाता है और कई जगह 500 से 1000 रुपये लगते हैं। खाता धारक की किट खुद रख लेते हैं।
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ऐसे काम करता है खातों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क
इस पूरे नेटवर्क में दलाल अहम कड़ी होते हैं। वे ऐसे युवकों को तलाशते हैं जिन्हें पैसों की जरूरत होती है या जिन्हें खाते के इस्तेमाल के जोखिम की जानकारी नहीं होती। उन्हें मामूली रकम देकर बैंक में खाता खुलवाने के लिए तैयार किया जाता है। खाता खुलने के बाद डेबिट कार्ड, चेकबुक और बैंकिंग से जुड़े अन्य साधन अपने पास रख लिए जाते हैं। फिर इन खातों की जानकारी आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाई जाती है।
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ठगी गई रकम निकालने में होते हैं इस्तेमाल
साइबर ठगी करने वाले आरोपी पीड़ितों से ठगी गई रकम सीधे अपने खातों में लेने के बजाय दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे रकम के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाता है। इसी तरह क्रिकेट सट्टे के अवैध कारोबार में भी ऐसे खातों के जरिये लेनदेन किए जाने की आशंका रहती है।
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पुलिस विभाग की तरफ से समय-समय पर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। ये बात सही है कि साइबर ठगी की राशि के इस्तेमाल के लिए बैंक खाते खरीदे और बेचे जा रहे हैं। ऐसे लोग पहले पकड़े जाते हैं जिनके बैंक खाते में राशि जाती है। लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है और किसी लालच में न फंसे।
- राहुल कुमार, प्रभारी, साइबर क्राइम
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लोगों को इस संबंध में खुद जागरूक रहने की जरूरत है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रलोभन में न आएं। पुलिस विभाग के साथ अलग-अलग मुद्दों पर सोमवार को बैठक भी होनी है।
- लहरीमल, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक
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इसके बाद चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर गिरोह के सदस्यों को सौंप देते हैं। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगवाने और क्रिकेट सट्टे से जुड़े लेनदेन में किया जाता है। खाते खुलवाने वाले युवकों को इसके बदले पांच से दस हजार रुपये तक दिए जाते हैं।
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इस तरह युवक मामूली रकम के लालच में अपने बैंक खातों का नियंत्रण दूसरे लोगों को सौंप रहे हैं। शहर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस जांच में बैंक खातों के दुरुपयोग से जुड़े खुलासे हुए हैं। संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि खातों की खरीद-फरोख्त में दलालों की भूमिका अहम है। गिरोह इन खातों के माध्यम से लेनदेन कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं।
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संवाद संवाददाता और दलाल की बातचीत
रिपोर्टर : बैंक खाता कितने में खरीदते हैं।
दलाल : 8 से 10 हजार रुपये में खरीदते हैं और आगे 11 से 12 हजार में बेच देते हैं।
रिपोर्टर : बैंक खातों के लिए किसको जाल में फंसाते हैं, मजदूर लोग होंगे।
दलाल : नहीं दुकानों पर काम करने वाले कई युवक होते हैं जो आसानी से आईडी दे देते हैं।
रिपोर्टर : क्या बैंक आसानी से खाता खोल देता है।
दलाल : फतेहाबाद में एक बैंक तो है नहीं 20 बैंक हैं।
रिपोर्टर : बैंक खातों का किसलिए प्रयोग होता है।
दलाल : क्रिकेट स्टोरिये मुख्य तौर पर बैंक खाते लेते हैं, क्योंकि उन्हें ऑनलाइन पेमेंट गूगल-पे के जरिये लेनी होती है। उसमें उन्हें आसानी होती है।
रिपोर्टर : क्या फतेहाबाद में भी क्रिकेट सट्टे में बैंक खाते का इस्तेमाल हो रहा है।
दलाल : हां, फतेहाबाद में भी काफी बैंक खातों का क्रिकेट सट्टे में इस्तेमाल होते हैं। यहां के युवक दिल्ली, चंडीगढ़ में काम कर रहे हैं।
रिपोर्टर : खाता खुलवाने के लिए पैसे कौन देता है।
दलाल : बैंक खाता जीरो बैलेंस में भी खुल जाता है और कई जगह 500 से 1000 रुपये लगते हैं। खाता धारक की किट खुद रख लेते हैं।
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ऐसे काम करता है खातों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क
इस पूरे नेटवर्क में दलाल अहम कड़ी होते हैं। वे ऐसे युवकों को तलाशते हैं जिन्हें पैसों की जरूरत होती है या जिन्हें खाते के इस्तेमाल के जोखिम की जानकारी नहीं होती। उन्हें मामूली रकम देकर बैंक में खाता खुलवाने के लिए तैयार किया जाता है। खाता खुलने के बाद डेबिट कार्ड, चेकबुक और बैंकिंग से जुड़े अन्य साधन अपने पास रख लिए जाते हैं। फिर इन खातों की जानकारी आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाई जाती है।
ठगी गई रकम निकालने में होते हैं इस्तेमाल
साइबर ठगी करने वाले आरोपी पीड़ितों से ठगी गई रकम सीधे अपने खातों में लेने के बजाय दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे रकम के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाता है। इसी तरह क्रिकेट सट्टे के अवैध कारोबार में भी ऐसे खातों के जरिये लेनदेन किए जाने की आशंका रहती है।
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पुलिस विभाग की तरफ से समय-समय पर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। ये बात सही है कि साइबर ठगी की राशि के इस्तेमाल के लिए बैंक खाते खरीदे और बेचे जा रहे हैं। ऐसे लोग पहले पकड़े जाते हैं जिनके बैंक खाते में राशि जाती है। लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है और किसी लालच में न फंसे।
- राहुल कुमार, प्रभारी, साइबर क्राइम
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लोगों को इस संबंध में खुद जागरूक रहने की जरूरत है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रलोभन में न आएं। पुलिस विभाग के साथ अलग-अलग मुद्दों पर सोमवार को बैठक भी होनी है।
- लहरीमल, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक