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Fatehabad News: लंपी वायरस की आशंका पर पशु मेले में खरीद-बिक्री पर लगी रोक

Sat, 12 Sep 2026 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 12 Sep 2026 11:06 PM IST
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Ban imposed on buying and selling at cattle fair due to suspected Lumpy virus
गांव अयाल्की में लगे पशु मेले में लाए गए पशु स्त्रोत लाइब्रेरी
फतेहाबाद। पशुओं में लंपी वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने गांव अयाल्की में लगने वाले पशु मेले में गोवंश की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इस संबंध में जिला विकास एवं पंचायत विभाग को पत्र भेजा गया है।
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अयाल्की के पशु मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी पशु पहुंचते हैं। दूसरे क्षेत्रों से आने वाले पशुओं के संपर्क से संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए विभाग ने यह एहतियाती कदम उठाया है। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. सुखविंद्र ने इसकी पुष्टि की है।
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विभाग ने जिले की गोशालाओं के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। इसमें पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की सलाह दी गई है। बिना टीकाकरण वाले पशुओं को अन्य पशुओं के संपर्क में नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। बीमार या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने को कहा गया है।
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विभाग ने पशुपालकों से पशुओं में किसी भी असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना देने की अपील की है। अधिकारियों ने संक्रमण की रोकथाम के लिए पशुपालकों से सावधानी बरतने और विभागीय निर्देशों का पालन करने को कहा है।
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लंपी बीमारी के लक्षण

पशुपालन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार लंपी स्किन बीमारी गोवंश में होने वाली संक्रामक बीमारी है। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में कमी शामिल हैं। इसके बाद शरीर की त्वचा पर गोल, उभरी हुई और गांठें दिखाई दे सकती हैं। पशु के पैरों में सूजन, लिम्फ नोड्स में बढ़ोतरी और कमजोरी भी इसके लक्षण हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
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मच्छर-मक्खियों और टिक से फैलता है संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार लंपी वायरस मुख्य रूप से मच्छर, काटने वाली मक्खियों और टिक जैसे वाहकों से फैलता है। संक्रमित पशु के संपर्क और दूषित सामग्री के माध्यम से भी संक्रमण फैल सकता है इसलिए पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखना और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम करना जरूरी है।
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टीकाकरण और अलग रखने पर जोर
विभाग की गाइडलाइन में लंपी की रोकथाम के लिए टीकाकरण को प्रभावी उपाय बताया गया है। नए पशुओं को झुंड में शामिल करने से पहले निगरानी में रखना और संदिग्ध या संक्रमित पशु को तुरंत अलग करना भी जरूरी है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाएं और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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पशुओं की आवाजाही पर निगरानी और समय पर स्वास्थ्य जांच संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी के चलते अयाल्की पशु मेले में गोवंश की खरीद-बिक्री पर रोक का निर्णय लिया गया है।
-डॉ. सुखविंद्र, उप निदेशक, पशुपालन विभाग
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