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खुलासा : अस्पताल में सेवादार दे रहा मरीजों को एलोपेथी दवाइयां
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आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक के कमरे में सोया हुआ सेवादार ।
- फोटो : Fatehabad
इस समय देश-दुनिया में कोरोना से ज्यादा खतरनाक कोई बीमारी नहीं है। हमारे जिले के गांव जांडवाला बागड़ में भी एक कोरोना का मरीज मिलने से पूरे जिले के स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है। पूरे गांव को सील कर स्वास्थ्यकर्मी एक-एक गांव में जाकर ग्रामीणों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। वहीं इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद गांव के आयुर्वेदिक अस्पताल में लापरवाही सामने आई है। गांव के अस्पताल में चिकित्सक अपनी ड्यूटी पर नहीं होते और उनके पीछे अस्पताल के सेवादार ही मरीजों को दवाइयां देने का काम कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद किया ताकि स्वास्थ्य विभाग की नींद खुल सके।
वीरवार को ‘अमर उजाला’ की टीम जब कोरोना का मामला सामने आने के बाद गांव जांडवाला बागड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का पता लगाने पहुंची थी। इस दौरान ‘अमर उजाला’ संवाददाता खुद मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल के सारे दरवाजे खुले हुए थे और चिकित्सक के कमरे में एक सेवादार सोया हुआ था। जब उक्त सेवादार को जगाकर बैचेनी व सिर-दर्द की शिकायत की गई तो उसने कमरे में रखी अलमारी खोलकर पैरासिटामोल दवाई का एक पत्ता निकाल दिया और कहा कि एक-एक गोली सुबह-शाम खा लेना। जबकि ये आयुर्वेदिक अस्पताल है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो डॉक्टर हैं। तो इस पर उक्त व्यक्ति ने खुद को सेवादार बताया और कहा कि चिकित्सक आए नहीं हैं। इतने संवेदनशील गांव में अगर स्वास्थ्य सेवाओं का ये हाल होगा तो आम गांवों में क्या हाल होगा।
‘गांव जांडवाला बागड़ में तैनात आयुष चिकित्सक की गांव गिल्लाखेड़ा और गांव जांडवाला बागड़ में ड्यूटी है। वीरवार को वो गांव गिल्लाखेड़ा में ड्यूटी पर तैनात था, लेकिन सेवादार द्वारा दवाई देना और वे भी ऐलोपैथी तो बिल्कुल ही गलत है। मैं इसकी जांच करूंगा । ’ - धर्मपाल पूनिया, जिला आयुर्वेद अधिकारी, फतेहाबाद।
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वीरवार को ‘अमर उजाला’ की टीम जब कोरोना का मामला सामने आने के बाद गांव जांडवाला बागड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का पता लगाने पहुंची थी। इस दौरान ‘अमर उजाला’ संवाददाता खुद मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल के सारे दरवाजे खुले हुए थे और चिकित्सक के कमरे में एक सेवादार सोया हुआ था। जब उक्त सेवादार को जगाकर बैचेनी व सिर-दर्द की शिकायत की गई तो उसने कमरे में रखी अलमारी खोलकर पैरासिटामोल दवाई का एक पत्ता निकाल दिया और कहा कि एक-एक गोली सुबह-शाम खा लेना। जबकि ये आयुर्वेदिक अस्पताल है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो डॉक्टर हैं। तो इस पर उक्त व्यक्ति ने खुद को सेवादार बताया और कहा कि चिकित्सक आए नहीं हैं। इतने संवेदनशील गांव में अगर स्वास्थ्य सेवाओं का ये हाल होगा तो आम गांवों में क्या हाल होगा।
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‘गांव जांडवाला बागड़ में तैनात आयुष चिकित्सक की गांव गिल्लाखेड़ा और गांव जांडवाला बागड़ में ड्यूटी है। वीरवार को वो गांव गिल्लाखेड़ा में ड्यूटी पर तैनात था, लेकिन सेवादार द्वारा दवाई देना और वे भी ऐलोपैथी तो बिल्कुल ही गलत है। मैं इसकी जांच करूंगा । ’ - धर्मपाल पूनिया, जिला आयुर्वेद अधिकारी, फतेहाबाद।
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