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महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद अद्भुत संयोग, सजे शिवालय

Thu, 20 Feb 2020 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2020 12:00 AM IST
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Amazing coincidence, adorned Shivalaya after 117 years on Mahashivaratri, fatehabad
शिवरात्रि पर सजा श्याम मंदिर। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार महाशिवरात्रि को इस बार 117 साल बाद फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को एक अद्भुत संयोग बन रहा है। शनि स्वयं की राशि मकर में है और शुक्र अपनी उच्च की राशि मीन में होंगे जो कि एक दुर्लभ योग है। इस मौके पर फतेहाबाद के सभी मंदिरों को सजाया गया है। हाईवे स्थित दुर्गा मंदिर व प्राचीन शिवालय मंदिर में शिवरात्रि पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
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श्याम मंदिर के पुजारी ज्योतिष राजेश शर्मा बताया कि अगर किसी को अपना सूर्य मजबूत करना है या सरकारी कामों में सफलता प्राप्त करनी है तो तांबे के लोटे में जल मिश्रित गुण से शिवलिंग का अभिषेक करें। वैवाहिक जीवन मधुर बनाने के लिए पति-पत्नी शिवलिंग का अभिषेक करें। अगर आपकी कुंडली में मंगल पीड़ित है तो शिवलिंग का हल्दी मिश्रित जल से अभिषेक करें। राजेश शर्मा के अनुसार केतु ग्रह को मजबूत करने के लिए जल में शहद मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने के लिए कच्चे दूध से अभिषेक करें। गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए अपने माथे पर और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं। केसर मिश्रित जल चढ़ाएं शिवलिंग में सबसे ज्यादा एनर्जी पाई जाती है। इसके साथ 108 बार ओम नम: शिवाय का जाप करें।
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शाम 5 बजकर 21 मिनट पर जलाभिषेक अत्यंत शुभ
राजेश शर्मा कहते है कि इस बार महाशिवरात्रि के दिन शाम 5 बजकर 21 मिनट पर त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। वास्तव में त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होने पर ही महाशिवरात्रि का पुण्यकाल शुरू होता है। शर्मा कहते हैं कि दोनों के संगम काल में शिव जलाभिषेक शाम 5.21 बजे किया जाए तो अत्यंत श्रेष्ठ है। शिव का जलाभिषेक दूध, दही, शहद, घी, शर्बत, गंगाजल से किया जाता है। शिव भक्त यदि गले में रुद्राक्ष धारण करके जलाभिषेक व पूजन करें तो शिव की विशेष कृपा रहती है।
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राशि अनुसार ऐसे करे शिवरात्रि का पूजन
वृष - दूध मिश्रित जल चढ़ाएं।
मिथुन- दही मिश्रित जल चढ़ाएं।
कर्क- चंदन का इत्र अर्पित करें।
सिंह -घी का दीपक जलाएं।
कन्या - काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करें।
तुला- जल में सफेद चंदन मिलाएं।
वृश्चिक- जल और बेलपत्र चढ़ाएं।
धनु- अबीर या गुलाल चढ़ाएं।
मकर- भांग और धतूरा चढ़ाएं।
कुंभ- पुष्प चढ़ाएं।
मीन- गन्ने के रस और केसर से अभिषेक करें।
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