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भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाएं : कथावाचक
Sat, 02 Aug 2025 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:03 PM IST
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रतिया। पार्श्व पद्मावती शक्ति धाम में श्रीराम कथा के दूसरे दिन आचार्य महेश कृष्ण महाराज ने कहा कि प्राण जाए पर वचन न जाए। इसी वचन पर चलते हुए भगवान श्रीरामचंद्र ने 14 वर्ष के वनवास को हंसते-हंसते स्वीकार कर लिया था।
उनके वनवास से शिक्षा मिलती है कि हमें अपने वचनों से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को कभी भी मन में कोई लोभ-लालच लेकर सच्चे प्रभु की भक्ति नहीं करनी चाहिए। जो व्यक्ति मोहमाया के लिए प्रभु की भक्ति करता है वे उनसे सदैव ही दूर रहते हैं।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिलता है। इस मानव जीवन को व्यर्थ में न गंवाकर प्रभु की भक्ति में लगाना चाहिए। केवल मानव जीवन में ही सच्चे मालिक की भक्ति की जा सकती है। हर इंसान को अपने जीवन की व्यस्तता में से कुछ समय निकालकर भगवान की आराधना करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हमें दीन-दुखियों की भी सेवा करनी चाहिए। जरूरतमंद की सेवा करना ही प्रभु की सच्ची भक्ति है। कथा में समिति प्रधान गिरधारी लाल सिंगला के अलावा साधू राम बांसल, सुभाष सिंगला, संजीव गोयल, राजेंद्र जैन, बबलू मित्तल, मौजी, रविंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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उनके वनवास से शिक्षा मिलती है कि हमें अपने वचनों से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को कभी भी मन में कोई लोभ-लालच लेकर सच्चे प्रभु की भक्ति नहीं करनी चाहिए। जो व्यक्ति मोहमाया के लिए प्रभु की भक्ति करता है वे उनसे सदैव ही दूर रहते हैं।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिलता है। इस मानव जीवन को व्यर्थ में न गंवाकर प्रभु की भक्ति में लगाना चाहिए। केवल मानव जीवन में ही सच्चे मालिक की भक्ति की जा सकती है। हर इंसान को अपने जीवन की व्यस्तता में से कुछ समय निकालकर भगवान की आराधना करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हमें दीन-दुखियों की भी सेवा करनी चाहिए। जरूरतमंद की सेवा करना ही प्रभु की सच्ची भक्ति है। कथा में समिति प्रधान गिरधारी लाल सिंगला के अलावा साधू राम बांसल, सुभाष सिंगला, संजीव गोयल, राजेंद्र जैन, बबलू मित्तल, मौजी, रविंद्र जैन आदि मौजूद रहे।