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भगवान के प्रति समपर्ण से होता है उद्धार: यमुनापुरी
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। अगर हम भगवान के प्रति समर्पित होकर भक्ति करेंगे तो ही हमारा उद्धार संभव है वरना दिखावे के कारण हम भटकते रहेंगे और भगवान की प्राप्ति नहीं होगी। यह बात हरिद्वार के महामंडलेश्वर यमुनापुरी महाराज ने कही। वे आरके कॉलोनी स्थित श्री वैष्णो देवी पिंडी मंदिर में आयोजित समारोह के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रवचन कर रहे थे।
इस अवसर पर कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष कृष्णा पूनिया ने पूजा अर्चना में विशेष तौर पर भाग लिया। प्रवचन करते हुए यमुनापुरी महाराज ने कहा कि अक्सर हम कोई भी कार्य करते हैं उसमें दिखावा अधिक और भाव तथा समर्पण कम होता है। हम चाहते हैं कि जो कार्य भी हो हमारे अनुरूप हो, इसी कारण हमें दुखों का सामना करना पड़ता है।
उदाहरण देते हुए महाराज ने कहा कि अगर हम गुलाब के फूल से प्यार करते हैं तो हमें उसे डाली से तोड़ना नहीं चाहिए। तोड़ने से तो उसकी विदाई शुरू हो गई तथा थोड़े समय बाद वो मुरझा जाएगा। यही स्थिति हम दुनिया में दूसरों के प्रति रखते हैं कि जो हमारे अनुरूप चलता है, उसे तो सही करार देते हैं, लेकिन जो हमारे अनुरूप नहीं है उसे गलत करार देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम में समर्पण दोनों तरफ से होना चाहिए। अगर किसी में कोई गलती है तो हम उसकी गलती के साथ स्वीकार करें तथा सामने वाला भी हमारी गलती को नजरअंदाज कर हमें स्वीकार करें। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर मंदिर के सचिन शास्त्री, सतीश शर्मा, नरेश मदान, गौतम शर्मा, गगन शर्मा, विक्की शर्मा, सूरज सिंह, सुभाष सरदाना, लीलाकृष्ण आदि उपस्थित थे।
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फतेहाबाद। अगर हम भगवान के प्रति समर्पित होकर भक्ति करेंगे तो ही हमारा उद्धार संभव है वरना दिखावे के कारण हम भटकते रहेंगे और भगवान की प्राप्ति नहीं होगी। यह बात हरिद्वार के महामंडलेश्वर यमुनापुरी महाराज ने कही। वे आरके कॉलोनी स्थित श्री वैष्णो देवी पिंडी मंदिर में आयोजित समारोह के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रवचन कर रहे थे।
इस अवसर पर कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष कृष्णा पूनिया ने पूजा अर्चना में विशेष तौर पर भाग लिया। प्रवचन करते हुए यमुनापुरी महाराज ने कहा कि अक्सर हम कोई भी कार्य करते हैं उसमें दिखावा अधिक और भाव तथा समर्पण कम होता है। हम चाहते हैं कि जो कार्य भी हो हमारे अनुरूप हो, इसी कारण हमें दुखों का सामना करना पड़ता है।
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उदाहरण देते हुए महाराज ने कहा कि अगर हम गुलाब के फूल से प्यार करते हैं तो हमें उसे डाली से तोड़ना नहीं चाहिए। तोड़ने से तो उसकी विदाई शुरू हो गई तथा थोड़े समय बाद वो मुरझा जाएगा। यही स्थिति हम दुनिया में दूसरों के प्रति रखते हैं कि जो हमारे अनुरूप चलता है, उसे तो सही करार देते हैं, लेकिन जो हमारे अनुरूप नहीं है उसे गलत करार देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम में समर्पण दोनों तरफ से होना चाहिए। अगर किसी में कोई गलती है तो हम उसकी गलती के साथ स्वीकार करें तथा सामने वाला भी हमारी गलती को नजरअंदाज कर हमें स्वीकार करें। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर मंदिर के सचिन शास्त्री, सतीश शर्मा, नरेश मदान, गौतम शर्मा, गगन शर्मा, विक्की शर्मा, सूरज सिंह, सुभाष सरदाना, लीलाकृष्ण आदि उपस्थित थे।
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