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फरवरी में जारी चेक दिसंबर में बांटे
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:46 PM IST
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बेटियों को भी उनकी बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। ताजा उदाहरण सामने आया है जिसमें अपनी बेटी अपना धन स्कीम के तहत बेटियों को मिलने वाली राशि के कटे चेक कार्यालय में ही पड़े रहे।
जब तक उन्हें बांटा गया तब तक वह एक्सपायर हो चुके थे। यह मामला फतेेहाबाद के खंड महिला एवं विकास कार्यालय में सामने आया है।
जब चेक की डेट बदलने के लिए कहा गया तो साफ मना कर दिया गया। कहा गया कि हिसार जाकर खुद करवा लाओ। बेटी हीना व शालू के साथ कई बेटियां अब चेक की डेट बदलवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं।
6 माह तक सीडीपीओ कार्यालय के बाबूओं के चक्कर काटती रही बेटियां
अपनी बेटी अपना धन के नाम से प्रदेश सरकार की तरफ से स्कीम चलाई गई है। जिसमें लड़की की उम्र 18 साल होने पर उसे इस स्कीम के तहत 25 हजार रुपये की राशि दी जाती है।
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इससे पहले कार्यालयों में फाइल जमा करवाई जाती है। जहां से विभाग की ओर से राशि दी जाती है। प्रार्थियों ने इस कार्यालय में पूरी फाइल तो जमा करवा दी लेकिन जब राशि लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें 6 महीने तक सीडीपीओ कार्यालय के बाबू चक्कर कटवाते रहे।
काफी दिनों बाद जब तक चेक सौंपे गए, वह एक्सपायर हो चुके थे। इस बारे में जब योजना की पात्र हिना और शालू से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा लगभग कई माह पहले अपनी बेटी अपनी धन योजना के तहत आवेदन किया गया था जिसमें सरकार बेटियों को 18 वर्ष की होने पर 25 हजार रुपये की राशि देती है।
आवेदन करने के बाद वह लगातार सीडीपीओ कार्यालय के चक्कर काटते रहे लेकिन विभाग की ओर से हर बार चेक नहीं होने का बहाना बनाया गया। जब कि विभाग के पास चेक आ चुके थे।
विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कमीशन के चक्कर में चेक नहीं दे रहे थे। इस बात का खुलासा मंगलवार को हुआ जब उन्हें फरवरी और अगस्त माह के जारी हुए चेक थमा दिए गए। जो कि किसी काम के नहीं है।
हिसार से काफी समय पहले जारी हुए हैं चेक
इस तरह के लगभग 15 पार्थी हैं जिन्हें पुरानी तिथि के चेक जारी किए गए हैं। अब जब उन्होंने चेक की तिथि ठीक करने की बात कही तो विभाग की ओर से हिसार जाकर तिथि ठीक करवाने की बात कही जा रही है।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने हिसार बात की तो हिसार वालों का कहना था कि चेक काफी टाइम पहले ही जारी किए जा चुके हैं। वह चेक की तिथि नहीं बदल सकतेे। फतेहाबाद के पात्रों के चेक को हिसार के जिला प्रोग्राम अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी किया गया है।
बड़ा सवाल, फरवरी में ही आए चेक क्यों दबाकर रखे गए
पूरे मामले में गौर करने लायक एक बात और है कि चेक की तिथि पर नजर डाली जाए तो पात्र हीना का चेक फरवरी 2015 की तिथि को जारी किए गए हैं।
बाद में उस तिथि को बदलकर अगस्त माह किया गया है। इसी तरह से शालू का चेक भी अगस्त माह में काटा गया।
ऐसे में साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना के तहत विभाग के पास चेक फरवरी माह में ही आ गए थे लेकिन अधिकारियों द्वारा चेक आवेदनकर्ताओं को न देकर दबाकर रख लिए गए और उसकी तिथि को विभाग द्वारा बदला जाता रहा।
आवेदनकर्ताओं को चेक क्यों, किस प्रलोभन के तहत नहीं दिए गए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है।
25 हजार का चेक 15 हजार का क्यों, जवाब किसी के पास नहीं
अपनी बेटी अपना धन के नाम से काफी समय पहले स्कीम शुरू की गई थी जिसमें सरकार की तरफ से 25 सौ रुपये की राशि जमा करवाई जाती थी।
जो कि अब 25 हजार रुपये मिलने थे लेकिन अब जो उन्हें चेक दिया गया है वह 15 हजार 7 सौ 25 रुपये का है। कम राशि का चेक के बारे में भी अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
खंड महिला बाल एवं परियोजना विभाग अधिकारी सुशीला रानी ने बताया कि उनके द्वारा चेक आने की जानकारी अपनी सुपरवाइजर को दे दी गई थी। सुपरवाइजरों द्वारा आगे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया जाता है।
आंगनबाड़ी आगे प्रार्थी को बताती है। अब चेेक की तिथि को बदलवाने के लिए हिसार जाना पडे़गा और वह बदल जाएगी। जहां तक बात है चेक की उसे जिला प्रोग्राम अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है उसमें हमारा कोई लेेना देना नहीं है।
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जब तक उन्हें बांटा गया तब तक वह एक्सपायर हो चुके थे। यह मामला फतेेहाबाद के खंड महिला एवं विकास कार्यालय में सामने आया है।
जब चेक की डेट बदलने के लिए कहा गया तो साफ मना कर दिया गया। कहा गया कि हिसार जाकर खुद करवा लाओ। बेटी हीना व शालू के साथ कई बेटियां अब चेक की डेट बदलवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं।
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6 माह तक सीडीपीओ कार्यालय के बाबूओं के चक्कर काटती रही बेटियां
अपनी बेटी अपना धन के नाम से प्रदेश सरकार की तरफ से स्कीम चलाई गई है। जिसमें लड़की की उम्र 18 साल होने पर उसे इस स्कीम के तहत 25 हजार रुपये की राशि दी जाती है।
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इससे पहले कार्यालयों में फाइल जमा करवाई जाती है। जहां से विभाग की ओर से राशि दी जाती है। प्रार्थियों ने इस कार्यालय में पूरी फाइल तो जमा करवा दी लेकिन जब राशि लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें 6 महीने तक सीडीपीओ कार्यालय के बाबू चक्कर कटवाते रहे।
काफी दिनों बाद जब तक चेक सौंपे गए, वह एक्सपायर हो चुके थे। इस बारे में जब योजना की पात्र हिना और शालू से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा लगभग कई माह पहले अपनी बेटी अपनी धन योजना के तहत आवेदन किया गया था जिसमें सरकार बेटियों को 18 वर्ष की होने पर 25 हजार रुपये की राशि देती है।
आवेदन करने के बाद वह लगातार सीडीपीओ कार्यालय के चक्कर काटते रहे लेकिन विभाग की ओर से हर बार चेक नहीं होने का बहाना बनाया गया। जब कि विभाग के पास चेक आ चुके थे।
विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कमीशन के चक्कर में चेक नहीं दे रहे थे। इस बात का खुलासा मंगलवार को हुआ जब उन्हें फरवरी और अगस्त माह के जारी हुए चेक थमा दिए गए। जो कि किसी काम के नहीं है।
हिसार से काफी समय पहले जारी हुए हैं चेक
इस तरह के लगभग 15 पार्थी हैं जिन्हें पुरानी तिथि के चेक जारी किए गए हैं। अब जब उन्होंने चेक की तिथि ठीक करने की बात कही तो विभाग की ओर से हिसार जाकर तिथि ठीक करवाने की बात कही जा रही है।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने हिसार बात की तो हिसार वालों का कहना था कि चेक काफी टाइम पहले ही जारी किए जा चुके हैं। वह चेक की तिथि नहीं बदल सकतेे। फतेहाबाद के पात्रों के चेक को हिसार के जिला प्रोग्राम अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी किया गया है।
बड़ा सवाल, फरवरी में ही आए चेक क्यों दबाकर रखे गए
पूरे मामले में गौर करने लायक एक बात और है कि चेक की तिथि पर नजर डाली जाए तो पात्र हीना का चेक फरवरी 2015 की तिथि को जारी किए गए हैं।
बाद में उस तिथि को बदलकर अगस्त माह किया गया है। इसी तरह से शालू का चेक भी अगस्त माह में काटा गया।
ऐसे में साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना के तहत विभाग के पास चेक फरवरी माह में ही आ गए थे लेकिन अधिकारियों द्वारा चेक आवेदनकर्ताओं को न देकर दबाकर रख लिए गए और उसकी तिथि को विभाग द्वारा बदला जाता रहा।
आवेदनकर्ताओं को चेक क्यों, किस प्रलोभन के तहत नहीं दिए गए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है।
25 हजार का चेक 15 हजार का क्यों, जवाब किसी के पास नहीं
अपनी बेटी अपना धन के नाम से काफी समय पहले स्कीम शुरू की गई थी जिसमें सरकार की तरफ से 25 सौ रुपये की राशि जमा करवाई जाती थी।
जो कि अब 25 हजार रुपये मिलने थे लेकिन अब जो उन्हें चेक दिया गया है वह 15 हजार 7 सौ 25 रुपये का है। कम राशि का चेक के बारे में भी अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
खंड महिला बाल एवं परियोजना विभाग अधिकारी सुशीला रानी ने बताया कि उनके द्वारा चेक आने की जानकारी अपनी सुपरवाइजर को दे दी गई थी। सुपरवाइजरों द्वारा आगे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया जाता है।
आंगनबाड़ी आगे प्रार्थी को बताती है। अब चेेक की तिथि को बदलवाने के लिए हिसार जाना पडे़गा और वह बदल जाएगी। जहां तक बात है चेक की उसे जिला प्रोग्राम अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है उसमें हमारा कोई लेेना देना नहीं है।