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लगातार दुसरे दिन बरसात ने धान उत्पादक किसानों के धो दिए सपने
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में चल रही बारिश ने खेतों में खड़ी धान की बासमती किस्म को धो के रख दिया। पक कर मंडियों में आने को तैयार फसल को डूूबता देख किसानों के चेहरे मुरझा गए है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल की बाली अगर दो दिन तक पानी में रही तो बाली काली पड़ने की आशंका है। इसका सीधा असर उत्पादन पर गिरेगा। धान की अगेती किस्म की बासमती की वैरायटी पककर तैयार थी लेकिन बरसात के चलते नरमा व बाजरे की फसल अब 15 से 20 दिन देरी से मंडी में आएगी। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार रविवार को फतेहाबाद में 12 एमएम बरसात दर्ज की गई। रतिया में 5 व टोहाना में 6 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई।
शनिवार को जिले में हुई तेज बरसात व हवा चलने से धान की फसल खेतों में बिछ गई। रात को हवाओं ने फसल को जमीन के पानी में ही भिगोए रखा। रविवार को दूूसरे दिन भी लगातार बरसात होने से धान की फसल खेत में ही बिछी रहने से अब धान के उत्पादन में प्रति एकड़ 30 फीसदी तक उत्पादन कम होने के आसार है जबकि शनिवार को उत्पादन में 20 फीसदी नुक्सान का अनुमान माना जा रहा था। रविवार को फतेहाबाद ,भूना, भट्टू ,जाखल, रतिया व टोहाना में बरसात चलने से मंडियों में धान व नरमें की आवक नहीं हो पाई। गांव हसंगा के किसान वीरभान, रामचंद्र व चंद्रभान ने बताया कि उनकी धान की 1509 किस्म की वैरायटी पककर तैयार थी। अगले सप्ताह उन्होंने खेत में कंबाईन लगवानी थी लेकिन अचानक बरसे पानी ने उनकी उमीदों पर पानी फेर दिया। गांव अहलीसदर के ओमप्रकाश ने बताया कि 15 दिन बाद उन्होंने धान की कटाई करनी थी लेकिन अब बरसात होने के बाद मौसम खुलेगा तो धान की फसल में बीमारी लगेगी जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई
कृषि विभाग के अनुसार इस बार जिले में धान का रकबा काफी बढ़ा है। इस बार जिले में एक लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई है। इसमें सबसे ज्यादा परमल, उसके बाद मुच्छल, 1509 व पूसा 1121 की वैरायटी लगाई गई है। जिले में अब तक पूरी फसल पकने को तैयार है। नरमे की फसल को भी इस बारिश से नुकसान होगा। नरमे के टिंडे जमीन पर गिर गए हैं जिनमें कपास का फुटाव तैयार था, लेकिन जमीन पर गिरने के चलते अब टिंडा गलने की स्थिति आ सकती है।
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शहर के निचले इलाकों में भरा पानी
लगातार दूसरे दिन बरसात होने से शहर के निचले इलाकों में एवं टूटी सड़कों में बने गढ्ढे पानी से भरे रहे जिसके चलते आने-जाने वाले लोगों को खासी परेशानी रही जिसमें मुख्य रूप से शिव चौक, थाना रोड़, नेशनल हाइवे, धर्मशाला रोड, लाजपत नगर व जगजीवनपुरा के इलाकों में सड़क पर बने गढ्ढों जलभराव हो गया। चार मरला कालोनी में पिछले छह माह से नगर परिषद द्वारा तोड़ी गई गली में दो दिन से पानी का भराव होने से लोगों का घराें से निकलना ही दूभर हो गया है। शनिवार को लोगों ने पानी के भराव को लेकर रोष भी जताया था। गली रामबाग में छह माह से टूटी सड़क में सीवरेज लाइन नहीं डाली गई और अब वहां भी जलभराव हो गया। सोमवार को भी अगर बरसात होती है तो शहर की कई कालोनियों व बाजारों में हालात और बदतर हो सकते हैं।
वर्जन
अब फसल पककर तैयार है ऐसे में बरसात के कारण नुकसान ज्यादा है। लगातार दूसरे दिन बरसात होने के कारण धान की जमीन में पानी का जमाव हो गया है। हवा चलने से धान की बाली जमीन पर बिछ गई। दो दिन तक मौसम साफ नहीं होता तो धान की बाली काली पड़ सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ना तय है। उन्होंने बताया कि मौैसम साफ होने पर वातावरण में ठंडक रहेगी और धान की फसल को बीमारी लगने की आशंका ज्यादा हो जाएगी।
डा. बलबंत सिंह सहारण, कृषि उप निदेशक
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रविवार को फतेहाबाद में 12 एमएम रतिया में 6 एमएम टोहाना में 5 एमएम बरसात रिकार्ड की गई।
सुरेश दहिया, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी फतेहाबाद
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फतेहाबाद। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में चल रही बारिश ने खेतों में खड़ी धान की बासमती किस्म को धो के रख दिया। पक कर मंडियों में आने को तैयार फसल को डूूबता देख किसानों के चेहरे मुरझा गए है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल की बाली अगर दो दिन तक पानी में रही तो बाली काली पड़ने की आशंका है। इसका सीधा असर उत्पादन पर गिरेगा। धान की अगेती किस्म की बासमती की वैरायटी पककर तैयार थी लेकिन बरसात के चलते नरमा व बाजरे की फसल अब 15 से 20 दिन देरी से मंडी में आएगी। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार रविवार को फतेहाबाद में 12 एमएम बरसात दर्ज की गई। रतिया में 5 व टोहाना में 6 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई।
शनिवार को जिले में हुई तेज बरसात व हवा चलने से धान की फसल खेतों में बिछ गई। रात को हवाओं ने फसल को जमीन के पानी में ही भिगोए रखा। रविवार को दूूसरे दिन भी लगातार बरसात होने से धान की फसल खेत में ही बिछी रहने से अब धान के उत्पादन में प्रति एकड़ 30 फीसदी तक उत्पादन कम होने के आसार है जबकि शनिवार को उत्पादन में 20 फीसदी नुक्सान का अनुमान माना जा रहा था। रविवार को फतेहाबाद ,भूना, भट्टू ,जाखल, रतिया व टोहाना में बरसात चलने से मंडियों में धान व नरमें की आवक नहीं हो पाई। गांव हसंगा के किसान वीरभान, रामचंद्र व चंद्रभान ने बताया कि उनकी धान की 1509 किस्म की वैरायटी पककर तैयार थी। अगले सप्ताह उन्होंने खेत में कंबाईन लगवानी थी लेकिन अचानक बरसे पानी ने उनकी उमीदों पर पानी फेर दिया। गांव अहलीसदर के ओमप्रकाश ने बताया कि 15 दिन बाद उन्होंने धान की कटाई करनी थी लेकिन अब बरसात होने के बाद मौसम खुलेगा तो धान की फसल में बीमारी लगेगी जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
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19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई
कृषि विभाग के अनुसार इस बार जिले में धान का रकबा काफी बढ़ा है। इस बार जिले में एक लाख 19 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई है। इसमें सबसे ज्यादा परमल, उसके बाद मुच्छल, 1509 व पूसा 1121 की वैरायटी लगाई गई है। जिले में अब तक पूरी फसल पकने को तैयार है। नरमे की फसल को भी इस बारिश से नुकसान होगा। नरमे के टिंडे जमीन पर गिर गए हैं जिनमें कपास का फुटाव तैयार था, लेकिन जमीन पर गिरने के चलते अब टिंडा गलने की स्थिति आ सकती है।
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शहर के निचले इलाकों में भरा पानी
लगातार दूसरे दिन बरसात होने से शहर के निचले इलाकों में एवं टूटी सड़कों में बने गढ्ढे पानी से भरे रहे जिसके चलते आने-जाने वाले लोगों को खासी परेशानी रही जिसमें मुख्य रूप से शिव चौक, थाना रोड़, नेशनल हाइवे, धर्मशाला रोड, लाजपत नगर व जगजीवनपुरा के इलाकों में सड़क पर बने गढ्ढों जलभराव हो गया। चार मरला कालोनी में पिछले छह माह से नगर परिषद द्वारा तोड़ी गई गली में दो दिन से पानी का भराव होने से लोगों का घराें से निकलना ही दूभर हो गया है। शनिवार को लोगों ने पानी के भराव को लेकर रोष भी जताया था। गली रामबाग में छह माह से टूटी सड़क में सीवरेज लाइन नहीं डाली गई और अब वहां भी जलभराव हो गया। सोमवार को भी अगर बरसात होती है तो शहर की कई कालोनियों व बाजारों में हालात और बदतर हो सकते हैं।
वर्जन
अब फसल पककर तैयार है ऐसे में बरसात के कारण नुकसान ज्यादा है। लगातार दूसरे दिन बरसात होने के कारण धान की जमीन में पानी का जमाव हो गया है। हवा चलने से धान की बाली जमीन पर बिछ गई। दो दिन तक मौसम साफ नहीं होता तो धान की बाली काली पड़ सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ना तय है। उन्होंने बताया कि मौैसम साफ होने पर वातावरण में ठंडक रहेगी और धान की फसल को बीमारी लगने की आशंका ज्यादा हो जाएगी।
डा. बलबंत सिंह सहारण, कृषि उप निदेशक
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रविवार को फतेहाबाद में 12 एमएम रतिया में 6 एमएम टोहाना में 5 एमएम बरसात रिकार्ड की गई।
सुरेश दहिया, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी फतेहाबाद