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10 साल में 96 स्कूलों से 50 लाख का सामान चोरी, बरामदगी 20 फीसदी से कम
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गांवों के सरकारी स्कूलों में चोरी आम बात है। वहां पर न तो गार्ड होते और न ही रात को रोशनी की व्यवस्था। नतीजा ये है कि बीते एक दशक में जिले में 96 स्कूलों में चोरी हुई है। इसके बावजूद न तो शिक्षा विभाग खुद गंभीर और न पुलिस दिलचस्पी लेती। यही वजह है कि सरकारी स्कूलों से चोरी हुए सामान की 20 फीसदी भी रिकवरी नहीं हो पाती। शिक्षा विभाग की मानें तो उनका 50 लाख का माल वर्ष 2010 से अब तक हो चुका है। मगर 5 लाख की रिकवरी भी मुश्किल से हुई है। चोर पकड़े जाते हैं, तब तक सामान ही खुर्द बुर्द हो जाता है। इस नुकसान को रोकने की दिशा में कोई विभाग प्रयास नहीं कर रहा। गांवों के स्कूलों में चोरी की घटनाएं ज्यादा होती हैं, क्योंकि रात को वहां पुलिस भी नहीं आती। संवाद
न सुरक्षा गार्ड है न चौकीदार
गांवों में सरकारी स्कूलों में गार्ड अथवा चौकीदारों की कोई व्यवस्था नहीं है। शाम को करीब 4 बजे तक पूरा स्टाफ चला जाता है। इसके बाद वहां सन्नाटा होता है। रात को अंधेरा रहता है। कई स्कूलों में बैठकर रात को लोग शराब तक पीते हैं। चोर भी इसी का फायदा उठाते हैं कि रात को वहां कोई निगरानी नहीं होती। यहां तक कि ग्रामीण स्कूलों में सीसीटीवी भी नहीं हैं।
चोर ले जाते हैं लाखों का सामान
वर्ष 2008-09 में विभाग ने स्कूलों में एजुसेट लगवाए थे। एजुसेट के साथ कीमती इनवर्टर व बैटरी होते हैं, जिन पर चोरों की नजर रहती है। इसके अलावा चोर मिड-डे मील के बर्तन भी ले जाते हैं। वर्ष 2008 से 2012 के बीच जिले के 43 स्कूलों से एजुसेट चोरी हुए थे, जिनका कभी सुराग नहीं लग पाया।
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कानूनी झंझटों से बचते हैं शिक्षक
पुलिस कर्मचारी बताते हैं कि चोरों को पकड़ना ही काफी नहीं होता, उनके खिलाफ जुर्म साबित करना होता है। इसके लिए शिक्षकों की गवाही चाहिए। सामान की सुपुर्दारी भी कोर्ट से लेनी पड़ती है। स्कूल स्टाफ हमेशा कानूनी झंझटों से बचता है। शिक्षकों के तबादले भी हो जाते हैं। ऐसे में केसों की पैरवी करने वाला कोई नहीं होता। कई शिक्षक पुलिस में शिकायत देने से भी घबराते हैं कि कहीं चोर उनसे रंजिश न रखने लगें। अक्सर होता यही है कि चोर भी उसी गांव के होते हैं, जिस स्कूल में चोरी होती है।
कोट
निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जाती है : डीईओ
हमारे यहां से चोरी के मामलों की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाती है। कई मामलों में चोर पकड़े जाते हैं और उनसे पंचायत स्तर पर ही भरपाई करवा ली जाती है। केस दर्ज होने के बाद चोर भी पकड़े जाते हैं, लेकिन देरी होने पर सामान रिकवर नहीं हो पाता।
-दयानंद सिहाग, डीईओ, फतेहाबाद।
पुलिस के स्तर पर लापरवाही नहीं : एसपी
पुलिस सरकारी कार्यालयों से होने वाली चोरी को गंभीरता से लेती है। शिकायत मिलते ही केस दर्ज होता है। हाल ही में बोदीवाली के सरकारी स्कूल से कैमरे चोरी करने के मामले में पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया था। उससे 15 कैमरे बरामद किए गए। स्कूलों के स्तर पर भी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए। ग्राम पंचायतों का भी सहयोग लिया जा सकता है। पुलिस रात को भी गांवों में गश्त करती है।
-राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।
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न सुरक्षा गार्ड है न चौकीदार
गांवों में सरकारी स्कूलों में गार्ड अथवा चौकीदारों की कोई व्यवस्था नहीं है। शाम को करीब 4 बजे तक पूरा स्टाफ चला जाता है। इसके बाद वहां सन्नाटा होता है। रात को अंधेरा रहता है। कई स्कूलों में बैठकर रात को लोग शराब तक पीते हैं। चोर भी इसी का फायदा उठाते हैं कि रात को वहां कोई निगरानी नहीं होती। यहां तक कि ग्रामीण स्कूलों में सीसीटीवी भी नहीं हैं।
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चोर ले जाते हैं लाखों का सामान
वर्ष 2008-09 में विभाग ने स्कूलों में एजुसेट लगवाए थे। एजुसेट के साथ कीमती इनवर्टर व बैटरी होते हैं, जिन पर चोरों की नजर रहती है। इसके अलावा चोर मिड-डे मील के बर्तन भी ले जाते हैं। वर्ष 2008 से 2012 के बीच जिले के 43 स्कूलों से एजुसेट चोरी हुए थे, जिनका कभी सुराग नहीं लग पाया।
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कानूनी झंझटों से बचते हैं शिक्षक
पुलिस कर्मचारी बताते हैं कि चोरों को पकड़ना ही काफी नहीं होता, उनके खिलाफ जुर्म साबित करना होता है। इसके लिए शिक्षकों की गवाही चाहिए। सामान की सुपुर्दारी भी कोर्ट से लेनी पड़ती है। स्कूल स्टाफ हमेशा कानूनी झंझटों से बचता है। शिक्षकों के तबादले भी हो जाते हैं। ऐसे में केसों की पैरवी करने वाला कोई नहीं होता। कई शिक्षक पुलिस में शिकायत देने से भी घबराते हैं कि कहीं चोर उनसे रंजिश न रखने लगें। अक्सर होता यही है कि चोर भी उसी गांव के होते हैं, जिस स्कूल में चोरी होती है।
कोट
निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जाती है : डीईओ
हमारे यहां से चोरी के मामलों की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाती है। कई मामलों में चोर पकड़े जाते हैं और उनसे पंचायत स्तर पर ही भरपाई करवा ली जाती है। केस दर्ज होने के बाद चोर भी पकड़े जाते हैं, लेकिन देरी होने पर सामान रिकवर नहीं हो पाता।
-दयानंद सिहाग, डीईओ, फतेहाबाद।
पुलिस के स्तर पर लापरवाही नहीं : एसपी
पुलिस सरकारी कार्यालयों से होने वाली चोरी को गंभीरता से लेती है। शिकायत मिलते ही केस दर्ज होता है। हाल ही में बोदीवाली के सरकारी स्कूल से कैमरे चोरी करने के मामले में पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया था। उससे 15 कैमरे बरामद किए गए। स्कूलों के स्तर पर भी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए। ग्राम पंचायतों का भी सहयोग लिया जा सकता है। पुलिस रात को भी गांवों में गश्त करती है।
-राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।