फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   AQI level reached 353

Fatehabad News: दो दिन राहत फिर से खराब हुई जिले की हवा, एक्यूआई का स्तर पहुंचा 353

Mon, 11 Nov 2024 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 11 Nov 2024 02:00 AM IST
विज्ञापन
AQI level reached 353
गांव अयाल्की में फसल अवशेषों में लगी आग बुझाते अ​ग्निशमन विभाग के कर्मचारी। 
फतेहाबाद। जिले में दो दिनों के बाद रविवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक फिर से खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। रविवार को जिले में एक्यूआई 353 दर्ज किया। जिससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई।
विज्ञापन

शुक्रवार और शनिवार को हवा की गति तेज रहने के कारण जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमश: 180 और 197 दर्ज हुआ था। जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन रविवार को जिले में फिर से एक्यूआई खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। रविवार को जिले का एक्यूआई 353 दर्ज किया गया है। ऐसे में लोगो को आंखों में जलन महसूस होने लगी।
विज्ञापन

जिले में धान की कटाई का काम अब लगभग 20 फीसदी ही रह गया है। इसके साथ ही किसानों को रबी की फसलों की बुआई करनी है। जिसके लिए खेत को खाली करना है। गेहूं की बिजाई अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ऐसे में किसानों को जल्द से जल्द फसल अवशेषों का निपटान करना है। जिसके लिए वे फसल अवशेषों में आग लगा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हरसैक द्वारा जिले में अब तक कुल 97 सूचनाएं भेजी जा चुकी हैं। जिन पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए 48 किसानों की रेड एंट्री और 44 पर एफआईआर दर्ज करवाई है। जिले में रविवार को अयाल्की, गोरखपुर, करनौली और मुंडलिया गांव में फसल अवशेष जलाने की सूचना मिली है। जिसकी शिकायत पुलिस विभाग को दी गई है। इन किसानाें पर सोमवार को जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।
-गेहूं बिजाई के लिए 10 दिन बचे
सरकार के निर्देश के अनुसार के फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर एफआईआर का सिलसिला जारी है, लेकिन फिर भी हर रोज जिले में फसल अवशेष जलने की शिकायत मिल रही है। प्रबंधन को लेकर किसान रामेश्वर, जीत सिंह ने बताया कि गेहूं की बिजाई में अभी 10 ही दिनों का समय शेष है। ऐसे में किसानों को फसल अवशेषों का निपटान करके गेहूं की बिजाई करनी है, लेकिन धान के सीजन के चलते पहले तो किसानों को पराली की गांठें बनाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद किसानों को पराली उठाने वाले का इंतजार करना पड़ रहा है। कई-कई बार तो पराली 10 दिनों तक भी खेत से नहीं उठाई जाती है। जिससे किसानों को खुद ही पराली को गांठों को खेत से बाहर निकालना पड़ रहा है।

फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर प्रशासन निगरानी कर रहा है। ऐसे में किसानों से अपील है कि वे फसल अवशेष न जलाकर पराली प्रबंधन करने में सरकार का सहयोग करें। -डॉ. राजपाल तकनीकी सहायक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed