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मौसम के बाद धरती पुत्रों पर सरकारी तंत्र की मार
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कृषि विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लघुसचिवालय में एसडीएम से मिलने पहुंचे गांव जांण्डल?
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। मौसम के बाद धरती पुत्रों पर सरकारी तंत्र की मार लगातार जारी है। पहले डीएपी, फिर यूरिया के लिए लाइनों में लगे तो अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्लेम लेने के लिए भी मार झेल रहे हैं। फसल के नुकसान की आकलन रिपोर्ट बनाने में कृषि विभाग से लेकर बीमा कंपनियों अधिकारियों तक ने अंधेरगर्दी की हुई है। भूना खंड के गांव जांडली कलां के एक किसान के खेत की रिपोर्ट भरते समय तो अजीब कारनामा किया हुआ है। किसान दयानंद ने फसल की बिजाई 30 अप्रैल को की, लेकिन आकलन रिपोर्ट में नुकसान 23 अप्रैल को ही दिखा दिया है।
किसान ने पांच हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा करवाया था। विभाग ने तीन हेक्टेयर जमीन में जलभराव से 40 प्रतिशत फसल खराब दिखाई है। वीरवार को जांडली कलां के किसानों ने एसडीएम राजेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। किसान सुनील कुमार, धर्मबीर, दयानंद, सुरेश कुमार, सतबीर सिंह, मनजीत, नरेश कुमार, प्रवीन व जोगी आदि ने बताया कि कृषि अधिकारियों ने बीमा कंपनी के साथ मिलकर किसानों के साथ धोखा किया है। खरीफ फसल 2021 के लिए किसानों ने प्रशासन को जलभराव के कारण खराब हुई फसल के बारे में अवगत करवाया था। इसके बाद कृषि अधिकारी खराब फसल का आकलन करने गांव में पहुंचे थे। खेत मालिक को बिना सूचना दिए ही उनके खेत में खराब फसल का ब्योरा तैयार कर दिया।। किसानों की फसल 90 फीसदी तक खराब हुई, लेकिन अधिकारियों ने कह दिया कि फार्म में 90 प्रतिशत फसल खराबा दिखाया तो फार्म रद्द हो जाएगा। इसलिए फार्म में 75 प्रतिशत फसल खराब दिखा दी गई। किसानों ने अपनी खराब फसल के फार्म का डाटा विभाग से निकलवाया तो पता चला कि अधिकारियों ने उनके खेतों में सिर्फ 20 प्रतिशत ही फसल को खराब दिखाया है।
फार्म पर किसी के किए फर्जी हस्ताक्षर तो किसी का लगाया फर्जी अंगूठा
किसान सुनील व धर्मबीर ने बताया कि कृषि अधिकारियों ने फार्म पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए हुए हैं। उनके हस्ताक्षर जो विभाग के पास मिले हैं, उनका मैच नहीं है। बैंक में वो हस्ताक्षर दूसरी तरह किए हुए हैं। धर्मबीर ने बताया कि विभाग के पास मिले उसके फार्म में अंगूठा लगा हुआ है, जो पेंसिल से लगाया गया है।
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कोट
फसल बिजाई से सात दिन पहले नुकसान दिखाया गया है, तो यह गलत है। हो सकता है कि लिखने में गलत हो गया हो। बाकी इसकी जांच करेंगे, अगर कहीं लापरवाही हुई तो कार्रवाई होगी।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग
कोट
मेरे पास किसानों की शिकायत आई है। जांच के लिए किसानों से थोड़ा समय मांगा गया है। जांच में जो दोषी होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
- राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद
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किसान ने पांच हेक्टेयर जमीन पर फसल बीमा करवाया था। विभाग ने तीन हेक्टेयर जमीन में जलभराव से 40 प्रतिशत फसल खराब दिखाई है। वीरवार को जांडली कलां के किसानों ने एसडीएम राजेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। किसान सुनील कुमार, धर्मबीर, दयानंद, सुरेश कुमार, सतबीर सिंह, मनजीत, नरेश कुमार, प्रवीन व जोगी आदि ने बताया कि कृषि अधिकारियों ने बीमा कंपनी के साथ मिलकर किसानों के साथ धोखा किया है। खरीफ फसल 2021 के लिए किसानों ने प्रशासन को जलभराव के कारण खराब हुई फसल के बारे में अवगत करवाया था। इसके बाद कृषि अधिकारी खराब फसल का आकलन करने गांव में पहुंचे थे। खेत मालिक को बिना सूचना दिए ही उनके खेत में खराब फसल का ब्योरा तैयार कर दिया।। किसानों की फसल 90 फीसदी तक खराब हुई, लेकिन अधिकारियों ने कह दिया कि फार्म में 90 प्रतिशत फसल खराबा दिखाया तो फार्म रद्द हो जाएगा। इसलिए फार्म में 75 प्रतिशत फसल खराब दिखा दी गई। किसानों ने अपनी खराब फसल के फार्म का डाटा विभाग से निकलवाया तो पता चला कि अधिकारियों ने उनके खेतों में सिर्फ 20 प्रतिशत ही फसल को खराब दिखाया है।
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फार्म पर किसी के किए फर्जी हस्ताक्षर तो किसी का लगाया फर्जी अंगूठा
किसान सुनील व धर्मबीर ने बताया कि कृषि अधिकारियों ने फार्म पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए हुए हैं। उनके हस्ताक्षर जो विभाग के पास मिले हैं, उनका मैच नहीं है। बैंक में वो हस्ताक्षर दूसरी तरह किए हुए हैं। धर्मबीर ने बताया कि विभाग के पास मिले उसके फार्म में अंगूठा लगा हुआ है, जो पेंसिल से लगाया गया है।
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फसल बिजाई से सात दिन पहले नुकसान दिखाया गया है, तो यह गलत है। हो सकता है कि लिखने में गलत हो गया हो। बाकी इसकी जांच करेंगे, अगर कहीं लापरवाही हुई तो कार्रवाई होगी।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग
कोट
मेरे पास किसानों की शिकायत आई है। जांच के लिए किसानों से थोड़ा समय मांगा गया है। जांच में जो दोषी होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
- राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद