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Fatehabad News: किताबें खुद बेच रहे या दुकानों से कमीशन तय
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फतेहाबाद। शिक्षा का नया सत्र शुरू हो चुका है। इसके साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी भी शुरू हो गई है। अधिकतर निजी स्कूलाें मेेंं किताबों को लेकर कमीशन का मोटा खेल चल रहा है और इसकी मार अभिभावकों पर पड़ रही है। निजी स्कूल विद्यार्थियों को स्कूल में ही किताबें लेने को मजबूर कर रहे हैं या फिर बाजार में किताबों को लेकर दुकानें फिक्स कर रखी है।
निजी स्कूल एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें लगवा रहे हैं। इसके चलते कक्षा नौवीं का किताबों का जो सेट 850 से 900 रुपये का है वह 7000 से 8000 रुपये में लेना पड़ रहा है। ये सब कुछ सरेआम हो रहा है लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। अधिकारियों को शिकायत का इंतजार है, यहां तक कि कोई कमेटी ही गठित नहीं की गई है जो कि निरीक्षण कर पाए। अभिभावकों का कहना है कि वह बिना बोले लेने को मजबूर हैं, क्यों कि उन्हें अपने बच्चे को उसी स्कूल में पढ़ाना है। ये ही नहीं निजी स्कूलों ने खासकर सीबीएसई पैटर्न से जुड़े ने 10 से 15 फीसदी तक मासिक फीस में भी बढ़ोतरी की है। पहले से पढ़ रहे विद्यार्थी से एडमिशन फीस न लेकर मासिक फीस में बढ़ोतरी की गई है। पहली कक्षा की फीस ही 3000 रुपये से 3500 तक ली जा रही है। यहां तक दसवीं कक्षा की मासिक फीस 4500 से 6000 रुपये वसूली जा रही है, इसके अलावा ट्रांसपोर्ट खर्चा अलग है। संवाद
एनसीईआरटी की 10 फीसदी किताबें भी नहीं लगी
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें न के बराबर लगवाई गई है। कक्षा पहली की ही किताबों का सेट 1500 से 2000 रुपये का मिल रहा है। इसके अलावा स्टेशनरी खर्च अलग से है। पड़ताल की गई तो सामने आया कि किताबें लेने आए रामकिशन ने बताया कि उसके बच्चे कक्षा आठवीं और दसवीं में भोड़िया खेड़ा के निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। यहां एनसीईआरटी की एक भी किताब नहीं लगी हैं। किताबों का सेट 9000 रुपये का आया है। इसमें अभी चार किताबें मिली नहीं हैं। रेगर बस्ती निवासी विष्णु का कहना है कि उसका बेटा धर्मशाला रोड स्थित निजी स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ता है। चार किताबें मिली नहीं और फिर भी 3500 रुपये का सेट आया है। छात्र राकेश ने बताया कि कक्षा 11 वीं की किताबों का सेट सात हजार रुपये का मिला है, अगर एनसीईआरटी की लगी होती तो 800 से 900 रुपये में मिल जाता।
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एक ही दुकान पर एक स्कूल की किताब, इसलिए भी हो रही मनमानी
विशेषज्ञों का कहना है कि किताबों का लेकर सेटिंग का खेल 6 माह पहले शुरू हो जाता है। ये ही कारण है कि निजी स्कूल की किताबें एक ही दुकान पर उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा दूसरी दुकान पर वह किताब नहीं मिलती हैं। 20 पेज की निजी प्रकाशक की किताब 350 से 400 रुपये में दी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी की किताबों पर 15 से 20 फीसदी तक कमीशन मिलता है और निजी प्रकाशकों की किताबें पर 40 से 50 फीसदी तक कमीशन है।
डराया जा रहा जल्द खरीदें, फिर नहीं मिलेगा पूरा सेट
अभिभावक सोनाक्षी का कहना है कि किताबों को लेकर स्कूल द्वारा डराया जा रहा है कि पूरा सेट खरीद लें नहीं तो बाद में नहीं मिलेगी। बात भी कुछ हद तक ठीक है और खरीदना भी मजबूरी है क्यों कि एनसीआरटी की जगह दूसरी किताबें लगी हैं और इसमें चैप्टर इधर से उधर किए गए हैं। विद्यार्थी पुरानी किताबें भी नहीं खरीद सकता है।
कोट
निजी स्कूलों में ही किताबें दी जा रही हैं या फिर दुकानें फिक्स है, ऐसी कोई शिकायत विभाग के पास नहीं आई है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच की जाएगी और जो कार्रवाई होगी वह की जाएगी। - संगीता बिश्नोई, जिला शिक्षा अधिकारी
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निजी स्कूल एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें लगवा रहे हैं। इसके चलते कक्षा नौवीं का किताबों का जो सेट 850 से 900 रुपये का है वह 7000 से 8000 रुपये में लेना पड़ रहा है। ये सब कुछ सरेआम हो रहा है लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। अधिकारियों को शिकायत का इंतजार है, यहां तक कि कोई कमेटी ही गठित नहीं की गई है जो कि निरीक्षण कर पाए। अभिभावकों का कहना है कि वह बिना बोले लेने को मजबूर हैं, क्यों कि उन्हें अपने बच्चे को उसी स्कूल में पढ़ाना है। ये ही नहीं निजी स्कूलों ने खासकर सीबीएसई पैटर्न से जुड़े ने 10 से 15 फीसदी तक मासिक फीस में भी बढ़ोतरी की है। पहले से पढ़ रहे विद्यार्थी से एडमिशन फीस न लेकर मासिक फीस में बढ़ोतरी की गई है। पहली कक्षा की फीस ही 3000 रुपये से 3500 तक ली जा रही है। यहां तक दसवीं कक्षा की मासिक फीस 4500 से 6000 रुपये वसूली जा रही है, इसके अलावा ट्रांसपोर्ट खर्चा अलग है। संवाद
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एनसीईआरटी की 10 फीसदी किताबें भी नहीं लगी
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें न के बराबर लगवाई गई है। कक्षा पहली की ही किताबों का सेट 1500 से 2000 रुपये का मिल रहा है। इसके अलावा स्टेशनरी खर्च अलग से है। पड़ताल की गई तो सामने आया कि किताबें लेने आए रामकिशन ने बताया कि उसके बच्चे कक्षा आठवीं और दसवीं में भोड़िया खेड़ा के निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। यहां एनसीईआरटी की एक भी किताब नहीं लगी हैं। किताबों का सेट 9000 रुपये का आया है। इसमें अभी चार किताबें मिली नहीं हैं। रेगर बस्ती निवासी विष्णु का कहना है कि उसका बेटा धर्मशाला रोड स्थित निजी स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ता है। चार किताबें मिली नहीं और फिर भी 3500 रुपये का सेट आया है। छात्र राकेश ने बताया कि कक्षा 11 वीं की किताबों का सेट सात हजार रुपये का मिला है, अगर एनसीईआरटी की लगी होती तो 800 से 900 रुपये में मिल जाता।
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एक ही दुकान पर एक स्कूल की किताब, इसलिए भी हो रही मनमानी
विशेषज्ञों का कहना है कि किताबों का लेकर सेटिंग का खेल 6 माह पहले शुरू हो जाता है। ये ही कारण है कि निजी स्कूल की किताबें एक ही दुकान पर उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा दूसरी दुकान पर वह किताब नहीं मिलती हैं। 20 पेज की निजी प्रकाशक की किताब 350 से 400 रुपये में दी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी की किताबों पर 15 से 20 फीसदी तक कमीशन मिलता है और निजी प्रकाशकों की किताबें पर 40 से 50 फीसदी तक कमीशन है।
डराया जा रहा जल्द खरीदें, फिर नहीं मिलेगा पूरा सेट
अभिभावक सोनाक्षी का कहना है कि किताबों को लेकर स्कूल द्वारा डराया जा रहा है कि पूरा सेट खरीद लें नहीं तो बाद में नहीं मिलेगी। बात भी कुछ हद तक ठीक है और खरीदना भी मजबूरी है क्यों कि एनसीआरटी की जगह दूसरी किताबें लगी हैं और इसमें चैप्टर इधर से उधर किए गए हैं। विद्यार्थी पुरानी किताबें भी नहीं खरीद सकता है।
कोट
निजी स्कूलों में ही किताबें दी जा रही हैं या फिर दुकानें फिक्स है, ऐसी कोई शिकायत विभाग के पास नहीं आई है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच की जाएगी और जो कार्रवाई होगी वह की जाएगी। - संगीता बिश्नोई, जिला शिक्षा अधिकारी