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Fatehabad News: बलवान को जाट बेल्ट तो दुड़ाराम को बिश्नोई बेल्ट व शहर से लीड की आस

Wed, 02 Oct 2024 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 02 Oct 2024 12:02 AM IST
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Balwan gets Jat belt, Dudaram gets Bishnoi belt and hope of lead from the city.
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार के दौरान फोटो ​खिंचवाती महिलाएं।
फतेहाबाद। फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला रोचक बना हुआ है। भाजपा प्रत्याशी दुड़ाराम जहां शहरी मतदाताओं और बिश्नोई बेल्ट के भरोसे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी बलवान सिंह जाट बेल्ट से बड़ी लीड की आस लगाए हुए हैं। आखिरी तीन दिनों में अब प्रत्याशी अपनी जीत के लिए दांव और मजबूती से लगाने लगे हैं।
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हालाांकि, अभी तक मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को छोड़कर किसी बड़े नेता के नहीं आने से भाजपा चुनावी प्रचार में कांग्रेस के मुकाबले में कमजोर नजर आ रही है। दो दिन पहले भट्टू में सांसद दीपेंद्र हुड्डा की जनसभा होने के बाद से बलवान खेमा खुद की जीत को सुनिश्चित मानने लगा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशी और उनके रणनीतिकार इस समय अति आत्मविश्वास में डूबे हुए हैं। मगर दुड़ाराम के बेहद अनुभवी राजनीतिज्ञ होने के कारण मुकाबला कड़ा होगा।
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गौरतलब है कि कांग्रेस प्रत्याशी बलवान सिंह और भाजपा प्रत्याशी दुड़ाराम इससे पहले साल 2014 में भी आमने-सामने मैदान में रह चुके हैं। उस चुनाव में बलवान सिंह इनेलो की टिकट पर जबकि दुड़ाराम हजकां की टिकट पर उतरे थे। उस समय बलवान सिंह ने दुड़ाराम को 3505 वोटों से हराया था। उस चुनाव में बलवान सिंह को 60,539 वोट जबकि दुड़ाराम को 57,034 वोट मिले थे। भाजपा प्रत्याशी के तौर पर स्वतंत्र बाला चौधरी 27,305 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही थी। मगर साल 2019 में दुड़ाराम भाजपा में शामिल हो गए। इस बार वह दूसरी बार भाजपा से मैदान में हैं।
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भाजपा को संगठन व नीतियों पर भरोसा
भाजपा खेमे को संगठन की मेहनत और सरकार की बिना खर्ची-बिना पर्ची जैसी नीतियों पर भरोसा है। उनका दावा है कि इससे जनता में उनके प्रति विश्वास बढ़ा है। वहीं, दुड़ाराम का खुद का वोट बैंक भी है। खासकर बिश्नोई बहुल 10 से 12 गांवों में उनकी मजबूत पकड़ है। साल 2014 के बाद से भाजपा का वोट बैंक भी बढ़ा है। ऐसे में भाजपा खेमा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त चल रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रवीण जोड़ा की मानें तो भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की टीम हर बूथ पर मजबूती के लिए जुटी हुई है। मेरा बूथ सबसे मजबूत के नारे को लेकर कार्यकर्ता चल रहे हैं।
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सत्ता विरोधी लहर को भुनाने के प्रयास में कांग्रेस
कांग्रेस खेमा सत्ता विरोधी लहर को भुनाने में लगा हुआ है। किसान आंदोलन और जाट समाज की नाराजगी को भी हथियार बनाकर जीत रूपी निशाना लगाने की पूरी कोशिश हो रही है। हालांकि, कांग्रेस प्रत्याशी साल 2014 में इनेलो की टिकट पर विधायक रह चुके हैं। मगर उनके पास खुद के पांच साल के कार्यकाल में करवाए गए विकास कार्यों को गिनवाने के नाम पर कुछ विशेष नहीं है। वह अपने भाषणों में सत्ता विरोधी लहर के जरिए ही मतदाताओं को लुभाने की जुगत में लगे हुए हैं। मगर हुड्डा खेमे के कई नेताओं की चुनाव प्रचार से दूरी उनके लिए भीतरीघात की आशंका बढ़ाए हुए हैं।

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इनेलो और निर्दलीय प्रत्याशी भी बिगाड़ रहे गणित
साल 2019 से हाशिए पर आई इनेलो इस बार मजबूत उपस्थिति दर्शा रही है। चौटाला परिवार की बहू सुनैना चौटाला अपने मिलनसार व्यवहार के कारण मतदाताओं में अपनी जगह बना रही हैं। वह अपने भाषणों में नशे जैसे स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही हैं जबकि बाकी दोनों राष्ट्रीय पार्टी के नेता नशे के मुद्दे पर गंभीरता से अपने विचार नहीं रख रहे हैं। इनेलो का पुराना वोट बैंक है, जो सुनैना के मैदान में आने से सक्रिय हुआ है। इनेलो महिला विंग की महासचिव के तौर पर सुनैना चौटाला पार्टी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस कारण महिलाओं के वोटों को भी साधने की वह पूरी कोशिश कर रही हैं।
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