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Fatehabad News: कार्ड के बावजूद आयुष्मान नहीं हो रहे लाभार्थी
Sat, 05 Aug 2023 09:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 05 Aug 2023 09:19 PM IST
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फतेहाबाद के भूपसिंह बेटे के उपचार में आयुष्मान कार्ड का लाभ न मिलने बारे बताते हुए
फतेहाबाद। आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में करीब चार लाख पात्रों के कार्ड बन चुके हैं। कार्ड के तहत पात्रों को पांच लाख रुपये तक का सालाना उपचार पैनल निजी अस्पताल में फ्री है। लेकिन कार्ड होने के बावजूद लाभार्थी आयुष्मान नहीं हो रहे हैं। पैनल में शामिल निजी अस्पताल गंभीर पात्रों को आयुष्मान का सस्ता पैकेज और खुद का खर्च ज्यादा बताकर दाखिल ही नहीं कर रहे हैं। मजबूरन पात्रों को उपचार के लिए मकान बेचना पड़ रहा है तो किसी को रोजगार के साधन को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले में 18 निजी अस्पताल पैनल में शामिल है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन्हीं शिकायतों के चलते पैनल निजी अस्पतालों को सभी सुविधाओं को तीन माह में पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कॉमन सर्विस सेंटरों पर आयुष्मान कार्ड बनने भी बंद हो गए है। सिर्फ अस्पतालों में ही कार्ड बनेंगे। सीएससी की जिला प्रबंधक शिल्पा नारंग का कहना है कि आयुष्मान कार्ड को लेकर 450 आईडी बनी हुई थी लेकिन यहां अब कार्ड नहीं बन रहे हैं। कुछ आईडी भी बंद हो चुकी है।
केस नंबर एक
आयुष्मान कार्ड था फिर भी देना पड़ा 2.35 लाख का बिल
मेरे बेटे रमेश का दरियापुर के पास दुर्घटना हो गई थी। पहले सरकारी अस्पताल में लाए लेकिन यहां से रेफर कर दिया गया। इसके बाद हिसार के निजी अस्पताल में ले जाया गया। आयुष्मान कार्ड था लेकिन फिर भी उन्हें 2 लाख 35 हजार रुपये का बिल देना पड़ा। यहां इलाज ठीक न होने पर दूसरे निजी अस्पताल में ले गए। उन्हें आयुष्मान कार्ड दिखाया गया लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार आईसीयू में वेंटिलेटर का 350 रुपये देती है जबकि 12 हजार खर्च है इसलिए लाभ नहीं मिला। अस्पताल का बिल चुकाने के लिए वह खुद का मकान बेच चुका हूं। रोजगार के साधन ट्रैक्टर को भी बेचने को मजबूर हूं, क्यों कि अस्पताल का बिल चुकाना है।
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- भूप सिंह, निवासी हरनाम सिंह कॉलोनी
केस दो
टेस्ट करने से कर दिया मना, बाहर देने पड़े रुपये
मेरा आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, गले में दिक्कत के कारण यहां के डॉक्टरों को दिखाया गया तो उसे हिसार दिखाने का परामर्श दिया गया। हिसार के निजी अस्पताल जो कि आयुष्मान पैनल में भी थी लेकिन टेस्ट करने से मनाकर दिया गया। उसे पांच हजार रुपये देकर टेस्ट करवाना पड़ा।
- साधुराम, निवासी भूना
आयुष्मान भारत योजना के तहत ये अस्पताल हैं पैनल में शामिल
वधवा सर्जिकल अस्पताल फतेहाबाद
पारूल ईएनटी, स्किन एवं लेजर सेंटर टोहाना
राजन आई, हार्ट एवं लेजर सेंटर टोहाना
आई क्यू अस्पताल फतेहाबाद
जयपुर चिल्ड्रन अस्पताल फतेहाबाद
राजस्थान मेडिकल सेंटर टोहाना
सद्भावना अस्पताल फतेहाबाद
जनता आई एवं मैटरनिटी अस्पताल टोहाना
अरोड़ा अस्पताल टोहाना
मेहता आई अस्पताल टोहाना
लाइफ केयर अस्पताल फतेहाबाद
जैन चेरिटेबल अस्पताल टोहाना
सांई अस्पताल टोहाना
कक्कड़ नर्सिंग होम, टोहाना
उम्मीद अस्पताल फतेहाबाद
खन्ना ईएनटी टोहाना
दीपांश भाटिया अस्पताल टोहाना
शालिनी सर्जिकल एवं मैटरनिटी अस्पताल
जिले में ये है पात्रों की संख्या
कुल पात्र : 5 लाख 24 हजार
कुल कार्ड बने : 3 लाख 94 हजार
पैनल अस्पतालों का दो-दो करोड़ इलाज का बकाया
आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार कर रहे निजी अस्पतालों को दो माह से भुगतान ही नहीं किया गया है। जिले के कई अस्पतालों का दो-दो करोड़ रुपये बकाया है। बताया जा रहा है कि मई माह के बाद पैनल अस्पतालों के बिल रुके पड़े हैं। इसको लेकर पैनल अस्पतालों के संचालक उच्च अधिकारियों से भी मिल चुके है।
सभी सुविधाओं को पैनल अस्पताल को करना होगा तीन माह में शामिल : उप सिविल सर्जन
अगर किसी पात्र को पैनल अस्पताल में उपचार लेने को लेकर दिक्कत आ रही है तो वह लिखित में शिकायत दे सकता है। विभाग की तरफ से भी आदेश आए है कि जो अस्पताल पैनल में है उन्हें सभी सुविधाओं को पैनल में लेना है। अस्पतालों को तीन माह का समय दिया गया है।
- डॉ. कुलदीप गौरी, उप सिविल सर्जन
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जिले में 18 निजी अस्पताल पैनल में शामिल है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन्हीं शिकायतों के चलते पैनल निजी अस्पतालों को सभी सुविधाओं को तीन माह में पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कॉमन सर्विस सेंटरों पर आयुष्मान कार्ड बनने भी बंद हो गए है। सिर्फ अस्पतालों में ही कार्ड बनेंगे। सीएससी की जिला प्रबंधक शिल्पा नारंग का कहना है कि आयुष्मान कार्ड को लेकर 450 आईडी बनी हुई थी लेकिन यहां अब कार्ड नहीं बन रहे हैं। कुछ आईडी भी बंद हो चुकी है।
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केस नंबर एक
आयुष्मान कार्ड था फिर भी देना पड़ा 2.35 लाख का बिल
मेरे बेटे रमेश का दरियापुर के पास दुर्घटना हो गई थी। पहले सरकारी अस्पताल में लाए लेकिन यहां से रेफर कर दिया गया। इसके बाद हिसार के निजी अस्पताल में ले जाया गया। आयुष्मान कार्ड था लेकिन फिर भी उन्हें 2 लाख 35 हजार रुपये का बिल देना पड़ा। यहां इलाज ठीक न होने पर दूसरे निजी अस्पताल में ले गए। उन्हें आयुष्मान कार्ड दिखाया गया लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार आईसीयू में वेंटिलेटर का 350 रुपये देती है जबकि 12 हजार खर्च है इसलिए लाभ नहीं मिला। अस्पताल का बिल चुकाने के लिए वह खुद का मकान बेच चुका हूं। रोजगार के साधन ट्रैक्टर को भी बेचने को मजबूर हूं, क्यों कि अस्पताल का बिल चुकाना है।
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- भूप सिंह, निवासी हरनाम सिंह कॉलोनी
केस दो
टेस्ट करने से कर दिया मना, बाहर देने पड़े रुपये
मेरा आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, गले में दिक्कत के कारण यहां के डॉक्टरों को दिखाया गया तो उसे हिसार दिखाने का परामर्श दिया गया। हिसार के निजी अस्पताल जो कि आयुष्मान पैनल में भी थी लेकिन टेस्ट करने से मनाकर दिया गया। उसे पांच हजार रुपये देकर टेस्ट करवाना पड़ा।
- साधुराम, निवासी भूना
आयुष्मान भारत योजना के तहत ये अस्पताल हैं पैनल में शामिल
वधवा सर्जिकल अस्पताल फतेहाबाद
पारूल ईएनटी, स्किन एवं लेजर सेंटर टोहाना
राजन आई, हार्ट एवं लेजर सेंटर टोहाना
आई क्यू अस्पताल फतेहाबाद
जयपुर चिल्ड्रन अस्पताल फतेहाबाद
राजस्थान मेडिकल सेंटर टोहाना
सद्भावना अस्पताल फतेहाबाद
जनता आई एवं मैटरनिटी अस्पताल टोहाना
अरोड़ा अस्पताल टोहाना
मेहता आई अस्पताल टोहाना
लाइफ केयर अस्पताल फतेहाबाद
जैन चेरिटेबल अस्पताल टोहाना
सांई अस्पताल टोहाना
कक्कड़ नर्सिंग होम, टोहाना
उम्मीद अस्पताल फतेहाबाद
खन्ना ईएनटी टोहाना
दीपांश भाटिया अस्पताल टोहाना
शालिनी सर्जिकल एवं मैटरनिटी अस्पताल
जिले में ये है पात्रों की संख्या
कुल पात्र : 5 लाख 24 हजार
कुल कार्ड बने : 3 लाख 94 हजार
पैनल अस्पतालों का दो-दो करोड़ इलाज का बकाया
आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार कर रहे निजी अस्पतालों को दो माह से भुगतान ही नहीं किया गया है। जिले के कई अस्पतालों का दो-दो करोड़ रुपये बकाया है। बताया जा रहा है कि मई माह के बाद पैनल अस्पतालों के बिल रुके पड़े हैं। इसको लेकर पैनल अस्पतालों के संचालक उच्च अधिकारियों से भी मिल चुके है।
सभी सुविधाओं को पैनल अस्पताल को करना होगा तीन माह में शामिल : उप सिविल सर्जन
अगर किसी पात्र को पैनल अस्पताल में उपचार लेने को लेकर दिक्कत आ रही है तो वह लिखित में शिकायत दे सकता है। विभाग की तरफ से भी आदेश आए है कि जो अस्पताल पैनल में है उन्हें सभी सुविधाओं को पैनल में लेना है। अस्पतालों को तीन माह का समय दिया गया है।
- डॉ. कुलदीप गौरी, उप सिविल सर्जन